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रिपोर्टर की डायरी

बिहार पुलिस की करतूत: छोटी सी लड़ाई को डकैती का मुकदमा बनाया, निर्दोष 2 महीने जेल में रहा; जज ने दिया थानेदार को सजा का हुक्म

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रोहतास सिविल कोर्ट ने झूठे मुकदमें में फंसाने के लिए थानेदार के खिलाफ ऐक्शन लेने का आदेश बिहार पुलिस को दिया है।
रोहतास सिविल कोर्ट ने झूठे मुकदमें में फंसाने के लिए थानेदार के खिलाफ ऐक्शन लेने का आदेश बिहार पुलिस को दिया है।
  • रोहतास जिले की सिविल कोर्ट ने अगरेर थानाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय कार्रवाई का आदेश जारी किया है।

सासाराम | अविनाश श्रीवास्तव

पुलिस महकमे में पारदर्शिता की कितनी कमी है और किस तरह पुलिस वाले कानून का गलत इस्तेमाल करके आम नागरिक को सलाखों के पीछे डाल सकते हैं, इसका एक ताजा उदाहरण बिहार के रोहतास जिले में सामने आया है। रोहतास जिले के अगरेर थाना के प्रभारी ने एक झड़प के केस को जानबूझकर डकैती का केस बना दिया, जिससे एक निर्दोष को दो महीने जेल के भीतर रहना पड़ा। अब इस मामले में रोहतास की सिविल कोर्ट ने बिहार डीजीपी को आदेश दिया है कि कानून का गलत इस्तेमाल करने वाले थानेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

अधिकार का गलत इस्तेमाल कर झूठे केस में फंसाया 

सिविल कोर्ट के जिला जज (चतुर्थ) अनिल कुमार ने आदेश में कहा कि अगरेर थानाध्यक्ष ने अपने अधिकार का गलत इस्तेमाल करते हुए एक निर्दोष को झूठे केस में फंसाया है। कोर्ट ने पाया कि यह सिर्फ एक झड़प का मामला था जिसे थानाध्यक्ष ने जानबूझकर डकैती का बनाया और अभियुक्त को गिरफ्तार कर पिछले दो माह से जेल में रहने के लिए मजबूर किया। कोर्ट ने इस केस में आरोपी को जमानत दी है।

थानेदार ने पुलिस की छवि खराब की, ऐक्शन हो – कोर्ट

अपने आदेश में अदालत ने अगरेर थानाध्यक्ष के खिलाफ डीजीपी बिहार, डीआईजी शाहाबाद व पुलिस अधीक्षक रोहतास को आदेश जारी किया है कि एक निर्दोष को जबरदस्ती झूठे केस में फंसाने व पुलिस की छवि करने के लिए संबंधित के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाए।

जमानत की सुनवाई के दौरान खुला थानेदार का झूठ

जिला जज चतुर्थ अनिल कुमार की अदालत एक जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी जो अगरेर थाना कांड संख्या 181/ 2025 से जुड़ा है। इस मामले में आरोपी निरंजन कुमार ने जमानत याचिका दाखिल की थी। इस सुनवाई के दौरान जज ने पाया कि मामले की FIR में पीड़ित किशोरी पासवान ने आरोप लगाया है कि उनके ऊपर निरंजन कुमार ने अपने दो सहयोगियों के साथ उनका मोबाइल छीनने की कोशिश की। ऐसे में जज ने मामले की संदिग्धता को देखते हुए थानाध्यक्ष और पीड़ित को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया। कोर्ट में उपस्थित होते ही किशोरी पासवान ने कहा कि आरोपी के पास कोई हथियार नहीं था और न ही वे उनका मोबाइल छीन पाए थे। इस आधार पर जज ने पाया कि यह घटना सामान्य झड़प से जुड़ी थी जिसे थानाध्यक्ष ने डकैती बताते हुए बीएनएस की धारा 309 (6) लगाई और तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को कस्टडी में ले लिया गया था।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

रिपोर्टर की डायरी

गोपालगंज : फाइलेरिया रोकने की दवा खाने के बाद स्कूली बच्चे बीमार

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  • गोपालगंज के हरखुआ माध्यमिक विद्यालय में 15 बच्चे बीमार पड़े।
  • 58 बच्चों को फाइलेरिया रोधी दवा खिलाई, फिर तबीयत बिगड़ी।
  • सभी बच्चों को सदर अस्पताल ले जाकर भर्ती कराया, सभी सुरक्षित।

