रिपोर्टर की डायरी
बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा: रोहतास के सेंटर पर फर्जी मजिस्ट्रेट बन घुसा, डांटकर अभ्यर्थी को बाहर ले जाकर नकल कराई.. आखिर पकड़ा गया
प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा पर उठे सवाल
- सिपाही भर्ती परीक्षा का एक नया गिरोह आया सामने।
- फर्जी मजिस्ट्रेट समेत चार आरोपी गिरफ्तार किए गए।
रोहतास | अविनाश श्रीवास्तव
बिहार की पुलिस भर्ती परीक्षा में नकल कराने के एक गिरोह का खुलासा हुआ है, जिसमें फर्जी मजिस्ट्रेट बनकर एक आरोपी ने परीक्षा सेंटर पर एक युवक को नकल करायी। इसे मौके पर ही पकड़ लिया गया। इस फर्जी मजिस्ट्रेट ने रोहतास जिले की गोपनीय शाखा का एक फर्जी लेटर बनवाकर ड्यूटी संभाली थी। इस मामले में गुरुवार (11 dec) को जिला एएसपी ने प्रेसवार्ता करके बताया कि फर्जी मजिस्ट्रेट ने खुद को पटना सचिवालय से वरीय कोषागार पदाधिकारी बताया था।
DAV पब्लिक स्कूल सेंटर में नकल करवाता पकड़ा गया
जिले के इंद्रपुरी थाना क्षेत्र अंतर्गत डीएवी पब्लिक स्कूल कटार स्थित परीक्षा केंद्र से पुलिस ने भर्ती परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने वाले एक गिरोह के कुल चार सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इसमें फर्जी मजिस्ट्रेट भी शामिल है जो जांच करने के बहाने दाखिल हुआ था।
सेंटर पर व्यवस्था जांचने पहुंचा था फर्जी मजिस्ट्रेट
दरअसल गिरफ्तार फर्जी मजिस्ट्रेट ने परीक्षा तिथि से एक दिन पूर्व ही परीक्षा केंद्र सुपरवाइजर को जिला गोपनीय शाखा का एक फर्जी पत्र दिखाते हुए योगदान दिया। खुद को पटना सचिवालय का वरीय कोषागार पदाधिकारी बताते हुए उसने कहा कि चयन परिषद द्वारा उसे औचक निरीक्षण के लिए प्रतिनियुक्त किया गया है और इस क्रम में फर्जी मजिस्ट्रेट ने परीक्षा केंद्र की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।
परीक्षार्थी को डांटते हुए बाहर ले गया और नकल करायी
वहीं बुधवार को डीएवी कटार परीक्षा केंद्र पर आयोजित परीक्षा के दौरान उक्त मजिस्ट्रेट निरीक्षण करने पहुंचा और एक परीक्षार्थी को उसके खराब एटीट्यूड के कारण कार्रवाई के लिए अपने साथ हाल से बाहर ले गया। काफी देर बाद परीक्षार्थी एवं मजिस्ट्रेट की सूचना नहीं मिलने पर हाल में मौजूद निरीक्षक उन्हें परीक्षा केंद्र परिसर में ढूंढने लगते हैं, लेकिन तभी परीक्षार्थी अपने हाथ में ओएमआर शीट लेकर हाल में पहुंचा और बताया कि मजिस्ट्रेट ने उसे सिर्फ डांट कर छोड़ दिया है। वहीं हाल में मौजूद निरीक्षक ने यह पाया कि उक्त परीक्षार्थी का ओएमआर शीट पूरी तरह भरा हुआ है, जबकि हाॅल बाहर जाते वक्त ओएमआर शीट पूरी तरह खाली था।
सूचना पर पहुंचे एसडीएम व एएसपी
परीक्षा हॉल में फर्जीवाड़े की भनक लगते ही मौजूद निरीक्षक ने इसकी सूचना डेहरी एसडीएम व एएसपी को दी। दोनों अधिकारियों ने परीक्षा केंद्र पर पहुंचते ही उक्त परीक्षार्थी एवं मजिस्ट्रेट को हिरासत में ले लिया और उसके परिचय पत्र, योगदान पत्र आदि की जांच करने पर पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
जिला प्रशासन लिखी गाड़ी में बैठा था साल्वर
साथ ही पुलिस ने जिला प्रशासन का बोर्ड लगे एक वाहन के अंदर बैठे प्रश्न पत्र हल करने वाला एक व्यक्ति और ड्राइवर को भी गिरफ्तार कर लिया है, जो जहानाबाद जिले के निवासी बताए जाते हैं।
चार मोबाइल मिले, पुलिस जांच में जुटी
एएसपी अतुलेश झा ने गुरुवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि गिरफ्तार फर्जी मजिस्ट्रेट ने पुलिस के समक्ष स्वीकार किया है कि पैसों के एवज में एक परीक्षार्थी को मदद करने के लिए यह षड्यंत्र रचा गया था और उसने एक गोलू नामक व्यक्ति के नाम का भी खुलासा किया है, जो संभवतः इस फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड बताया जाता है। पुलिस के अनुसार इनके पास से चार मोबाइल सहित सभी फर्जी दस्तावेज जप्त किए गए हैं और पूर्व की घटनाओं में संलिप्तता आदि की जांच की जा रही है। एएसपी ने बताया कि मामले में कई तकनीकी साक्ष्य मिले हैं, जिसके आधार पर इस गिरोह में शामिल अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए भी कार्रवाई की जा रही है।
प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा पर सवाल
