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हम अलग-अलग होकर भी एक | With Shalini Bajpai

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पत्रकार शालिनी बाजपेयी इस संडे अपनी डायरी के उन पन्नों को पलट रही हैं जो हमें बचपन की उन गलियों में ले जाते हैं, जहां मिश्रित बसावट में कई धर्मों के लोग एकसाथ पीढ़ी-दर-पीढ़ी रह लेते थे। जहां एक-दूसरे को लेकर लोग भले भोजन का परहेज करते, मगर उन्होंने कभी किसी दूसरे की थाली जबरन बदलवाने की कोशिश नहीं की। वे अलग-अलग होने के बावजूद एक ही से थे या कहें कि अब भी एक ही से हैं। बता दें कि शालिनी जी ने प्रिंट मीडिया में लंबे वक्त तक काम किया और अभी वे बतौर एक टीवी पत्रकार काम कर रही हैं।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।