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ऐसे ही चलती है दुनिया .. | रिपोर्टर की डायरी

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रिपोर्टर शालिनी की डायरी का छठा किस्सा हाजिर है, सुनिए और फीडबैक दीजिए। इस बार शालिनी फिर अपनी बचपन की उन गलियों में घूम आयी हैं, जहां कोई शादी-ब्याह किसी एक परिवार नहीं पूरे मोहल्ले की जिम्मेदारी होता था। उन गलियों में रहने वालों की दोस्ती भी कमाल की थी, जिसमें अलग-अलग जाति धर्म किसी भेदभाव नहीं बल्कि तरह-तरह के उत्सव मनाने का मौका देते थे।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।