दुनिया गोल
बांग्लादेश : ईद की छुट्टी से लौट रहे यात्रियों वाली बस पद्मा नदी में 80 फीट तक डूबी
नई दिल्ली | बांग्लादेश में एक यात्री बस फेरी पर चढ़ाए जाने के दौरान पद्मा नदी में गिर गई जिससे बड़ा हादसा हो गया। अब तक 18 यात्रियों के शव मिले हैं जिसमें बच्चे भी शामिल हैं।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में देखा जा सकता है कि हादसे के समय मौके पर लोग बस को नदी में डूबता देख स्तब्ध रह गए लेकिन कोई कुछ न कर सका।
हादसे में और भी यात्रियों की मौत की संभावना जतायी जा रही है क्योंकि बस नदी में 80 फीट तक डूब गई है। सेना के साथ मिलकर बचाव दल लापता लोगों को ढूंढ रहा है। यह हादसा बुधवार (25 march) शाम पांच बजे हुआ।

हादसे के दौरान स्तब्ध रह गए लोग और मौके पर पहुंचा रेस्क्यू वाहन।
बांग्लादेश की समाचार वेबसाइट bdnews24 के मुताबिक, बस में 40 से ज्यादा यात्री सवार थे, जिसमें से 5-7 लोगों ने तैर कर जान बचा ली।
अधिकारियों ने बताया कि बस ढाका जा रही थी। इसमें सवार कई यात्री ईद की छुट्टियां खत्म कर राजधानी लौट रहे थे, जिनमें बच्चे भी शामिल थे।
हादसा राजबाड़ी जिले में दाउलादिया टर्मिनल पर हुआ। हादसे के समय बस नदी पार करने के लिए फेरी (बड़ी नाव) पर चढ़ रही थी और इसी दौरान ड्राइवर का कंट्रोल छूट गया और बस सीधे नदी में जा गिरी।
दुनिया गोल
हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर फीस लगाने के लिए ईरान लाने जा रहा कानून
नई दिल्ली | ईरान की संसद एक ऐसे विधेयक पर काम कर रही है, जिसके जरिए हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों से वसूले जाने वाले कथित शुल्क को कानूनी रूप दिया जा सके।
ईरानी मीडिया के हवाले से अमेरिका की समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने यह जानकारी दी है।
गौरतलब है कि अमेरिका-इज़रायल के हमलों के बाद से ईरान ने हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद कर रखा है। वह भारत समेत कुछ चुनिंदा देशों के जहाजों को ईरानी प्रशासन की अनुमति के बाद ही गुजरने दे रहा है। साथ ही, ईरान कुछ देशों के जहाजों के ऊपर शुल्क भी वसूल रहा है।
ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड’ से जुड़े माने जाने वाली ईरानी मीडिया ‘फार्स न्यूज’ (Fars) और ‘तस्नीम’ (Tasnim) ने सांसद मोहम्मदरेजा रजाई कूची के हवाले से संभावित शुल्क विधेयक को लेकर जानकारी दी है।
रिपोर्ट्स में कहा है कि हॉर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की संप्रभुता, नियंत्रण और निगरानी को औपचारिक रूप से कानूनी जामा पहनाने (Codify) की योजना पर ईरानी संसद काम कर रही है।
साथ ही कहा गया है कि हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाकर देश के राजस्व के लिए भी एक स्रोत बनाया जा रहा है।
बता दें कि फारस की खाड़ी के मुहाने पर स्थित संकरा मार्ग ‘हॉर्मुज स्ट्रेट’ दुनिया के 20% तेल व्यापार के आवागमन का रास्ता है। इसका सबसे संकरा हिस्सा करीब 35 किलोमीटर लंबा है।
अभी इसे एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है जो सभी तरह के समुद्री वाहनों के लिए खुला है। अगर इस पर ईरान शुल्क लगाता है तो इसका यह दर्जा समाप्त हो जाएगा। माना जा रहा है कि खाड़ी देश, अमेरिका और यूरोपीय देश इसका विरोध करेंगे।
जनहित में जारी
बच्चों को लत लगा रहे फेसबुक-यूट्यूब, अमेरिकी अदालतों ने लगाया ₹3,150 करोड़ का जुर्माना
नई दिल्ली | फेसबुक व यूट्यूब की अंतहीन स्क्रॉलिंग और लत लगाने वाले कंटेंट के चलते छोटे बच्चे डिप्रेशन में जा रहे हैं।
अमेरिका की दो अदालतों ने ऐतिहासिक फैसले सुनाते हुए मेटा व यूट्यूब पर 3150 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। साथ ही, जूरी ने कहा है कि इन कंपनियों ने लत की इंजीनियरिंग की है।
द गार्जियन के मुताबिक- लॉस एंजिल्स की एक जूरी ने 25 मार्च को Meta (फेसबुक-इंस्टाग्राम) और YouTube को जानबूझकर लत लगाने वाले प्रोडक्ट्स डिजाइन करने का दोषी माना।
जूरी ने 20 वर्षीय पीड़िता को $6 मिलियन (लगभग ₹50 करोड़) का हर्जाना देने का आदेश दिया है, जिसमें से 70% Meta और शेष राशि YouTube भुगतान करेगी।
