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रिपोर्टर की डायरी

नेपाल सीमा से सटे फारबिसगंज में सूखा नशा कर रहे युवा, ब्राउन शुगर ले जाते नेपाल में पकड़े गए

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  • बिहार के अररिया जिले के दो युवकों को नेपाली नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने 152 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया।

फारबिसगंज | मुबारक हुसैन

बिहार के अररिया में नेपाल सीमा से सटे इलाकों में ब्राउन शुगर की खपत और तस्करी तेजी से बढ़ गई है। शराबबंदी के बीच स्थानीय युवा सूखा नशा कर रहे हैं और इसकी तस्करी के जाल में भी फंसते जा रहे हैं।

ऐसा ही एक ताजा मामला नेपाल के विराटनगर में सामने आया, जिसमें नेपाली नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने दो भारतीय युवा तस्करों को गिरफ्तार किया है। दोनों युवक नेपाल से सटे बिहार के जिले अररिया के हैं। दोनों युवकों से 152 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद हुई है। दोनों को विराटनगर बस स्टैंड के पास से पकड़ा गया।

 

फारबिसगंज-अररिया के दो युवक गिरफ्तार

दोनों गिरफ्तार युवकों की पहचान फारबिसगंज के भागको हलिया निवासी 28 वर्षीय मोहम्मद मोजाहिद और अररिया जिला के पलासी निवासी 20 वर्षीय राजकुमार दास के रूप में की गई है। नेपाल की मोरंग जिला पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। इस मामले में दो नेपाली युवकों को भी पकड़ा गया है।

 

अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की खोज

नेपाल की नार्कोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो सभी आरोपियों से पूछताछ करके मादक पदार्थ तस्करी के बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंक खंगालने में जुटी है। पुलिस को आशंका है कि यह मामला अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। अभी दोनों ओर की पुलिस यह पता नहीं लगा सकी है कि असल में इस नशीले पदार्थ की तस्करी कहां से हो रही है।

 

फारबिसगंज में सूखा नशा कर रहे युवा

नेपाल सीमा से सटे बिहार के फारबिसगंज में ‘ब्लैक शुगर’ अथवा ब्राउन शुगर का नशा तेजी से फैल रहा है। यह हेरोइन का मिलावटी रूप होने के चलते सस्ता मिलता है। एक छोटे मोती के बराबर ब्राउन शुगर की पुड़िया ₹200-250 रुपये में आसानी से मिल जाती है। जिससे स्थानीय युवा इसकी गिरफ्त में आ रहे हैं क्योंकि बिहार में 2016 से शराबबंदी है।  

 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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