प्रदेश रिपोर्ट
सासाराम : नगर निगम क्षेत्र के सरकारी स्कूल में पीने का साफ पानी नहीं, प्यास लगने पर दूसरे स्कूल दौड़ते हैं बच्चे
- नौगाई के उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का चापाकल खराब।
- पड़ोस के स्कूल में जाकर पानी पीने को मजबूर हैं विद्यार्थी।
सासाराम (रोहतास) | अविनाश श्रीवास्तव
बिहार में सरकार भले ही शिक्षा पर बजट का सबसे बड़ा हिस्सा खर्च करने का दावा करे, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है।
ताज़ा मामला सासाराम सदर प्रखंड के नौगाई स्थित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का है, जहां भीषण गर्मी के बीच छात्र-छात्राएं पीने के पानी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
इस स्कूल में करीब डेढ़ सौ बच्चे रोज पढ़ने आते हैं। जिन्हें पीने के पानी के लिए एक वॉटर कूलर में रखे पानी पर निर्भर रहना पड़ता है जो स्कूल प्रबंधन अपने खर्चे पर बाजार से मंगवाता है।
नगर निगम क्षेत्र में पड़ने वाले इस सरकारी स्कूल में एक भी चापाकल चालू स्थिति में नहीं है।

स्कूल में बच्चों के लिए एक वॉटर कूलर रखा गया है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।
पड़ोस के स्कूल में जाकर पीते हैं पानी
28 अप्रैल को स्कूल में मौजूद विद्यार्थियों ने बताया कि प्यास बुझाने के लिए वे या तो घर से बोतल में पानी लाते हैं या फिर पड़ोस के मिडिल स्कूल में लगे नल पर जाकर पानी पीते हैं।
प्यास लगने पर ये छात्र-छात्राएं पढ़ाई छोड़कर पानी के लिए दूसरे परिसरों में दौड़ लगाने को मजबूर होते हैं। कई शिक्षकों ने बताया कि पीने का साफ पानी न होने के चलते उन्हें बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है।

स्कूल के चापाकल से निकलने वाले पानी में रेप व मिट्टी के कण देखे जा सकते हैं।
चापाकल से निकलता है गंदा पानी
दरअसल शिक्षा विभाग ने कुछ साल पहले इस स्कूल में समरसेबल पंप लगवाया था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही का आलम ऐसा है कि पंप की गहराई इतनी कम रखी गई कि उससे अब सिर्फ चापाकल से मिट्टी मिला गंदा पानी निकलता है।
यह पानी पीने योग्य तो दूर, हाथ धोने लायक भी नहीं है। फिर भी बच्चे इसका इस्तेमाल हाथ धोने व शौच जाने के लिए करने को विवश हैं जो संक्रमण का कारण बन सकता है।

जानकारी देतीं प्रिंसिपल मंजू कुमारी
हेड टीचर बोलीं- डीएम और विधायक से की शिकायत
इस मामले में विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मंजू कुमारी ने बताया कि हाल में डीएम की ओर से आई क्वेरी पर उन्होंने अपने स्कूल में पानी के इंतजाम न होने की जानकारी दे दी है।
साथ ही उन्होंने स्थानीय विधायक स्नेहलता कुशवाहा से भी मिलकर समस्या बताई है और उन्हें जल्द समाधान का आश्वासन मिला है।
अब देखना होगा कि स्कूल की यह स्थिति कब बदलती है। फिलहाल तो शहर के बीचों-बीच स्थित इस सरकारी स्कूल में बच्चे प्यासे बैठने को मजबूर हैं।