इस पीड़िता को 6 साल की उम्र में YouTube और 9 साल की होने पर Instagram की लत लगी, जिससे वह डिप्रेशन में आ गई और खुद को नुकसान पहुंचाने लगी थी। अदालत ने इसे ‘एडिक्शन की इंजीनियरिंग’ माना है।
इससे ठीक एक दिन पहले यानी 24 मार्च को न्यू मेक्सिको की अदालत ने Meta पर $375 मिलियन (लगभग ₹3,100 करोड़) का भारी जुर्माना लगाया गया है।
न्यू मेक्सिको के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय ने बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर जांच की। इसमें पाया कि Meta के प्लेटफॉर्म बच्चों को यौन शोषण और ऑनलाइन ग्रूमिंग से बचाने में पूरी तरह विफल हैं।
जूरी का कहना है कि कंपनियों ने बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा अपने ‘मुनाफे’ को प्राथमिकता दी और जनता को सुरक्षा के झूठे दावे कर गुमराह किया।
दुनिया गोल
अमेरिका की 15 शर्तों के जवाब में ईरान ने रख दीं 5 शर्तें; बोला- ‘युद्ध हमारी शर्तों पर ही खत्म होगा’
नई दिल्ली | पश्चिम एशिया में जारी युद्ध को रोकने के लिए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम योजना सौंपी है। पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए यह योजना ईरान को दी गई है।
यह दावा एसोसिएट प्रेस ने एक अधिकारी के हवाले से किया है। दूसरी ओर, अमेरिका के इस प्रस्ताव को खारिज करते हुए ईरान ने अपनी 15 शर्तें अमेरिका के सामने रख दी हैं।
अमेरिका की 15-सूत्रीय शर्तें
- 30 दिनों का युद्धविराम।
- नतान्ज, इस्फहान और फोर्डो में ईरान की परमाणु सुविधाओं को नष्ट करना।
- भविष्य में कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
- ईरान की ओर से परमाणु हथियार विकसित न करने की स्थायी प्रतिबद्धता।
- संवर्धित यूरेनियम के भंडार को अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना।
- ईरान के परमाणु बुनियादी ढांचे की IAEA द्वारा पूर्ण निगरानी और देश के भीतर यूरेनियम संवर्धन पर रोक।
- क्षेत्रीय प्रॉक्सी के लिए ईरान का समर्थन समाप्त करना।
- क्षेत्रीय ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर ईरान के हमलों को रोकना।
- होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना।
- ईरान पर अमेरिका के प्रतिबंधों को हटाना और संयुक्त राष्ट्र के ‘स्नैपबैक’ तंत्र को समाप्त करना।
- ईरान के बुशेहर परमाणु संयंत्र में बिजली उत्पादन के लिए अमेरिका का समर्थन।
- ईरान को घरेलू स्तर पर यूरेनियम संवर्धन (Enrichment) रोकने के लिए कहा गया है।
- ईरान की मिसाइलों की संख्या और उनकी रेंज सीमित करने की मांग की है।
- बिजली उत्पादन के लिए सहयोग देने की भी पेशकश की है।
- संयुक्त राष्ट्र के ‘स्नैपबैक मैकेनिज्म’ को समाप्त करने का वादा किया गया।
इससे पहले अमेरिका की ओर से आए प्रस्ताव की हंसी बताने हुए ईरानी सेना के एक प्रवक्ता ने कहा कि “ऐसा लगता है कि अमेरिका अब इस स्थिति में पहुंच गया है कि खुद से ही बातचीत कर रहा है।”
गौरतलब है कि ईरान ने राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया था जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरान के साथ उनकी बातचीत चल रही है।
ईरान ने ट्रंप के सामने रख दीं 5 शर्तें
ईरान ने अमेरिका के सामने पांच शर्तें रखी हैं और उसका कहना है कि पश्चिम एशिया में छिड़ा युद्ध अमेरिका की शर्तों पर नहीं, बल्कि ईरान की शर्तों पर ही समाप्त होगा।
- हमले और हत्या की घटनाएं बंद हों।
- सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो।
- दोबारा युद्ध ना हो, ठोस तंत्र बने।
- युद्ध नुकसान की भरपाई, मुआवजा तय हो।
- होर्मुज जलडमरूमध्य पर अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले।

ईरान की ओर से जारी शर्तें।
ईरान वार्ता के प्रस्ताव पर कर रहा संदेह
ईरान बातचीत के इन अमेरिकी प्रस्तावों को संदेह से देख रहा है क्योंकि अमेरिका अभी भी पश्चिम एशिया में अपने और सैनिक भेज रहा है।
इससे पहले दो बार उच्च-स्तरीय वार्ता के दौरान ही ईरान पर हमले हो चुके हैं।
28 फरवरी को मौजूदा संघर्ष की शुरुआत के दौरान भी ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हो रही थी। फिलहाल, ईरान ने किसी भी बातचीत का हिस्सा होने से इनकार किया है।
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