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चुनावी डायरी

बिहार : नीतीश कुमार के साथ उनकी कोर टीम भी बदलेगी, 4 बड़े अफसर हटाए जा रहे.. डिटेल जानिए

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बिहार विधान मंडल के सेंट्रल हॉल में एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में नीतीश कुमार को नेता चुना गया। (साभार- नीतीश कुमार फेसबुक)

पटना | हमारे संवाददाता

बिहार में राजनीतिक हलचल के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की खबरों ने प्रशासनिक महकमे में भी हलचल मचा दी है।  सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार के दिल्ली शिफ्ट होने के साथ ही उनके सबसे करीबी और भरोसेमंद अधिकारियों को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नीतीश कुमार के साथ लंबे समय से काम करने वाले ये वरिष्ठ आईएएस और आईएफएस अधिकारी बिहार प्रशासन की ‘कोर टीम’ माने जाते थे। इनके जाने से नई सरकार बिहार को अपने ढंग से चलाने में पूरी तरह स्वतंत्र होगी, और पुराने प्रशासनिक समीकरणों में बड़ा बदलाव आएगा।

ये अफसर बदले जा रहे

सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिव आईएएस अनुपम कुमार, शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बी. राजेंद्र, मुख्यमंत्री के ओएसडी आईएफएस अधिकारी गोपाल सिंह और सीनियर आईएएस प्रतिमा एस. वर्मा के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन आईएएस लॉबी में इसको लेकर चर्चा आम है।

बिहार से दिल्ली का रुख

1- अनुपम कुमार (IAS)

अनुपम कुमार बिहार कैडर के एक बेहद प्रभावशाली और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। वे लंबे समय से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद और करीबी अधिकारियों की ‘कोर टीम’ का शामिल रहे हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय में सचिव के पद पर रहते हुए उन्होंने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (IPRD) और संसदीय कार्य विभाग जैसी कई अहम जिम्मेदारियाँ उनके पास हैं। एक समय में राज्य के प्रशासनिक फैसलों में उनकी गहरी पकड़ मानी जाती थी, लेकिन हाल ही में राज्य में एनडीए (NDA) की सरकार बनने के बाद से प्रशासनिक समीकरणों में बदलाव आया है। माना जा रहा है कि इसी राजनीतिक बदलाव के चलते उन्हें साइडलाइन कर दिया गया, जिसके बाद अब वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली जा रहे हैं।

2- प्रतिमा एस. वर्मा (IAS)

प्रतिमा एस. वर्मा बिहार कैडर की आईएएस अधिकारी हैं और अनुपम कुमार की पत्नी भी हैं। बिहार के प्रशासनिक गलियारों में उनका नाम सबसे अधिक तबादले पाने वाले अधिकारियों की सूची में सबसे ऊपर आता है। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई अलग-अलग जिलों और विभागों में काम किया है, लेकिन अक्सर किसी एक पद पर उनका कार्यकाल बहुत लंबा नहीं रहा है। लगातार होने वाले स्थानांतरणों के कारण वे कई बार चर्चा का विषय रही हैं। अब वे भी अपने पति के साथ बिहार छोड़कर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर अपनी नई सेवा देने जाने को लेकर चर्चा में हैं।

3- डॉ. बी. राजेंद्र (IAS)

डॉ. बी. राजेंद्र 1995 बैच के बिहार कैडर के एक बेहद कड़क, अनुभवी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद अधिकारियों में गिने जाने वाले डॉ. राजेंद्र को राज्य में अहम जिम्मेदारियाँ दी जाती रही हैं। जब शिक्षा विभाग में के.के. पाठक और फिर डॉ. एस. सिद्धार्थ के बाद प्रशासनिक बदलाव की जरूरत पड़ी, तो शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव की कमान डॉ. बी. राजेंद्र को ही सौंपी गई। शिक्षा विभाग के अलावा वे सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) और खेल विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभागों के शीर्ष पदों पर भी अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। राज्य के प्रशासनिक सुधारों में उनकी अहम भूमिका रही है।

4- डॉ. गोपाल सिंह (IFS)

डॉ. गोपाल सिंह मूल रूप से भारतीय वन सेवा (IFS) के एक तेज तर्रार अधिकारी हैं। हालाँकि वे वन सेवा से आते हैं, लेकिन अपनी उत्कृष्ट कार्यकुशलता और प्रशासनिक समझ के कारण वे विशेष सेवा (Special Duty) के आधार पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ जुड़े रहे हैं। वे मुख्यमंत्री सचिवालय में विशेष कार्य पदाधिकारी (OSD) के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत हैं। मुख्यमंत्री के दैनिक प्रशासनिक कार्यों के प्रबंधन, विशेष योजनाओं की मॉनिटरिंग और विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने में उनकी बड़ी और सक्रिय भूमिका रही है। अब वे भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का रुख कर रहे हैं।

 

 

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क्या बिहार और प. बंगाल से नया UT बनेगा? केंद्रीय गृह राज्यमंत्री क्या बोले?

