रिपोर्टर की डायरी
रोहतास (बिहार) : 4 साल बाद सरकारी नौकरी के लिए हो रहा exam, एडमिट कार्ड में लगा दी कुत्ते का फोटो!
- 15 मार्च को होनी है भर्ती परीक्षा, एडमिट कार्ड पर कुत्ते की फोटो।
- रोहतास जिले के उम्मीदवार के एडमिट कार्ड में बड़ी गलती।
- जिला एवं सत्र न्यायालय में चपरासी पद के लिए होना है पेपर।
पीड़ित परीक्षार्थी ऋतेश कुमार रोहतास जिले के बिक्रमगंज अनुमंडल क्षेक्ष के रहने वाले हैं। उन्होंने साल 2022 में जिला एवं सत्र न्यायालय में चपरासी के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन किया था।
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बांका में पुलिस लाइन का खाना बना जहर! 100 से अधिक जवान अचानक पड़े बीमार
बांका | दीपक कुमार
बिहार के बांका जिला से शुक्रवार को एक बेहद चौंकाने वाली और हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ पुलिस लाइन में परोसा गया खाना जवानों के लिए मानो जहर साबित हो गया।
जानकारी के अनुसार, पुलिस लाइन मेस में दोपहर के भोजन के रूप में जवानों को फ्राइड राइस और चना छोला परोसा गया था। ड्यूटी से लौटे जवानों ने जैसे ही यह खाना खाया, कुछ ही देर बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ने लगी।
देखते ही देखते 100 से अधिक पुलिस जवानों को पेट दर्द, उल्टी, जी मिचलाने और दस्त जैसी गंभीर शिकायतें होने लगीं। हालात इतने बिगड़ गए कि पूरे पुलिस लाइन परिसर में अफरा-तफरी मच गई और एम्बुलेंस के सायरन लगातार गूंजने लगे।
बीमार पड़े सभी जवानों को तुरंत इलाज के लिए बांका सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में मरीजों के पहुंचने से अस्पताल में भी हड़कंप मच गया और बेड कम पड़ गए। इसके बाद आनन-फानन में अतिरिक्त बेड और डॉक्टरों की व्यवस्था की गई।
अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, फिलहाल सभी जवानों को प्राथमिक उपचार दिया जा रहा है, उन्हें सलाइन चढ़ाया जा रहा है और डॉक्टरों की विशेष टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
इस घटना के बाद पुलिस लाइन मेस में परोसे जाने वाले भोजन की स्वच्छता और गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जवानों के बीच भी इस लापरवाही को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच के आदेश दे दिए हैं। परोसे गए भोजन के सैंपल को जांच के लिए लैब भेजा जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि आखिर जवानों की तबीयत बिगड़ने की असली वजह क्या थी।
अधिकारियों ने साफ कहा है कि यदि इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही सामने आती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अब बड़ा सवाल यही है कि देश की सुरक्षा में दिन-रात तैनात रहने वाले जवानों के स्वास्थ्य के साथ इतनी बड़ी लापरवाही आखिर कैसे हो गई?
