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ट्रंप की टेढ़ी नजर वेनेज़ुएला पर, दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत को उतारा

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  • वेनेजुएला की सीमा से लगते कैरेबियन सागर में अमेरिकी नौसेना ने युद्धपोत को तैनात किया है।

 

नई दिल्ली |

अमेरिकी सरकार वेनेज़ुएला में सत्ता परिवर्तन की दिशा में कदम बढ़ा रही है। अमेरिकी सेना और खुफिया एजेंसियों की गतिविधियां इस ओर साफ इशारा कर रही हैं, इसके आधार पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने एक नए संभावित संकट पर रिपोर्ट किया है।

वेनेजुएला, दक्षिणी अमेरिका महाद्वीप में स्थित एक देश है जो लंबे समय से आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और अपने यहां कच्चे तेल के भंडारों के लिए जाना जाता है।

वेनेजुएला की सीमा से लगते कैरेबियन सागर में अमेरिका ने दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर फ़ोर्ड को तैनात कर दिया है। अमेरिकी नौसेना ने ऐसा अपने राष्ट्रपति ट्रंप के पिछले महीने दिए आदेश के बाद किया है।

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका कैरेबियन सागर में कथित तौर पर ड्रग्स ले जा रही नौकाओं पर हमले कर रहा है और वेनेज़ुएला के साथ तनाव बढ़ा हुआ है।

अमेरिका अब तक कैरेबियन और पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में कम से कम 19 हमले कर चुका है, जिनमें कम से कम 76 लोगों की मौत हुई है।

युद्धपोत की तैनाती के बाद वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने कहा है कि देश का हर नागरिक अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए तैयार है, अगर अमेरिका कोई भी सैन्य कार्रवाई करता है तो वे पीछे नहीं हटेंगे।

 

ट्रंप ने माना- सीआईए को गुप्त अभियान चलाने की अनुमति दी

अमेरिकी सेना ने हाल ही में वेनेज़ुएला से जुड़ी नशीली दवाओं की तस्करी करने वाली नाव पर गोलीबारी की है। साथ ही, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि उन्होंने सीआईए को वेनेज़ुएला में गुप्त अभियान चलाने की अनुमति दी है।

कैरिबियन सागर में अमेरिकी नौसेना की तैनाती भी बढ़ा दी गई है। हालांकि, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने अचानक से इस अभियान को नियंत्रित करने वाले एडमिरल एल्विन होल्सी को पद से हटा दिया है, जिससे सेना और जनता में सवाल उठने लगे हैं।

 

अमेरिकी हस्तक्षेप के समर्थन में विपक्षी नेता 
वेनेज़ुएला के विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो ने अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप का खुलकर समर्थन किया है। हाल में इन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। मारिया ने स्थानीय मीडिया से कहा कि “वेनेज़ुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए शासन परिवर्तन अब अनिवार्य हो गया है।”

ध्यान देने की बात यह है कि राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने मचाडो को चुनाव लड़ने से रोक दिया था।

 

ट्रंप का दावा- वेनेजुएला ने अमेरिका में अपराधी भेजे

व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यह कदम (युद्धपोत की तैनाती) उठाने के दो कारण हैं। उनके मुताबिक- “वेनेज़ुएला ने अपनी जेलें खाली कर कैदियों को अमेरिका भेजा। साथ ही, मादुरो सरकार ड्रग तस्करी में मिली हुई है।”

हालांकि ट्रंप ने इन दावों पर कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया है।

 

क्या कहते हैं विशेषज्ञ

1. सीआईए के इतिहासकार और पुलित्जर पुरस्कार विजेता लेखक टिम वेनर ने चेताया कि “सीआईए की सत्ता परिवर्तन संबंधी कार्रवाइयां क्यूबा में फिदेल कास्त्रो के खिलाफ हों या ग्वाटेमाला में, ये जन विरोध और हिंसा में ही बदलेगी।”

2. विश्लेषकों का कहना है कि वेनेज़ुएला में तेल की कमी नहीं है, न कि किसी बड़े ड्रग कार्टेल का गढ़। ऐसे में ड्रग्स के नाम पर सैन्य हस्तक्षेप को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में शंका गहरी होती जा रही है।

 

लैटिन अमेरिका में ट्रंप की आलोचना

लैटिन अमेरिका के कई देशों में अमेरिका की इस नीति की जमकर आलोचना की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ने हस्तक्षेप किया तो इस क्षेत्र में एक और राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा का दौर ला सकता है।

 

अमेरिका के लिए वेनेजुएला क्यों जरूरी

अमेरिका के लिए वेनेज़ुएला सिर्फ एक ड्रग समस्या नहीं, बल्कि एक रणनीतिक और ऊर्जा-संपन्न देश है। ट्रंप की खुली रणनीति, सीआईए की भागीदारी और विपक्षी समर्थन इन तीनों ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नया रास्ता खोल दिया है।


Edited by Tanya Rai

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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Middle East Tensions : पीएम मोदी ने इजरायल और यूएई के नेताओं से क्या बात की?

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https://www.flickr.com/photos/meaindia/53847805909
भारतीय पीएम मोदी
  • पीएम मोदी ने दोनों राष्ट्राध्यक्षों से फोन वार्ता में तनाव कम करने पर जोर दिया है।

नई दिल्ली |

इजरायल व अमेरिकी की ओर से ईरान पर किए गए हमले के बाद मध्य पूर्व में बनी तनाव की स्थिति के बीच भारतीय पीएम ने रविवार रात (1 march) दो देशों के राष्ट्राध्यक्षों से वार्ता की है। इससे पहले भारत की ओर से इस तनाव को लेकर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है।

गौरतलब है कि इस हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर (रहवर) खामेनेई की हत्या को लेकर भारत की ओर से ईरानी प्रतिनिधि से कोई वार्ता नहीं की गई है। साथ ही, ये हमले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसराइल की दो दिन की यात्रा से लौटने के तुरंत बाद हुए हैं।

पीएम मोदी ने ट्वीट करके बताया कि उन्होंने इजरायली पीएम नेतन्याहू से बात करके क्षेत्रीय तनाव को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। साथ ही कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। पीएम मोदी ने भी दोहराया कि जल्द से जल्द संघर्ष रोकना ज़रूरी है।

यूएई पर हुए हमलोें की निंदा की

इजरायल से फोन वार्ता से पहले पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से फोन पर बात की। उन्होंने ट्वीट करके लिखा कि मैंने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और इन हमलों में हुई जानों के नुकसान पर शोक व्यक्त किया।

गौरतलब है कि ईरान ने यूएई स्थित दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में से एक दुबई एयरपोर्ट पर हमला किया है, जिसे लड़ाई शुरू होने के बाद ऑपरेशन के लिए बंद कर दिया गया है। इससे पहले दुबई के मशहूर लैंड आइलैंड पाम और एक लग्जरी होटल बुर्ज अल अरब पर हमला किया था।

पीएम मोदी ने यूएई राष्ट्रपति से कहा है कि भारत इस मुश्किल समय में यूएई के साथ एकजुट खड़ा है। उन्होंने यूएई में रहने वाले भारतीय समुदाय की देखभाल करने के लिए उनका धन्यवाद किया। साथ ही कहा कि भारत तनाव कम करने (De-escalation) , क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करता है।

भारत ने हमलों पर संयम बरतने की अपील की

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार को अमेरिका-इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए संयम बरतने की अपील की। MEA के बयान में कहा गया है –
“भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है। हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हैं।”
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Breaking News : अमेरिका-इजरायल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, सरकारी मीडिया ने पुष्टि की

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अयातुल्ला अली ख़ामेनेई

नई दिल्ली |

अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने रविवार सुबह (1 march) इसकी पुष्टि की है।

इस हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू के मारे जाने की भी खबर है।

आयतुल्लाह खामेनेई ने 1989 में इस्लामी गणराज्य के संस्थापक इमाम खुमैनी की मौत के बाद से 37 साल तक ईरान और मुस्लिम उम्मत का नेतृत्व किया, अब उनकी हत्या के बाद ईरान में यह स्थान खाली हो गया है, देखना होगा कि उनका उत्तराधिकारी किसे बनाया जाता है। 

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत का दावा किया था।

बता दें कि इजरायल-अमेरिका की ओर से शनिवार को शुरू किए गए हवाई हमलों में ईरान के 31 में से 24 प्रांतों को निशाना बनाया गया, जिसमें राजधानी तेहरान भी शामिल है।

ईरानी सेना ने खामेनेई की शहादत के बाद “खतरनाक अभियान” की शुरुआत की घोषणा की है। सेना ने कहा कि यह हमला कुछ ही देर में शुरू होगा और क्षेत्र में कब्जे वाले क्षेत्रों और अमेरिकी आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाएगा।

ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक

उधर, इस्लामिक रिवॉल्यूशन गार्ड्स कोर (IRGC) ने इस्लामिक क्रांति के नेता खामनेई की शहादत पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा – इससे ईरानी राष्ट्र उनकी राह पर चलने के लिए और अधिक दृढ़ होगा।

ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है।

ईरान में अब तक 200 से ज्यादा मौतें

ईरान के एक गैर-सरकारी मानवतावादी संगठन ‘ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी’ का कहना है कि इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हैं। ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 छात्राएं घायल हैं।

ईरान का पलटवार- 9 देशों पर हमले

अमेरिका और इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के 9 देशों को निशाना बनाया। ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं।  कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब व UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। ईरान ने दुबई के पाम होटल एंड रिसोर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला किया। इसके अलावा बहरीन में कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया।

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Critical Minerals Deal: भारत-ब्राजील के बीच हुआ समझौता, कितनी घटाएगा चीन पर निर्भरता?

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भारत दौरे पर आए ब्राजीली राष्ट्रपति लुला के साथ भारतीय पीएम मोदी। (Photo Credit - X/@narendramodi)
भारत दौरे पर आए ब्राजीली राष्ट्रपति लुला के साथ भारतीय पीएम मोदी। (Photo Credit - X/@narendramodi)
  • ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर महत्वपूर्ण समझौता किया।
  • महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा को लेकर हुआ एमओयू।
  • अभी इस क्षेत्र में भारत 95% खनिजों का आयात करता है।

नई दिल्ली |

भारत और ब्राजील ने महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals) और दुर्लभ मृदा (rare earths) को लेकर एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। इन प्राकृतिक संसाधनों की खरीद के लिए भारत की निर्भरता चीन पर बहुत ज्यादा है, ऐसे में इस समझौते (Memorandum of Understanding) के जरिए भारत को ब्राजील के रूप में नया आयातक मिलेगी जो उसकी चीन पर निर्भरता घटाने की रणनीति का हिस्सा है। यह समझौता ब्राजीली राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के भारत दौरे के दौरान 21 फरवरी को हुआ।

आवश्यक खनिज से जुड़े MoU हस्ताक्षर से पहले हुई बैठक। (X/@narendramodi)

आवश्यक खनिज से जुड़े MoU हस्ताक्षर से पहले हुई बैठक। (X/@narendramodi)

इस समझौते से वैश्विक सप्लाई चेन (Global Supply Chain) को भी मजबूती मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को विश्वास का प्रतिबिंब बताया है। जबकि राष्ट्रपति लुला (Lula da Silva) ने कहा कि इस समझौते से ब्राजील के खनिज भंडार के उपयोग में वृद्धि हो सकती है, जो अभी सिर्फ 30% ही उपयोग हो रहा है। इसके अलावा, दोनों देशों का लक्ष्य अगले 5 साल में द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब डॉलर तक पहुंचाने का है।

गौरतलब है कि क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट, नियोबियम, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ्स) का इस्तेमाल हरित ऊर्जा, EVs, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा के लिए जरूरी है। भारत अपनी खनिज जरूरत का 95% हिस्सा आयात करता है। दूसरी ओर, खनिज क्षेत्र में पूरी दुनिया के उत्पादन का 90 फीसदी से अधिक हिस्से का नियंत्रण चीन के पास है। ऐसे में इस MoU से भारत को वैकल्पिक स्रोत मिलेगा, जो भू-राजनीतिक जोखिम कम करेगा। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की खनिज खरीद में तत्काल बड़ी कमी नहीं आएगी लेकिन आने वाले 3 से 5 साल में चीन पर निर्भरता 20 से 30% तक घट सकती है।

भारत व ब्राजील के बीच हुआ समझौता।

MoU साइन होने के दौरान ब्राजीली राष्ट्रपति व भारतीय पीएम।

समझौते की डिटेल जानिए 

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी दस्तावेजों के अनुसार, ब्राजील के साथ हस्ताक्षर किया गया MoU, रेयर अर्थ मिनरल्स और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में सहयोग पर केंद्रित है। इसकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं-

1- अनछुए खनिज खोजने में भारतीय कंपनियां मदद कर सकेंगी –   अनछुए खनिज भंडार का पता लगाने में (Exploration) भारतीय कंपनियां हिस्सा ले सकती हैं। लुला ने कहा कि भारत की तकनीकी विशेषज्ञता से ब्राजील के 70% अनछुए भंडारों का फायदा उठाया जा सकता है। ब्राजील के अभी तक उपयोग में नहीं लाए जा सके (Unused) खनिज भंडार – नीओबियम, लिथियम व आयरन (Iron Ore) से जुड़े हैं।

2- लौह अयस्क के लिए बनेगा स्पेशल इकोनॉमिक जोन – भारत-ब्राजील के संयुक्त उद्यम के जरिए लौह अयस्क का खनन बढ़ाया जाएगा। इसके लिए भारत में लौह अयस्क के सबसे बड़े उत्पादक NMDC (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम), ब्राजील की Vale और अडानी गंगावरम पोर्ट के बीच एक त्रिपक्षीय MoU पर हस्ताक्षर हुए हैं, जो $500 मिलियन का है। इसके जरिए लौह अयस्क या आयरन ओर की ब्लेंडिंग फैसिलिटी के लिए स्पेशल इकोनॉमिक जोन बनाया जाएगा।

3- भारतीय कंपनियों को ब्राजील में खनन प्रोजेक्ट मिलेंगे – भारतीय निवेशकों को ब्राजील में खनन प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी मिलेगी। और ब्राजील को भारत में तकनीकी निवेश मिलेगा।


समझौते पर आगे की राह

भारत-ब्राजील के बीच का यह एक गैर-बाध्यकारी MoU है, जो व्यावहारिक सहयोग के लिए रोडमैप देता है। इससे आगे जॉइंट वर्किंग ग्रुप्स बनेंगे, जो मिनिस्ट्री ऑफ माइन्स और विदेश मंत्रालय के तहत काम करेंगे।

गौरतलब है कि 2023 में भारत ने ‘क्रिटिकल मिनरल्स मिशन’ के तहत लक्ष्य रखा था कि वह साल 2030 तक इन आवश्यक खनिजों का 50% उत्पादन घरेलू स्तर पर करेगा।


By <a href="//commons.wikimedia.org/wiki/User:RCraig09" title="User:RCraig09">RCraig09</a> - <span class="int-own-work" lang="en">Own work</span>, <a href="https://creativecommons.org/licenses/by-sa/4.0" title="Creative Commons Attribution-Share Alike 4.0">CC BY-SA 4.0</a>, <a href="https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=148115012">Link</a>

आवश्यक खनिज की जितनी ज्यादा आवश्यकता बढ़ती जा रही है, जलवायु परिवर्तन के चलते उतनी ही तेजी से इनके अस्तित्व पर भी संकट पैदा हो गया है। (साभार – विकिमीडिया)

भारत की चीन पर निर्भरता कितनी ?

  • भारत अपनी रेयर अर्थ्स की जरूरत का 95 से 100% हिस्सा चीन से खरीदता है, यानी पूरी तरह चीन पर निर्भर है।
  •  ग्रेफाइट का 80%, लिथियम का 60-70% हिस्सा चीन से खरीदा जाता है।
  • 2025 में भारत ने चीन से 1.5 अरब डॉलर के मिनरल्स आयात किए।

चीन के अलावा किससे होता है आयात

  • लिथियम का आयात ऑस्ट्रेलिया व चिली से।
  • कोबाल्ट का आयात कांगो व इंडोनेशिया से।
  • निकेल के लिए भारत चीन के अलावा इंडोनेशिया पर निर्भर।

भारत को इतने खनिज की आखिर क्या जरूरत?

क्रिटिकल मिनिरल या आवश्यक खनिज का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण, सोलर विंड एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा (मिसाइल्स) व फार्मा के क्षेत्र में होता है। बैटरी बनाने में 70% आवश्यक खनिज इस्तेमाल होता है।

1- इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी निर्माण : 

भारत में बढ़ती बाइक-कारों की मांग, मंहगे होते पेट्रोल-डीजल व बढ़ते प्रदूषण के चलते सरकार ने 2030 तक कुल वाहनों का 30% इलेक्ट्रिक वाहन (EVs) करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ज्यादा आवश्यक खनिज चाहिए। 

2- सोलर और विंड एनर्जी :

कोयले पर भारत की निर्भरता घटाने के लिए सौर ऊर्जा व पवन ऊर्जा का उत्पादन बढ़ाना होगा। 2030 तक 500 गीगावाट (GW) नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता बनाने का लक्ष्य है। अभी इसकी दक्षता लगभग 200 GW है। 

3- इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र :

स्मार्टफोन, कंप्यूटर, LED लाइट, सेमीकंडक्टर चिप्स में रेयर अर्थ लगते हैं। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को $300 बिलियन तक ले जाना चाहता है। डिजिटल इंडिया, AI व 5G जैसे क्षेत्र बिना क्रिटिकल मिनरल्स के नहीं चल सकते। 

4- रक्षा (मिसाइल्स, एयरोस्पेस):

टाइटेनियम, टंगस्टन व रेयर अर्थ्स के जरिए मिसाइल, फाइटर जेट, रडार व सैटेलाइट बनते हैं। आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन बढ़ाने के लिए इन मिनरल्स की आवश्यकता है वरना विदेशी निर्भरता कम नहीं होगी।  

5- फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयां):

भारत दुनिया का बड़ा जेनेरिक दवा उत्पादक है। कुछ रेयर अर्थ और मिनरल कैटेलिस्ट के रूप में दवा बनाने में मदद करते हैं। इससे प्रोसेसिंग स्पीड बढ़ती है और शुद्धिकरण में इस्तेमाल होते हैं। ये मिनरल सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण हैं।

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