गौरतलब हो कि यह मामला बिहार में होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जिस तरह से इस गिरोह ने फर्जी दस्तावेज बनाकर और वाहन पर प्रशासन का बोर्ड लगाकर परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश किया, उसने बिहार पुलिस को भी सकते में डाल दिया है।
फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की जांच में जुटी है और इनके द्वारा अन्य परीक्षाओं में किए गए फर्जीवाड़े का भी जांच किया जा रहा है।
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बिहार : बिना हथकड़ी हिस्ट्रीशीटर को लग्जरी गाड़ी से कोर्ट ले गई मधेपुरा पुलिस, रील भी बनी
मधेपुरा | रजनीश सिंह
बिहार के एक हिस्ट्रीशीटर को बिना हथकड़ी लगाए एक लग्जरी गाड़ी में कोर्ट ले जाने की रील बनाई गई और फिर उसे सोशल मीडिया पर वायरल कराकर हिस्ट्रीशीटर का प्रचार किया गया। इस रील के वायरल होने के बाद मधेपुरा पुलिस के ऊपर हिस्ट्रीशीटर को वीआईपी ट्रीटमेंट देने का गंभीर आरोप लगा। सोशल मीडिया पर पुलिस की आलोचना होने के बाद एसपी ने जांच के आदेश दिए और अब कड़ा ऐक्शन हुआ है।
हिस्ट्रीशीटर अंकज कुमार उर्फ लल्लू यादव का वीडियो वायरल होने के बाद एक एसआई और दो चौकीदारों को सस्पेंड किया गया है। सस्पेंड होने वाले एसआई राम उदय कुमार और दो चौकीदार अनिल कुमार व मोहम्मद रसूल हैं। तीनों से 24 घंटे में स्पष्टीकरण देने को कहा गया है कि उन्होंने कुख्यात अपराधी को वीआईपी ट्रीटमेंट आखिर क्यों दिया?
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गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार
- गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
- 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
- सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।
गोपालगंज | आलोक कुमार
बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।
गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।
प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।
इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।
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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया
- बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
- शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
- जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।
बक्सर | अमीषा कुमारी
बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।
दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे। मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।
राजू ने बताया कि 27 फरवरी की सुबह करीब 11 बजे जेल प्रशासन की ओर से कॉल आया कि राजेंद्र की तबीयत बिगड़ गई है और वे अस्पताल पहुंच जाएं। लेकिन जब वे लोग सदर अस्पताल पहुंचे तो एक्स-रे रूम के बाहर स्ट्रेचर पर मृत अवस्था में राजेंद्र मिले। वहां कोई मौजूद नहीं था। इसके बाद परिजनों ने हंगामा किया और मौके पर पुलिस पहुंची।
मृतक राजेंद्र पेशे से पेंटर थे और उनके दो छोटे बच्चे हैं। अचानक हुई इस मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। वहीं, यह घटना बिहार में शराबबंदी लागू कराने के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है। साथ ही, जेल में बंदी की सुरक्षा को लेकर जेल प्रशासन पर भी सवाल खड़ा होता है। मृतक के भाई ने बताया कि 25 फरवरी को वह अपने भाई से मिलने जेल गए थे, तब उसे ऐसी कोई दिक्कत नहीं थी जिसके चलते उसकी अचानक मौत हो सकती है।
बक्सर सेंट्रल जेल के अधीक्षक ज्ञानित गौरव ने परिजनों के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मौत हार्ट अटैक से प्रतीत होती है। हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही इसका सही कारण पता लग सकेगा।
बक्सर सदर अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में तैनात डॉक्टर अमित कुमार ने पुष्टि की कि कैदी को अस्पताल लाने से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। वहीं, नगर थानाध्यक्ष मनोज कुमार ने सदर अस्पताल में मीडिया से कहा कि अगर कहीं कोई लापरवाही पाई जाती है तो उस पर सख्त कदम उठाए जाएंगे।”
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