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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Photo - FB/Nityanand Rai)
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Photo - FB/Nityanand Rai)

नई दिल्ली | हाल में बिहार व पश्चिम बंगाल के राज्यपाल बदले जाने और बिहार में नीतीश कुमार के सरकार छोड़ने के ऐलान के बाद सोशल मीडिया पर दावे किए जा रहे हैं कि केंद्र सरकार बिहार व प. बंगाल के कुछ जिलों को मुलाकर नया केंद्र शासित प्रदेश बना सकती है। इन अफवाहों को लेकर केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा है कि जनता ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दे। साथ ही उन्होंने सांसद पप्पू यादव के इस बारे में किए गए दावे को गंभीरता से न लेेने को कहा।

केंद्रीय गृहराज्य मंत्री नित्यानंद राय ने ट्वीट किया है-

“बिहार और प.बंगाल के कुछ जिलों को मिलाकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने की योजना पूरी तरह तथ्य से परे है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। मैं यह बताना चाहता हूं कि पप्पू यादव के ट्वीट को कोई गंभीरता से ना ले।”

नित्यानंद राय का ट्वीट

नित्यानंद राय का ट्वीट

सांसद पप्पू यादव ने किया दावा

दरअसल 5 मार्च को नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य बनने को लेकर ट्वीट करके ऐलान किया। इसी दिन राष्ट्रपति की ओर से अधिसूचना जारी करके बिहार समेत सात राज्य व दो केंद्र शासित प्रदेशों के राज्यपाल/उपराज्यपाल बदले गए। एक ही दिन हुए इन दो अहम बदलावों को लेकर सांसद पप्पू यादव ने दावा किया कि ऐसा एक नया केंद्रशासित प्रदेश बनाने के लिए किया जा रहा है, जो बिहार व पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को जोड़कर बनाया जाएगा।

पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने ट्वीट करके कहा था-

“पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू कर बिहार विधानसभा से प्रस्ताव पारित करा कर सीमांचल और मालदा, मुर्शिदाबाद, रायगंज दिनाजपुर आदि जिलों को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने का खेल बीजेपी करने वाली है नीतीश जी को हटाने और लेफ्टिनेंट जनरल राज्यपाल लाने के पीछे का यह खेल है।”
पप्पू यादव का ट्वीट

पप्पू यादव का ट्वीट

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Breaking News : CM नीतीश कुमार का ऐलान- “राज्यसभा का सदस्य बनना चाहूंगा, बिहार में नई सरकार को समर्थन”

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अनाउंसर की ओर नीतीश कुमार को भाषण के लिए बुलाने का इशारा करते पीएम मोदी।
  • बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने ट्वीट करके राज्यसभा चुनाव के लिए दावेदारी का ऐलान किया।
नई दिल्ली|
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद ही ऐलान कर दिया है कि वे राज्यसभा जा रहे हैं। बिहार की राजनीति में इस घटना ने बड़ा उलटफेर कर दिया है। उन्होंने ट्वीट करके कहा है कि इस बार हो रहे चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने कहा है कि जो नई सरकार बनेगी उसको पूरा सहयोग व मार्गदर्शन करेंगे। बता दें कि राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन का आखिरी दिन है।
सीएम नीतीश कुमार का ट्वीट

