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दुनिया गोल

ट्रंप का दावा : ‘ईरान संग वार्ता जारी, 5 दिन तक हमला नहीं करेंगे’, जानिए ईरान ने क्या कहा?

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
नई दिल्ली | दुनिया के 20% तेल व्यापार के रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की डेडलाइन को अमेरिकी राष्ट्रपति ने अगले 5 दिन के लिए बढ़ा दिया है।
एक दिन पहले 22 मार्च को राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी कि “अगर अगले 48 घंटों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को नहीं खोला गया तो वे ईरान के न्यूक्लियर पावर प्लांट पर अब तक का सबसे बड़ा हमला करेंगे।”  

ट्रंप ने 22 मार्च को दिया था अल्टीमेटम

अब अगले ही दिन 23 मार्च को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा है कि
“मिडिल ईस्ट की स्थिति को पूरी तरह हल करने को लेकर पिछले दो दिनों में ईरान और अमेरिका के बीच काफी अच्छी बातचीत हुई है जो इस पूरे सप्ताह जारी रहेगी। लिहाजा मैंने डिपार्टमेंट ऑफ वॉर को यह आदेश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को पांच दिनों के लिए टाल दिया जाए।” 

23 मार्च को बोले कि दो दिनों से दोनों देशों के बीच वार्ता जारी, हमला पांच दिन के लिए टलेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों के बीच मुद्दों के समाधान पर विस्तार से चर्चा की जा रही है, हालांकि उन्होंने यह डिटेल नहीं दी है कि किन मुद्दों पर बातचीत हो रही है।
अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दावे को ईरान ने खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के हवाले से ईरान की मेहर न्यूज ने लिखा है कि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कोई वार्ता नहीं की जा रही है।
By <a rel="nofollow" class="external text" href="https://khamenei.ir/">Khamenei.ir</a>, <a href="https://creativecommons.org/licenses/by/4.0" title="Creative Commons Attribution 4.0">CC BY 4.0</a>, <a href="https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=154501931">Link</a>

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची

5 दिन के हॉल्ट पर ईरान बोला- ‘ट्रंप अपनी सैन्य योजना के लिए समय जुटा रहे’

ईरान के विदेश मंत्रालय के हवाले से मेहर न्यूज ने लिखा है कि “अमेरिकी राष्ट्रपति का हालिया बयान ऊर्जा कीमतों को कम करने और अपनी सैन्य योजनाओं को लागू करने के लिए समय हासिल करने का प्रयास है।
विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि क्षेत्रीय देशों की ओर से तनाव कम करने के लिए पहल की जा रही है। इन सभी के जवाब में हमारा रुख स्पष्ट है कि इस युद्ध को हमने शुरू नहीं किया इसलिए ये सभी अनुरोध अमेरिका से किए जाने चाहिए। 
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अमेरिकी युद्ध नीति के अधिकारी भारत दौरे पर : अमेरिकी युद्ध विभाग

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अमेरिका में युद्ध नीति के अंडर सचिव एल्ब्रिज कोल्बी

नई दिल्ली |  अमेरिका में युद्ध नीति के अंडर सचिव (Under Secretary of War for Policy) 23 मार्च को भारत आ रहे हैं। अमेरिकी युद्ध विभाग ने सोमवार को प्रेस रिलीज जारी करके यह जानकारी दी है।

पश्चिम एशिया में जारी ईरान युद्ध के बीच भारत में अमेरिका की युद्ध नीति से जुड़े अधिकारी का भारत आना अहम माना जा रहा है। हालांकि इस दौरे के युद्ध से संबंध को लेकर अमेरिका या भारत की ओर से कोई जानकारी नहीं दी गई है।

 अमेरिकी युद्ध विभाग के प्रेस बयान में जानकारी दी गई है कि “युद्ध नीति के अंडर सेक्रेटरी एल्ब्रिज कोल्बी (Elbridge Colby) आज भारत पहुंच रहे हैं। वे नई दिल्ली में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे, ताकि भारत-अमेरिका के बीच अहम संबंधों को आगे बढ़ाया जा सके।”
साथ ही कहा गया है कि अंडर सेक्रेटरी कोल्बी की इस यात्रा का मुख्य फोकस राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के फरवरी 2025 में जारी संयुक्त बयान में निर्धारित लक्ष्यों को आगे बढ़ाना और अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी फ्रेमवर्क को लागू करना है।
इस दौरे को लेकर भारत में तैनात अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने ट्वीट किया है कि वे युद्ध नीति के अंडर सेक्रेटरी का भारत में स्वागत करने के लिए इंतजार कर रहे हैं। 
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सर्वे : अमेरिकी जनता की राय- ‘यह जरूरी युद्ध नहीं था, इसे जल्द से जल्द खत्म किया जाए’