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रोहतास: लॉ कॉलेज हॉस्टल में छात्रा का शव फंदे पर लटका मिला, मीडिया कर्मियों को गेट पर ही रोका
- रोहतास के नारायण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की घटना।
- लॉ फाइनल ईयर की छात्रा का हॉस्टल में लटका मिला शव।
- कॉलेज ने मीडिया को प्रवेश नहीं दिया, सुसाइड का मामला बताया।
सासाराम | अविनाश कुमार श्रीवास्तव
पटना के एक हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत का मामला अब तक सुलझा नहीं है और अब रोहतास जिले में एक और ऐसी ही घटना सामने आई है।
रोहतास जिले में लॉ की एक छात्रा की कॉलेज कैंपस में संदेहास्पद स्थिति में 12 मार्च को मौत हो गई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
यह घटना जिले के डेहरी क्षेत्र के जमुहार स्थित नारायण मेडिकल हॉस्पिटल एंड हॉस्पिटल में हुई। मरने वाली छात्रा कैमूर जिले की है और उसका शव हॉस्टल के कमरे में फंदे पर लटका मिला।
सूचना मिलते ही रोहतास के एसपी रौशन कुमार घटनास्थल पर पहुंचे। एसपी के निर्देश पर फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिन्होंने घटनास्थल से कई अहम साक्ष्य जुटाए हैं।
बताया जा रहा है कि छात्रा के पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसे जांच के लिए जब्त कर लिया गया है। हालांकि उसमें क्या लिखा है, इसका खुलासा अभी पुलिस ने नहीं किया है।
इस घटना की कवरेज करने पहुंचे मीडिया कर्मियों को कॉलेज परिसर के अंदर जाने से रोक दिया गया। कॉलेज प्रबंधन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए कई घंटों तक पत्रकारों को गेट के बाहर ही रोके रखा और किसी को अंदर प्रवेश की अनुमति नहीं दी।
अब तक कॉलेज प्रबंधन की ओर से इस मामले को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
रोहतास एसपी रौशन कुमार ने बताया कि
“छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई है। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं से जांच कर रही है। घटनास्थल से सुसाइड नोट मिला है, परिजनों का बयान भी लिया जा रहा है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल पुलिस मामले की गहनता से छानबीन में जुटी हुई है।”
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गोपालगंज (बिहार): जब सिलेब्रेटी मदद को आए आगे तो डीएम ने भिजवाई दिव्यांग छात्रा को ट्राई-साइकिल
गोपालगंज | आलोक कुमार
गोपालगंज की गरीब विकलांग छात्रा के दो किलोमीटर तक पैदल चलकर स्कूल जाने के संघर्ष को दिखलाते एक वीडियो के वायरल हो जाने के बाद उसकी जिंदगी बदल गई है। 15 साल की सोनी कुमारी की मदद के लिए अलीपुर विधानसभा की विधायक मैथिली ठाकुर सामने आईं। और उनकी पहल पर गोपालगंज जिला प्रशासन ने 12 मार्च को छात्रा को ट्राई साइकिल उपलब्ध करवाई है। इतना ही नहीं, विधायक व लोकगायिका मैथिली ठाकुर के अलावा, परोपकार के लिए प्रसिद्ध अभिनेता सोनू सूद और कवि व नेता कुमार विश्वास ने भी ट्वीट के जरिए इस छात्रा को मदद का आश्वासन दिया।
इस घटना के बाद सवाल इस बात पर उठता है कि आखिर ये कैसी व्यवस्था है जिसमें बड़े नेता या सिलेब्रिटी के रेफरेंस पर अफसर ऐक्शन लेते हैं? जबकि विकलांग बच्चों व वयस्कों को उनकी जरूरत की सामग्री व सहायता राशि उपलब्ध करवाना जिला दिव्यांग सशक्तिकरण विभाग की जिम्मेदारी है। आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिव्यांग शब्द प्रचलित किया था, उनकी मंशा थी कि इससे विशेष चुनौती वाले लोगों के प्रति आम लोगों व सरकारी अफसरों का नजरिया बदलेगा, पर नाम बदलने भर से जमीन पर ऐसा बदलाव नहीं दिख रहा है।
