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रिपोर्टर की डायरी

पटना NEET छात्रा के रेप-मर्डर के बीच पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र के ऐसे ही केस की चर्चा

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सासाराम में न्याय की मांग लेकर सड़कों पर उतरे नीट छात्रा के माता-पिता और सामाजिक कार्यकर्ता
सासाराम में न्याय की मांग लेकर सड़कों पर उतरे नीट छात्रा के माता-पिता और सामाजिक कार्यकर्ता
  • रोहतास की बेटी वाराणसी में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी, वही पर संदेहास्पद स्थिति में हुई थी मौत।
  • मौत को आत्महत्या बताकर पुलिस ने जबरन अंतिम संस्कार करा दिया था, परिवार का कहना है कि बेटी की हत्या हुई।
  • केस की जांच सालभर से लटकी हुई है, परिजनों ने सासाराम में बेटी के न्याय के लिए फिर से लगाई गुहार।

सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव

पटना के शंभुनाथ गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा के साथ रेप और मर्डर की घटना ने बिहार की एक और बेटी के साथ हुए जघन्य अपराध का मुद्दा फिर उठा दिया है। ठीक एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में NEET की एक छात्रा का शव हॉस्टल में मिला था, जिसमें यूपी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठे थे। लड़की के परिवार का कहना है कि उनकी बेटी का रेप करके उसकी हत्या हुई पर पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया। इतना ही नहीं, पुलिस ने शव को बिहार नहीं ले जाने दिया और वहीं अंतिम संस्कार करवा दिया था। इस मामले में पीड़ित परिवार ने 23 जनवरी को सासाराम जिला मुख्यालय तक शोक यात्रा निकाली, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता व राजनीतिक दल के नेता मौजूद रहे।

योगी ने SIT की घोषणा की, जांच अब तक लटकी

सासाराम की एक लड़की वाराणसी के रामेश्वर गर्ल्स हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। ठीक एक साल पहले उसकी मौत हो गई जिस पर हंगामा हुआ पर यूपी पुलिस ने घटना को आत्महत्या ही बताया, इसकी जांच में कोई प्रगति नहीं हुई। फिर पिछले साल नवंबर में जब बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के लिए यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ सासाराम पहुंचे तो उन्होंने घोषणा की थी कि SIT बनाकर मामले की जांच कराई जाएगी। पर अब तक न तो एसआईटी गठित हुई और न ही वाराणसी पुलिस की जांच में कुछ निकलकर आया है।

फंदे पर लटका मिला था शव, जमीन पर टिके थे पैर

बीते साल 24 सितंबर को सासाराम में परिजनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बेटी की मौत की जांच पर सवाल उठाए थे। उसमें बताया गया था कि लड़की का शव पंखे से लटका हुआ था लेकिन उसका एक पैर जमीन पर और दूसरा तख्त पर टिका मिला था, ऐसे में इसे आत्महत्या कैसे माना जा सकता है? साथ ही, परिवार का कहना था कि बेटी के गले में पीछे की ओर दो गमछों की गांठें बंधी थीं। सवाल यह है कि कोई लड़की खुद अपने गले में पीछे इतनी मजबूत गांठें कैसे बांध सकती है?

बेटी के कपड़े बदल दिए थे, शव जबरन जलवा दिया

मृतक छात्रा की मां ने मीडिया को बताया था कि घटना से एक रात पहले दस बजे उनकी बेटी से बात हुई थी, तब वह ट्रैक-सूट पहने हुए थी। अगले दिन बेटी को घर सासाराम लौटना था पर उसकी मौत हो गई। जब हमने उसका शव देखा तो उसके कपड़े बदल दिए गए थे। उन्होंने यह भी बताया कि पोस्टमार्टम के दौरान बेटी के गहने भी गायब कर दिए गए। फिर पुलिस ने उन्हें डराया-धमकाया और शव की सुपुर्दगी दिए बिना ही हरिश्चंद्र घाट पर जबरन अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि वे बेटी को सासाराम लाना चाहते थे।

डीएम के न मिलने से निराश परिजनों ने हंगामा किया

शोक यात्रा के बाद मृतक छात्रा के परिजन व सामाजिक कार्यकर्ता जिला समाहरणालय पहुंचे जहां अफसरों की असंवेदनशीलता को लेकर काफी हंगामा हुआ। दरअसल पीड़ित परिजन जिलाधिकारी से मिलकर अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते थे पर डीएम उदिता सिंह उन सबसे मिले बिना ही समाहरणालय से बाहर निकल गईं। इससे लोग गुस्सा हो गए और डीएम ऑफिस के बाहर हंगामा करने लगे।

क्या है परिजनों की मांग

ज्ञापन के जरिए परिजनों ने मांग की कि उनकी बेटी के हत्यारों की तुरंत गिरफ्तारी हो, आरोपियों के बयान व कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाले जाए।  हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक किया जाए ताकि यह पता लग सके कि घटना के रोज क्या-क्या हुआ था। साथ ही उनका कहना है कि सरकार इस मामले में लगातार लापरवाही बरतने के चलते 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दे।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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