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ईरान पर हमले के बाद पहली बार पीएम मोदी और ईरान राष्ट्रपति की फोन कॉल – जानिए क्या हुई बात

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नई दिल्ली | ईरान पर अमेरिका व इजरायल के हमले शुरू होने के बाद पहली बार भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात की है। इसकी जानकारी खुद पीएम मोदी ने 12 मार्च की रात को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी।

पीएम मोदी ने कहा है कि उन्होंने पश्चिम एशिया की ‘गंभीर स्थिति’ को लेकर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बात की है। भारतीयों की सुरक्षा, सामान और ऊर्जा की बिना रुकावट आवाजाही को भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन

गौरतलब है कि यह फोन वार्ता ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक तेल की आवाजाही बाधित होने के चलते भारत को आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करके गैस की काला-बाजारी रोकने के कदम उठाने पड़े हैं, ताकि आम जनता के लिए ज़रूरी सामानों की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।

पीएम मोदी ने 13 मार्च को ट्वीट किया-

“क्षेत्र (पश्चिम एशिया) की गंभीर स्थिति पर मैंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियान से बातचीत की है। तनाव बढ़ने, आम नागरिकों के मारे जाने और सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारतीय लोगों की सुरक्षा, सामान और ऊर्जा की बिना रुकावट आवाजाही भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को हमने फिर दोहराया है। साथ ही बातचीत और कूटनीति के जरिए समस्या का हल निकालने की अपील है।”

पीएम मोदी ने ट्वीट करके फोन वार्ता की जानकारी दी।

भारत ने ईरानी बच्चियों की हमले पर पहली बार बयान दिया

ईरान के मीनाब शहर के प्राथमिक कन्या स्कूल में हुए हमले में 165 बच्चियों की मौत पर भारत ने 12 मार्च को प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में इस घटना को लेकर पूछे गए एक सवाल पर एक संक्षिप्त बयान देकर दुख जताया।

प्रेस ब्रिफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (screen grab – Youtube/Ministry of External Affairs, India)

यह प्रतिक्रिया हमले के लगभग दो सप्ताह बाद आई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार माना जा रहा है और उसकी खासी आलोचना हो रही है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सवाल के जवाब में कहा-

“स्कूली बच्चियों के बारे में आपके सवाल के संबंध में बता दें कि हमने इस चल रहे संघर्ष पर कई बयान जारी किए हैं। हमने सभी नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है और कीमती जानों के नुकसान पर अफसोस जताया है व उस संबंध में दुख व्यक्त किया है।”

यह बयान भी दर्शाता है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका या इजरायल का नाम लिए बिना सधी प्रतिक्रिया दी है।

जयशंकर ने तीन बार लगाया ईरानी विदेश मंत्री को फोन

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (फोटो – flickr)

भारत में पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच भारतीय विदेश मंत्री ने अपने समकक्ष से हाल में तीन बार बात की है। साप्ताहिक प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह जानकारी मीडिया को दी। उन्होंने बताया-

“विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई है। पिछली बातचीत में शिपिंग की सेफ्टी और इंडिया की एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों पर बात हुई थी।”

रणधीर जायसवाल ने आगे कहा, “जहां तक ​​युद्ध के असर की बात है, तो यह सबके सामने है कि आस-पास क्या हो रहा है। हम में से कई लोगों की ज़िंदगी पर इसका असर पड़ा है, सिर्फ हमारी ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों और देशों पर इसका असर पड़ा है ।”

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अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट: युद्ध के दो सप्ताह बाद भी ईरानी शासन अडिग, खामेनेई की मौत से कोई असर नहीं

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मोजतबा खामेनेई को रविवार को सुप्रीम लीडर चुना गया है।
मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर बनाया गया है और अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट बता रही है कि जनता को उनके ऊपर पूर्ण विश्वास है।

नई दिल्ली | अमेरिका व इजरायल के लगातार दो सप्ताह से ईरान के ऊपर जारी हमलों के बावजूद ईरानी सरकार पर कोई बड़ा खतरा नहीं है और नेतृत्व पूरी तरह से अडिग बना हुआ है। यह विश्लेषण अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट के जरिए सामने आया है। 

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की ‘मौत’ के बाद भी ईरान का शासन ढहने की कगार पर नहीं पहुंचा है।
तीन अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने यह रिपोर्ट किया है। 
रॉयटर्स ने लिखा है कि सूत्रों ने बताया कि कई खुफिया रिपोर्टों में एक ही निष्कर्ष निकला है कि “ईरानी शासन गिरने के खतरे में नहीं है और वह जनता पर नियंत्रण बनाए हुए है।”
इनमें से एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि यह विश्लेषण हाल के दिनों में तैयार की गई रिपोर्ट पर आधारित है। 
इस खुफिया रिपोर्ट की जानकारी ऐसे समय में निकलकर सामने आई है, जब ट्रंप दावा कर रहे हैं कि उन्होंने इस युद्ध को लगभग जीत लिया है। दूसरी ओर, इजरायली पीएम नेतन्याहू लगातार ईरान की जनता को उकसा रहे हैं कि वे नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के खिलाफ आवाज उठाएं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल हमलों के पहले दिन ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत हो जाने के बावजूद ईरान का धार्मिक नेतृत्व एकजुट है और जनता पर उसका नियंत्रण कायम है।
इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इजरायली अधिकारियों ने भी निजी चर्चाओं में स्वीकार किया है कि युद्ध से धार्मिक शासन के ढहने की कोई गारंटी नहीं है।
यह रिपोर्ट अमेरिका-इजरायल की रणनीति पर सवाल खड़े करती है कि क्या केवल सैन्य हमलों से ईरानी शासन को कमजोर किया जा सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का धार्मिक नेतृत्व अभी भी मजबूत है और युद्ध लंबा खिंच सकता है।
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रूस पर ट्रंप की नरमी से फ्रांस नाखुश, राष्ट्रपति मैक्रों बोले- ‘यूक्रेन से हमारा ध्यान कम नहीं होना चाहिए’

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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (credit - rawpixel)
  • जी-7 सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने सदस्य देशों से कहा।

नई दिल्ली |

अमेरिका और इजरायल के ईरान पर युद्ध के बाद गहराए वैश्विक तेल संकट को लेकर रूसी तेल से प्रतिबंधों में नरमी दी गई है। अमेरिका के इस कदम को लेकर फ्रांस के राष्ट्रपति ने असहमति जतायी है।

फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा है कि होर्मुज़ स्ट्रेट में पैदा हुई स्थिति का हवाला देकर रूस पर लगे प्रतिबंध हटाना ग़लत है। ऐसा उन्होंने जी-7 देशों के नेताओं के साथ वीडियो कॉन्फ़्रेंस के बाद कहा। गौरतलब है इस साल जी-7 सम्मेलन की अध्यक्षता फ्रांस कर रहा है।

मैक्रों ने कहा,

“ईरान की स्थिति के कारण यूक्रेन पर हमारा ध्यान, यूक्रेन के लिए हमारा समर्थन और रूस पर लगाए गए प्रतिबंधों को लेकर हमारी स्पष्टता कम नहीं होनी चाहिए।”

हाल ही में पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने रूसी तेल पर अस्थायी रूप से प्रतिबंधों में ढील दी है, ताकि भारत जैसे देश समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल ख़रीद सके।

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को लेकर फ्रांस की चिंता है कि कहीं ईरान युद्ध शुरू होने के बाद रूस को अमेरिका की ओर से यह रियायत देने से यूक्रेन युद्ध में उसकी स्थिति और मजबूत न हो जाए।

G-7 देश तेल की आवाजाही को दे सकते हैं सुरक्षा

G7 देशों के नेताओं ने खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की सुरक्षित और स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए जहाजों को एस्कॉर्ट (सुरक्षा काफिले) देने के विकल्प की जांच करने पर सहमति जताई है।
बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया है कि जहाजों को सैन्य या नौसैनिक एस्कॉर्ट प्रदान करने का प्रस्ताव शामिल है ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल और अन्य सामानों की आवाजाही बिना रुकावट हो सके।
 मैक्रों ने जी-7 बैठक में यह भी कहा कि यह ज़रूरी है कि सभी देश मिलकर समन्वय से काम करें, ताकि होर्मुज़ स्ट्रेट में आवाजाही जल्द से जल्द बहाल की जा सके।
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दुनिया गोल

दुबई एयरपोर्ट पर फिर से ड्रोन हमला, एक भारतीय समेत 4 घायल

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By Tony Hisgett from Birmingham, UK - Dubai Airport, CC BY 2.0, Link
दुबई हवाई अड्डा (फाइल फोटो, विकिमीडिया)

नई दिल्ली | दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) पर ड्रोन से हमला किया है, जिसके बाद उसे अस्थायी तौर पर खाली कराए जाने की खबर है।

इस हमले में एक भारतीय समेत चार विदेशी नागरिक घायल हो गए हैं।

इससे पहले 7 मार्च को भी दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट की उड़ानों को रद्द करना पड़ा था।

तब दुबई के अधिकारियों ने कहा था कि एक हवाई हमले को इंटरसेप्ट करने के दौरान मलबा गिरने से घटना हुई थी, तब एयरपोर्ट को तुरंत खाली कराया गया था। हालांकि फिर उड़ानें दोबारा शुरू कर दी गई थीं। 

ताजा घटना को लेकर दुबई इंटरनेशनल हवाई अड्डे के मीडिया ऑफिस ने ट्वीट करके बताया है कि बुधवार सुबह हवाई अड्डे के आसपास दो ड्रोन गिरे थे।
साभार - एक्स

साभार – एक्स

इस हादसे में चार लोग घायल हुए हैं, जिसमें दो घानाई, एक बांग्लादेशी और एक भारतीय नागरिक शामिल हैं।
भारतीय नागरिक को मध्यम चोटें आई हैं, जबकि बाकी तीन को मामूली चोटें आईं।

यह भी कहा गया है कि हवाई यातायात सामान्य रूप से संचालित हो रहा है।

दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) पर ड्रोन हमले की खबर ने पश्चिम एशियाे में तनाव को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

साथ ही, यह घटना भारत के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि दुबई में बड़ी संख्या में भारतीय काम कर रहे हैं और DXB दुनिया का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है।

 

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