सीएम नीतीश कुमार का ट्वीट

बिहार में दसवीं बार सीएम बने नीतीश कुमार की इस घोषणा ने उन संभावनाओं को सही साबित कर दिया है, जिसमेें कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजकर बीजेपी अपने किसी नेता को बिहार का मुख्यमंत्री बनाएगी। हालांकि इस घोषणा के बाद जदयू कार्यकर्ताओं में नाराजगी दिख रही है। उन्होंने कहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सीएम नीतीश कुमार के चेहरे पर ही जनता ने उन्हें वोट दिया है, ऐसे में हम किसी भी कीमत पर उन्हें दिल्ली नहीं जाने देंगे।
दूसरी ओर, नीतीश कुमार की घोषणा के बाद निशांत कुमार को बिहार की नई सरकार में कोई बड़ा पद दिए जाने की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। बताया गया है कि सीएम नीतीश कुमार से बातचीत के बाद केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने निशांत कुमार से मुलाकात करने पहुंचे हैं। ललन सिंह निशांत से आगे की योजना पर चर्चा कर रहे हैं। सूत्र बता रहे हैं कि निशांत कुमार को जनता दल यूनाईटेड की कमान संभालेंगे। वहीं, उन्हें डिप्टी सीएम बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
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क्या बिहार छोड़ राज्यसभा जाएंगे नीतीश कुमार? आज नामांकन की आखिरी ताऱीख, NDA ने बुलाई बैठक

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सम्राट चौधरी ने संकल्प पत्र घोषणा के बाद नीतीश कुमार के साथ खिंचवाए फोटो को फेसबुक पर शेयर किया है।
नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के दावों के बीच सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। (फाइल फोटो)
  • बिहार के मंत्री बोले- सीएम नीतीश कुमार ने बेटे निशांत कुमार को राजनीति में लाने की अनुमति दी।

नई दिल्ली |

बिहार में होली के दिन एक बड़ा दावा सामने आया कि बिहार में दसवीं बार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा भेजे जा सकते हैं। दावा है कि भाजपा का कोई नेता बिहार का अगला मुख्यमंत्री बन सकता है और नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम पद दिया जा सकता है। सूत्रों के हवाले से सामने आए इन दावों का एनडीए सहयोगी व केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने खंडन किया है।

लोजपा(राम विलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने साफ कहा है कि

“बिहार में हमारी डबल इंजन की सरकार अच्छा काम कर रही है और मुख्यमंत्री बदले जाने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है। नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर बिहार का नेतृत्व करते रहेंगे।”

दूसरी ओर, केंद्रीय मंत्री व भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने नीतीश कुमार को राज्यसभा भेजे जाने के सवाल पर मीडिया से कहा कि होली पर ऐसे मजाक सामान्य हैं। उन्होंने कहा- “नीतीश कुमार जी ही हमारे मुख्यमंत्री हैं।”

जदयू नेता श्रवण कुमार के बयान से मिली दावों को हवा

दरअसल 3 मार्च को बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बयान दिया कि नीतीश कुमार ने अपने बेटे निशांत कुमार की सक्रिय राजनीति में एंट्री के लिए मंजूरी दे दी है। जदयू के सीनियर नेता श्रवण कुमार के इस बयान से नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के दावों को हवा मिली।

श्रवण कुमार ने कहा था,

“होली से एक दिन पहले मैं बिहार के लोगों के साथ एक अच्छी खबर शेयर करना चाहता हूं, JD(U) के अंदर और राज्य के युवाओं के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत के राजनीति में आने की लंबे समय से मांग चल रही थी, अब रास्ता साफ हो गया है और एक-दो दिन में औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।”

आज नामांकन भर सकते हैं नीतीश कुमार

सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि 5 मार्च को नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए नामांकन भर सकते हैं। बिहार में राज्यसभा के लिए पांच सीटें खाली हैं, जिसके लिए नामांकन की अंतिम तारीख 5 मार्च है। बीजेपी की ओर से दो राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवार (नितिन नवीन व शिवेन कुमार) घोषित किए गए हैं। जदयू को अन्य दो सीटों पर उम्मीदवार उतारने हैं और पांचवीं सीट पर NDA के तीसरे सहयोगी राष्ट्रीय लोक मोर्चा के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा को उतारा जाना लगभग तय है।

पटना में NDA की अहम बैठक पर नजर

बिहार की सरकार में बड़े बदलाव को लेकर NDA सरकार के बड़े नेता भले इनकार कर रहे हों पर बृहस्पतिवार को पटना में NDA विधायकों की बैठक बुलाई गई है, जो बड़े बदलाव का संकेत दे रही है।

सीएम बदले तो कौन संभालेगा कमान?

बिहार में दस बार मुख्यमंत्री बन चुके नीतीश कुमार की सेहत को लेकर लगातार खबरें सामने आती रहती हैं। पिछले साल नवंबर में नई सरकार बनने के बाद सरकार चलाने में भाजपा का अपरहैंड साफ नजर आता है। ऐसे में माना जा रहा है कि संभावित नए सीएम की दौड़ में सबसे आगे डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी हैं। उनके बाद केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, विधायक संजीव चौरसिया और MLC जनक राम का नाम लिया जा रहा है।

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