रिपोर्टर की डायरी
भागलपुर : अदाणी पावर प्रोजेक्ट में जमीन चली गई, बेघर होने की कगार पर खड़े आदिवासी
- भागलपुर में अदाणी पावर प्लांट परियोजना का जमीनी हाल।
- बेघर होने की कगार पर पहुंचे पहाड़िया जनजाति के आदिवासी।
- जमीन खाली करने का नोटिस पर पुनर्वास का इंतजाम नहीं।
भागलपुर | अतीश दीपंकर
बिहार में अदाणी पावर प्लांट परियोजना में जमीन जाने के बाद पहाड़िया जनजाति के आदिवासी समुदाय के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है।
भागलपुर जिले के पीरपैंती प्रखंड में 2400 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट बनाने के लिए करीब 1050 एकड़ जमीन पिछले साल राज्य सरकार ने अदाणी समूह को लीज़ पर दी है।
यह जमीन मात्र 1 रूपये सालाना की लीज़ पर दी गई है।
इस प्रखंड के हरिनकोल पहाड़िया टोला और संथाली टोला की जमीन भी इस परियोजना में अधिग्रहित है। इन दोनों टोलों के ग्रामीणों का आरोप है कि उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना ही उन्हें जमीन खाली करने के लिए नोटिस दिया जा रहा है, जिससे वे बेघर होने के कगार पर पहुंच गए हैं।
बता दें कि पहाड़िया जनजाति बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा के पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करने वाला एक प्राचीन, आदिम जनजाति (PVTG) समूह है। ये जनजाति आदिम तरीके से खेती, वनोपज संग्रह और प्रकृति पूजा पर निर्भर है।
इस परियोजना में जमीन जाने से सबसे अधिक पहाड़िया टोलों के लोग पीड़ित हैं। लेकिन अब तक पुनर्वास, रहने की व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
ग्रामीणों का सवाल है कि घर और जमीन जाने के बाद वे कैसे रहेंगे, क्या खाएंगे, उनके पास पीने के साफ पानी तक का इंतजाम नहीं है और वे अपने बच्चों को कैसे पढ़ाएंगे?
ग्रामीणों का कहना है कि अगर उनकी समस्याओं का तुरंत समाधान नहीं हुआ तो वे अदानी पावर प्लांट के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करेंगे। साथ ही, उनका कहना है कि जब तक पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होती तब तक वे अपनी अधिग्रहित जमीन खाली नहीं करेंगे।
ग्रामीण रामदेव पहाड़िया, संतोषी हेमरबन, डब्लू मुर्मू और बज्जी मुर्मू ने बताया कि उन्हें बार-बार घर खाली करने को कहा जा रहा है।
वे इस परियोजना से जुड़ी जनसुनवाई में जाकर कई बार अपनी बात रख चुके हैं कि हम बेघर हो जाएंगे, हमारे रहने का इंतजाम किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि अफसर उन्हें हर बार आश्वासन देते हैं कि घर बनाने के लिए जमीन दी जाएगी। साथ ही ग्रामीणों ने कब्रिस्तान के लिए भी जगह मांगी है, जिस पर आश्वासन मिला है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक कोई उनके घरों की गिनती तक करने नहीं आया है, वे कैसे मान लें कि वादा पूरा होगा?
फिलहाल ग्रामीणों ने साफ कहा है कि जब तक पुनर्वास, घर बनाने के लिए जमीन, पीने का पानी और बच्चों की शिक्षा की व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक वे अपनी जमीन खाली नहीं करेंगे और जरूरत पड़ने पर अदानी पावर प्लांट के मुख्य द्वार पर अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे।
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रोहतास (बिहार): DFO बोले- नीलगायों से फसल बचाने के लिए शूटर मिलेंगे; पर 3 साल पुराना नियम सिर्फ कागजी
- रोहतास जिले में नीलगायों के चलते फसल बर्बाब हो रही।
- किसानों को अब तक नहीं मिला सुरक्षा के कानून का लाभ।
- डीएफओ बोले- परमीशन के बाद ‘शूट’ की जा सकती हैं।
सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव
जिला वन पदाधिकारी स्टालिन फीडल कुमार ने बताया कि सरकार ने 2022 में ही वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम के तहत नुकसान पहुंचाने वाली नीलगायों की हत्या के लिए पंचायत मुखिया को अधिकृत कर दिया है।
इसमें नियम है कि नीलगाय को मारने का काम केवल वन विभाग की ओर से लिस्टेड शूटर ही करेंगे। शूटरों को यह सुनिश्चित करना होगा कि अन्य जानवरों या लोगों को कोई नुकसान न पहुंचे।
DFO ने कहा- बिना अनुमति या गाइडलाइन के नीलगाय मारने पर वन्य जीव सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई होगी।
वन पदाधिकारी का यह भी कहना है कि जंगली जानवरों से फसल क्षति के लिए मुआवजे का प्रावधान है। किसान नजदीकी रेंज ऑफिस में सूचना देंगे। वन विभाग की टीम राजस्व अधिकारी के साथ मिलकर नुकसान का आकलन करेगी और रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा।
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बांका में पुलिस लाइन का खाना बना जहर! 100 से अधिक जवान अचानक पड़े बीमार
बांका | दीपक कुमार
बिहार के बांका जिला से शुक्रवार को एक बेहद चौंकाने वाली और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ पुलिस लाइन में परोसा गया खाना जवानों के लिए मानो जहर साबित हो गया।
जानकारी के अनुसार, पुलिस लाइन मेस में दोपहर के भोजन के रूप में जवानों को फ्राइड राइस और चना छोला परोसा गया था। ड्यूटी से लौटे जवानों ने जैसे ही यह खाना खाया, कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
देखते ही देखते 100 से अधिक पुलिस जवानों को पेट दर्द, उल्टी, जी मिचलाने और दस्त जैसी गंभीर शिकायतें होने लगीं। हालात इतने बिगड़ गए कि पूरे पुलिस लाइन परिसर में अफरा-तफरी मच गई और एम्बुलेंस के सायरन लगातार गूंजने लगे।
बीमार पड़े सभी जवानों को तुरंत इलाज के लिए बांका सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने से अस्पताल में भी हड़कंप मच गया और बेड कम पड़ गए। इसके बाद आनन-फानन में अतिरिक्त बेड और डॉक्टरों की व्यवस्था की गई।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल सभी जवानों को प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है, उन्हें सलाइन चढ़ाया जा रहा है और डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
इस घटना के बाद पुलिस लाइन मेस में परोसे जाने वाले भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जवानों के बीच भी इस लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं। परोसे गए भोजन के सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि आखिर जवानों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी।
अधिकारियों ने साफ कहा है कि यदि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यही है कि देश की सुरक्षा में दिन-रात तैनात रहने वाले जवानों के स्वास्थ्य के साथ इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे हो गई?
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रोहतास (बिहार) : 4 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए हो रहा exam, एडमिट कार्ड में लगा दी कुत्ते का फोटो!
- 15 मार्च को होनी है भर्ती परीक्षा, एडमिट कार्ड पर कुत्ते की फोटो।
- रोहतास जिले के उम्मीदवार के एडमिट कार्ड में बड़ी गलती।
- जिला एवं सत्र न्यायालय में चपरासी पद के लिए होना है पेपर।
पीड़ित परीक्षार्थी ऋतेश कुमार रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेक्ष के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 2022 में जिला एवं सत्र न्यायालय में चपरासी के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन किया था।
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