Connect with us

दुनिया गोल

ईरान युद्ध में समझौता कराने के लिए सामने पाक के साथ आया चीन, क्या है वजह?

Published

on

नई दिल्ली |  ईरान युद्ध पर अब तक सधी हुई प्रतिक्रिया देते रहे चीन ने शांति समझौते का प्रस्ताव पेश करके दुनिया को चौंका दिया है।

यह प्रस्ताव 31 मार्च की शाम को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है जो इस समय बीजिंग के दौरे पर हैं।

शांति प्रस्ताव चीन व पाकिस्तान की ओर से संयुक्त रूप से जारी हुआ है। इसमें पांच बिंदुओं में संयुक्त राष्ट्र के नियमों के तहत समझौते की शर्तें रखी गई हैं।

इससे पहले 29 व 30 मार्च को पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने सऊदी अरब, तुर्किये व मिस्त्र के विदेश मंत्रियों के साथ मिलकर शांति समझौते की योजना को लेकर मंथन किया था।

हालांकि इस बैठक को लेकर ईरान ने कहा था कि उनसे समझौते पर कोई सीधी वार्ता नहीं की है।

क्या है चीन-पाक का पीस प्लान?   

1- तत्काल युद्धविराम : सबसे पहली शर्त यह है कि दोनों पक्ष (अमेरिका/इजरायल और ईरान) तत्काल प्रभाव से सैन्य हमले रोकें ताकि मानवीय सहायता के लिए गलियारा (Corridor) बनाया जा सके।

2- संयुक्त राष्ट्र (UN) की निगरानी में वार्ता: शांति प्रक्रिया किसी एक देश के प्रभाव में न होकर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के नियमों के तहत हो। चीन ने प्रस्ताव दिया है कि एक निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय समिति इस समझौते की निगरानी करे।

3- संप्रभुता का सम्मान (Respect for Sovereignty): प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि ईरान की क्षेत्रीय अखंडता और उसकी संप्रभुता का सम्मान किया जाए। किसी भी बाहरी शक्ति को ईरान में सत्ता परिवर्तन (Regime Change) की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

4- आर्थिक प्रतिबंधों में ढील: चीन ने शर्त रखी है कि शांति वार्ता शुरू होने के साथ ही ईरान पर लगे उन कड़े प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाया जाए, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।

5- क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचा: एक ऐसा साझा सुरक्षा तंत्र बनाया जाए जिसमें ईरान के पड़ोसी देश (जैसे पाक, सऊदी अरब, तुर्किये) शामिल हों, ताकि भविष्य में इस तरह के संघर्षों को बातचीत से सुलझाया जा सके।

समझौते की कितनी उम्मीद ?

ईरान ने भले इस्लामाबाद में हुई बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया हो लेकिन समझौते की कोशिशों में चीन के आगे आ जाने से उम्मीद बढ़ गई है। ईरान अपना सबसे ज्यादा तेल चीन को ही बेचता है।

पाक, ईरान का पड़ोसी देश है, उसके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हाल में करीबी रिश्ते देखे गए हैं। फिर भी उसने पड़ोसी देश ईरान में हुए हमले की आलोचना की थी।

दूसरी ओर पाक के चीन से भी बेहतर संबंध हैं जो ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीददार है।

माना जा रहा है कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था कमजोर पड़ने से चीनी बाजार पर असर पड़ेगा इसलिए वह शांति समझौते में शामिल हुआ है।

 

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *