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Islamabad Talks: 21 घंटे की वार्ता के बाद भी नहीं हुआ समझौता, ‘अंतिम ऑफर’ देकर अमेरिका लौटे जेडी वेंस

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नई दिल्ली |  पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई ऐतिहासिक शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है।

शनिवार (11 april) को करीब 21 घंटे तक चली मैराथन चर्चा के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) अपनी टीम के साथ वापस वाशिंगटन के लिए रवाना हो गए हैं। हालांकि उन्होंने कहा है कि ईरान को वे अंतिम प्रस्ताव देकर गए हैं।

उधर, ईरान की ओर से कहा गया है कि एक सत्र में इतना बड़ा मसला सुलझने की उम्मीद नहीं की जा सकती। विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए गए हैं कि आगे भी संदेशों के आदान-प्रदान के जरिए वार्ता चलेगी।

वार्ता करा रहे मेजबान पाक की ओर से कहा गया है कि दोनों देशों के बीच वह आगे भी संवाद बनाए रखने में भूमिका निभाता रहेगा। साथ ही अपील की है कि दोनों पक्ष सीज़फायर का पालन करें।

गौरतलब है कि साल 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच यह सबसे उच्च स्तरीय सीधी मुलाकात थी।

वेेंस बोले- “हमने बेस्ट ऑफर ईरान के सामने रखा”

पाकिस्तान से स्वदेश रवाना होने से पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि, “ईरान समझौते पर पहुंचने में असफल रहा।” वेंस ने कहा-

“हम उनसे आधारभूत वादा चाहते थे कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे। पर हमने उच्च स्तरीय बैठक में नहीं पाया कि वे इस पर सहमत हैं। हमने अपना ‘सर्वश्रेष्ठ और अंतिम’ (Final and Best) प्रस्ताव मेज पर रखकर लौट रहे हैं, अब देखना यह है कि क्या ईरानी इसे स्वीकार करते हैं।”

वेंस ने मेजबान देश के रूप में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की भूमिका की प्रशंसा भी की।

ईरान बोला- एक बैठक में समझौता संभव नहीं

 ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने ईरान के सरकारी प्रसारक IRIB से कहा कि एक सत्र में समाधान की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने कहा-

“किसी को यह उम्मीद नहीं करनी चाहिए थी कि दशकों पुराना विवाद एक ही बैठक में सुलझ जाएगा। अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा व गैर वाजिब थीं।”

 हालांकि, ईरान ने तकनीकी विशेषज्ञों के माध्यम से भविष्य में लिखित संदेशों के आदान-प्रदान की संभावना खुली रखी है।

मेजबान पाकिस्तान क्या बोला?

वार्ता विफल रहने के बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वाशिंगटन और तेहरान को युद्धविराम (ceasefire) समझौते को बनाए रखना चाहिए।

सरकारी मीडिया द्वारा प्रसारित एक संक्षिप्त बयान में इशाक डार ने कहा-

“यह अनिवार्य है कि दोनों पक्ष युद्धविराम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखें। पाकिस्तान आने वाले दिनों में ईरान के इस्लामी गणराज्य और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जुड़ाव और संवाद को सुविधाजनक बनाने के लिए अपनी भूमिका निभाता रहा है और आगे भी निभाता रहेगा।”

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