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ट्रंप की धमकियों के बीच रूस-चीन-ईरान की नौसेना कर रही संयुक्त अभ्यास

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दक्षिण अफ्रीका में हो रहे संयुक्त नौसेना अभ्यास के दौरान रूस का जहाज ( credit - X/Russian Embassy in South Africa)
दक्षिण अफ्रीका में हो रहे संयुक्त नौसेना अभ्यास के दौरान रूस का जहाज ( credit - X/Russian Embassy in South Africa)
  • ‘विल फॉर पीस 2026’ नाम से दक्षिण अफ्रीका में आयोजित हो रही नेवल एक्सरसाइज।
नई दिल्ली|
ट्रंप प्रशासन की ओर से वेनेजुएला पर सैन्य कार्रवाई और ईरान पर कड़ी धमकियों के बीच रूस, चीन और ईरान ने दक्षिण अफ्रीका में संयुक्त नौसैनिक युद्ध अभ्यास शुरू कर दिया है। ये चारों देश उस BRICS ग्रुपिंग का हिस्सा हैं, जिसमें भारत महत्वपूर्ण सहयोगी है पर भारतीय नौसेना इस अभ्यास में शामिल नहीं हुई है।  
यह संयुक्त नौसेना अभ्यास ‘विल फॉर पीस 2026’ नाम से हो रहा है। इस अभ्यास मे रूस, चीन और ईरान के युद्धपोतों ने केपटाउन के तट पर पहुंचकर मिसाइल फायरिंग, हेलीकॉप्टर ऑपरेशन और समुद्री सुरक्षा अभ्यास शुरू किए हैं। यह तीसरा संयुक्त अभ्यास 15 जनवरी तक चलेगा। इससे पहले 2022 और 2023 में संयुक्त अभ्यास हुआ था। दक्षिण अफ्रीका के एक अधिकारी ने अलजजीरा से कहा कि रूस, ईरान, चीन और अन्य देशों के साथ किए जाने वाले अभ्यास ‘समुद्री आर्थिक गतिविधियों’ की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप प्रशासन की धमकियों के बीच यह अभ्यास वैश्विक तनाव को और बढ़ा सकता है।

हाइपरसोनिक मिसाइलों से हो रहा अभ्यास

रूस : अभ्यास में आधुनिक गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट (जहाज) शामिल है जो ज़िरकॉन (Zircon) और ब्रह्मोस जैसी अत्याधुनिक हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों से लैस है। यह लंबी दूरी के हमले, पनडुब्बी रोधी युद्ध व रक्षा अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है। 

चीन: मिसाइल विध्वंसक (Guided Missile Destroyer) ‘नान्चांग’ (Nanchang) अभ्यास में शामिल है। यह एक बड़ा और शक्तिशाली युद्धपोत है जिसे चीन के वाहक बेड़े को सुरक्षा देने और शक्तिशाली बहु-भूमिका वाले लड़ाकू पोत के रूप में डिज़ाइन किया गया है। 

ईरान: अपने देश में बड़ा विरोध झेल रहे इस देश ने फ्रिगेट ‘सहंद’ और सप्लाई शिप को अभ्यास में शामिल किया है। 

BRICS का मेजबान भारत अभ्यास से दूर क्यों

इस साल ब्रिक्स की मेजबानी भारत के पास है, फिर भी भारतीय नौसेना इस संयुक्त अभ्यास में शामिल नहीं हैं। इस मामले में कोई स्पष्ट कारण आयोजन दक्षिण अफ्रीका या भारत की ओर से सामने नहीं आया है। इसके अलावा, सऊदी अरब भी इस अभ्यास में शामिल नहीं हुआ है जिसकी वजह उसके अमेरिका से करीबी रिश्तों और हालिया रक्षा समझौते को माना जा रहा है। अलजजीरा के मुताबिक, संयुक्त अभ्यास के प्रवक्ता ने बताया कि ब्रिक्स के सभी सदस्य देशों को इस नौसेना अभ्यास के लिए आमंत्रित किया गया था।

दक्षिण अफ्रीका बोला- पहले ही तय था यह अभ्यास

दक्षिण अफ्रीका ने कहा है कि यह अभ्यास क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा के लिए है, किसी देश के खिलाफ नहीं।”  साथ ही अभ्यास के समय को लेकर उप रक्षा मंत्री बंटू होलोमिसा ने शुक्रवार को कहा कि ये अभ्यास मौजूदा वैश्विक तनाव के बहुत पहले से तय था।  

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