बहरहाल, गोपालगंज जिलाधिकारी पवन कुमार सिन्हा के निर्देश पर 12 मार्च को छात्रा सोनी कुमारी के स्कूल में उन्हें ट्राई साइकिल दी गई। इस दौरान स्कूल के अन्य विद्यार्थी, सोनी को निशुल्क पढ़ा रहे उनके प्रिंसिपल और सोनू की मां इलायची देवी मौजूद रहीं।
मैथिली ठाकुर ने जिलाधिकारी को किया था फोन
बता दें कि 11 मार्च की रात नौ बजे विधायक मैथिली ठाकुर ने ट्वीट करके जानकारी दी थी कि उन्होंने सोनी कुमारी को ट्राई साइकिल दिलाने के लिए गोपालगंज जिलाधिकारी से फोन पर बात की है और 13 मार्च को छात्रा को ट्राईसाइकिल मिल जाएगी।
हालांकि गोपालगंज जिलाधिकारी ने मीडिया को दिए बयान में विधायक मैथिली ठाकुर से हुई फोन बातचीत का जिक्र नहीं किया और कहा कि सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद उन्होंने इसका संज्ञान लिया है।
जिलाधिकारी बोले- सोशल मीडिया से जानकारी मिली
जिलाधिकारी ने बताया कि 11 मार्च की शाम सात बजे उन्हें इस वीडियो की जानकारी मिली, उनके निर्देश पर जिला शिक्षा पदाधिकारी और दिव्यांग कोषांग के प्रभारी पदाधिकारी ने छात्रा के परिवार से संपर्क करके उसके कागजों को वेरिफाई किया। इसके बाद उसे ट्राईसाइकिल दी गई।
यानी चौबीस घंटे से भी कम समय में जिलाधिकारी के निर्देश पर छात्रा को ट्राई साइकिल मिल गई, जबकि उसकी मां कई साल से इसके लिए प्रयास कर रही थी।
डीएम ने विभाग की गलती मानी, बोले- पेंशन जल्द मिलेगी
हालांकि जिलाधिकारी ने बताया है कि इस बच्ची की मां की ओर से इसका आवेदन नहीं किया गया था। जिलाधिकारी का यह भी कहना है कि बच्ची का विकलांगता प्रमाणपत्र बना हुआ है, ऐसे में यह विभाग की जिम्मेदारी थी कि बच्ची को ट्राईसाइकिल दिलाई जाती और उसे पेंशन भी दिलाई जाती। जिलाधिकारी ने कहा है कि दो-तीन दिनों के भीतर दिव्यांग छात्रा को पेंशन के लिए आवेदन कराया जाएगा।
पांचवीं पास फिर भी पहली कक्षा में पढ़ने को मजबूर
12 मार्च को सोनी को ट्राई साइकिल मिलने का फोटो-वीडियो भी अब सोशल मीडिया पर उसी तरह साझा किया जा रहा है, जैसे सोनी कुमारी के संघर्ष का वीडियो वायरल हुआ था। जिलाधिकारी ने बताया है कि दिव्यांग छात्रा सोनी कुमारी सरकारी स्कूल से पांचवीं पास हैं। अब वे एक निजी स्कूल में निशुल्क पहली कक्षा में पढ़ रही हैं जबकि उनकी उम्र करीब 15 साल है। डीएम ने यह भी बताया कि सोनी के दिव्यांगता प्रमाणपत्र में उनकी जन्मतिथि 2008 है। यानी इस हिसाब से उनकी उम्र 18 साल है।
छात्रा ड्रॉपआउट हुई पर शिक्षा विभाग को खबर नहीं
दरअसल सोनी की विधवा मां खेतों में मजदूरी करके बेटी को पढ़ा रही हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोस के एक गांव के प्रिंसिपल ने बेटी की पढ़ने की ललक देखकर उसका निशुल्क दाखिला कर लिया था, अब वह कक्षा एक में पढ़ रही है। ये परिस्थितियां बताती हैं कि गरीब और जानकारी से महरूम होने की स्थिति में आम लोगों को सरकारी सेवाओं का लाभ कितना मिल पा रहा है।
शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तरह सोनी कुमारी को कक्षा आठ तक मुफ्त शिक्षा मिलनी चाहिए थी। कक्षा पांच के बाद वह ड्रॉपआउट क्यों हुई, इस बात की जवाबदेही जिला शिक्षा पदाधिकारी की होनी चाहिए। देखना होगा कि इस मामले में जिलाधिकारी कोई ऐक्शन लेते हैं या नहीं।
अब वायरल हो चुकी सोनी कुमारी की कहानी विस्तार में जानिए —
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