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यह सर्वे सीबीएस न्यूज की ओर से किया गया है। (क्रेडिट - CBS news)
नई दिल्ली | एक ताजा सर्वे के मुताबिक, अमेरिका के 67% लोगों का मानना है कि युद्ध को जल्द से जल्द खत्म किया जाना चाहिए, क्योंकि पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं।
गौरतलब है कि यह सर्वे ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका में पेट्रोल-डीजल के दाम साल 2008 के बाद सबसे ज्यादा हैं।
CBS न्यूज के सर्वे से पता लगा है कि 61% अमेरिकियों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन ने युद्ध के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी है।
जबकि 58% अमेरिका मानते हैं कि यह एक आवश्यक युद्ध (war of necessity) नहीं बल्कि मर्जी से चुना गया युद्ध (war of choice) है।  
सर्वे से यह भी पता लगा है कि 58% अमेरिकी चाहते हैं कि ईरान के लोगों को वर्तमान शासन से ‘आजादी’ मिले। और 71% अमेरिकी मानते हैं कि युद्ध के अंत में ईरानी शासन को पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए। 
साथ ही, 62% अमेरिकी चाहते हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम रोका जाए। 

आर्थिक प्रभाव पर चिंता

रिपोर्ट में कहा गया है कि बढ़ती गैस कीमतों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर व्यापक निराशा पैदा कर दी है। 54% लोगों ने कहा कि युद्ध का अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों में अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ेगा।

ट्रंप के प्रति समर्थन

रिपोर्ट में एक दिलचस्प बात यह है कि रिपब्लिकन समर्थकों में ट्रंप के प्रति व्यक्तिगत विश्वास काफी ज्यादा है, जिसके कारण युद्ध को लेकर उनका समर्थन बना हुआ है।
लेकिन कुल मिलाकर अधिकांश अमेरिकी (54%) मानते हैं कि युद्ध अभी अच्छा नहीं चल रहा है। यानी अमेरिका के पक्ष में नहीं है। 
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युद्ध के चलते ऊर्जा संकट का पूरी दुनिया पर पड़ेगा असर : अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी प्रमुख

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IEA Chief
नई दिल्ली |  अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध अगर जल्द खत्म नहीं हुआ तो इससे पैदा ऊर्जा संकट का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। यह चेतावनी अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने दी है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब एक बड़े संकट के कगार पर खड़ी है।
ऑस्ट्रेलिया के प्रेस क्लब को संबोधित करते हुए IEA प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा है कि यह ऊर्जा संकट 1970 के दशक के तेल संकट से भी बड़ा हो सकता है।

इस इंटर गवर्नंमेंटल एजेंसी से दुनिया के अधिकांश देश जुड़े हुए हैं।

उन्होंने बताया कि खाड़ी में अभी ऊर्जा के 40 संसाधन बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई प्रभावित हुई है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी चीफ ने कहा कि कई देशों में इसका असर दिखने लगा है जो समय के साथ और गंभीर हो सकता है। ऐसे में जल्द से जल्द इस युद्ध को रोकने की अपील की जा रही है।
उन्होेंने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों मेें आए उछाल से निपटने के लिए एशिया और यूरोप के देशों के साथ परामर्श किया जा रहा है।
अगर स्थिति और बिगड़ती है तो अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के सदस्य देशों के रणनीतिक तेल भंडार से और तेल जारी किया जा सकता है।
बता दें कि IEA ने बीते 11 मार्च को सदस्य देशों के साथ सहमति बनाकर रिकॉर्ड 40 करोड़ बैरल तेल अपने रणनीतिक भंडार से जारी करने का फैसला लिया था। यह कुल भंडार का लगभग 20% था।  
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