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प्रदेश रिपोर्ट

ग्राउंड रिपोर्ट: नेपाल के कस्टम नियम से रक्सौल के बाजार सूने हुए; क्या खतरे में है रोटी-बेटी का रिश्ता?

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रक्सौल के बाजार में ग्राहक न आने से दुकानदार परेशान हैं। यहां नेपाल से आने वाले ग्राहकों की भीड़ रहती थी।
रक्सौल के बाजार में ग्राहक न आने से दुकानदार परेशान हैं। यहां नेपाल से आने वाले ग्राहकों की भीड़ रहती थी।
  • नेपाल सरकार ने सीमा से सामान ले जाने पर लगाया टैक्स।
  • सीमा पर बसे रक्सौल के बाजारों में सन्नाटा, लोग परेशान।
  • सौ रुपये से अधिक कीमत के सामान पर टैक्स का भारी विरोध।

रक्सौल (पूर्वी चंपारण) |  राजेश कुमार

नेपाल की सीमा पर बसे बिहार के रक्सौल की वो गलियां, जहां कभी तिल रखने की जगह नहीं होती थी और नेपाल से आने वाले ग्राहकों की गहमागहमी से बाजार गुलजार रहता था, आज वहां सन्नाटा पसरा है।

नेपाल की नई सरकार द्वारा सीमा पर 100 रुपये से अधिक की खरीदारी पर भन्सार (टैक्स) अनिवार्य किए जाने के फैसले ने रक्सौल के व्यापार की कमर तोड़ दी है। इस नियम के चलते भारत से सामान खरीदकर जा रहे नेपाली नागरिकों को भारी टैक्स देना होगा। इस नियम को भारत-नेपाल के रोटी-बेटी के संबंध के लिए खतरा माना जा रहा है।

सन्नाटे में डूबा कारोबार

रक्सौल के मुख्य बाजार में घुसते ही दुकानदारों के मुरझाए चेहरे इस नीति के असर की गवाही देते हैं। छोटे किराना व्यापारियों से लेकर बड़े टेक्सटाइल शोरूम तक, हर जगह सन्नाटा है।

स्थानीय दुकानदार बताते हैं,

“पहले नेपाल से लोग छोटी-छोटी जरूरतों के लिए रक्सौल आते थे। अब 100 रुपये से ऊपर के हर सामान पर टैक्स और सीमा पर कड़ी पूछताछ के डर से ग्राहकों ने आना लगभग बंद कर दिया है। हमारा दैनिक कारोबार 70 से 80 फीसदी तक गिर गया है।”

व्यापारिक संगठनों ने चिंता जतायी

इस संकट को लेकर रक्सौल के तमाम प्रमुख व्यापारिक और सामाजिक संगठनों ने एक सुर में अपनी चिंता जताई है। भारत विकास परिषद, रक्सौल चैम्बर ऑफ कॉमर्स, लायंस क्लब, टेक्सटाइल चैम्बर और इंडो-नेपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से इस स्थिति को ‘अमानवीय’ करार दिया है।

इन संगठनों का कहना है कि

“सीमावर्ती अर्थव्यवस्था पूरी तरह से आपसी आवाजाही पर टिकी है। 100 रुपये की सीमा तय करना व्यवहारिक नहीं है। इससे दोनों देशों के छोटे व्यापारी बर्बाद हो जाएंगे।”

व्यापारियों का तर्क है कि रक्सौल और बीरगंज के बीच केवल व्यापारिक संबंध नहीं हैं, बल्कि यहां शादियां और पारिवारिक रिश्ते भी हैं।

सीमा पर महिलाओं और आम नागरिकों के साथ सख्ती और कर का भार बढ़ाना सदियों पुराने सांस्कृतिक जुड़ाव को कमजोर कर रहा है।

प्रतिनिधिमंडलों ने भारत और नेपाल की सरकारों से मांग की है कि नई नीति में जल्द से जल्द बदलाव किए जाएं।

सीमा पर छानबीन सख्त, लोग परेशान

साथ ही लोगों की शिकायत है कि सीमा पर तैनात अधिकारी छानबीन के नाम पर आम लोगों को परेशान कर रहे हैं, उनका शालीन व्यवहार सुनिश्चित हो।

साथ ही ये लोग चाहते हैं कि सीमावर्ती व्यापार को बचाने के लिए विशेष रियायतें दी जाएं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि नेपाल की सीमा से लगते रक्सौल जैसे इलाकों में अगर स्थिति समय रहते नहीं संभाली जा सकी तो सीमाई इलाकों का साझा सामाजिक ढांचा बिखर सकता है।

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