गोपालगंज | आलोक कुमार 

बिहार के गोपालगंज में फाइलेरिया रोधी दवा खिलाए जाने के बाद स्कूली बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ने से हड़कंप मच गया। स्कूल में अभिभावकों ने पहुंचकर हंगामा किया, हालांकि टीचरों ने उन्हें समझाने की कोशिश की। इस बीच हेडमास्टर ने एंबुलेंस बुलाकर 15 बीमार बच्चों को सदर अस्पताल में एडमिट कराया है। बता दें कि हाथी पांव या फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दो साल से बड़े बच्चों को यह दवा खिलाई जाती है, जो एकदम सुरक्षित है।

गोपालगंज में बच्चों की तबीयत खराब होने की घटना शहर के हरखुआ गांव के एक माध्यमिक विद्यालय में घटी। हेडमास्टर कृष्ण मुरारी पांडे ने बताया कि स्कूल में 27 फरवरी को 58 बच्चे मौजूद थे। सभी बच्चों ने मिड डे मील खाया। फिर दोपहर करीब 3:00 बजे आशा वर्करो  ने स्कूल आकर सभी 58 बच्चों को फाइलेरिया और एल्बेंडाजोल की गोलियां दीं।

प्रिंसिपल ने बताया कि दवा खाते ही कुछ बच्चों को अचानक नींद आने लगी और वे सोने लगे, जबकि कुछ को उल्टी हुई।

इस बारे में सिविल सर्जन वीरेंद्र प्रसाद ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव की दवा खाने के बाद कुछ बच्चों में गैस बनने की शिकायत हो सकती है, जिससे उल्टी या पेट दर्द महसूस होता है। साथ ही उन्होंने कहा कि कई बार डर के कारण भी बच्चों को ऐसी समस्या होती है, इसमें किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।

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शराब तस्करी में जेल गए आरोपी की मौत, परिवार बोला- हत्या हुई, जेल प्रशासन ने हार्टअटैक बताया

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परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
परिजनों को बंदी की तबीयत खराब बताई गई, जब वे अस्पताल पहुंचे तो शव देखकर हंगामा किया। (तस्वीर - बक्सर संवाददाता)
  • बक्सर सेंट्रल जेल में बंदी की मौत होने से उठे सवाल।
  • शराब तस्करी के आरोप में जेल में 14 दिन से था बंदी।
  • जेल में अचानक हुई मौत को परिजनों ने बताया हत्या।

बक्सर | अमीषा कुमारी

बिहार में शराब तस्करी के आरोप में हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति की मौत बक्सर सेंट्रल जेल में हो गई है। बीती 12 फरवरी को उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। परिजनों का आरोप है कि जेल में उसके साथ मारपीट हुई, उसके शरीर पर लाल निशान हैं। परिजनों ने न्याय की मांग करते हुए सदर अस्पताल में हंगामा किया, तब मौके पर पुलिस पहुंची।अब मेडिकल बोर्ड की निगरानी में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। इस मामले में जेल प्रशासन ने उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया है।

दरअसल 40 साल के राजेंद्र सिंह को बक्सर पुलिस पकड़कर ले गई थी और 12 फरवरी को उसे जेल भेजा गया था। राजेंद्र नगर थाना क्षेत्र के विराट नगर के रहने वाले थे।  मृतक के बड़े भाई राजू कुमार ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार करने के दौरान ही पुलिस ने राजेंद्र के साथ मारपीट की थी, जबकि वह बीमार चल रहा था। राजू का आरोप है कि “जेल भेजने के बाद भी भाई को पीटा गया। शरीर पर मौजूद लाल निशान साफ बता रहे हैं कि उसकी हत्या हुई है।

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बिहार में अब दारोगा-कोतवाल के खिलाफ केस चलाने से पहले सरकार की अनुमति जरूरी

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बिहार पुलिस
बिहार पुलिस (प्रतीकात्मक फोटो)
  • बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने जारी की अधिसूचना।
  • पुलिस कर्मियों पर मुकदमा चलाने के लिए लेनी होगी सरकार की अनुमति।
  • बिहार पुलिस के सभी पदाधिकारी व कर्मियों पर लागू होगा नियम।

पटना |

बिहार में अब दारोगा से लेकर इंस्पेक्टर तक के खिलाफ किसी मामले में तब ही केस दर्ज हो सकेगा जब उसकी इजाजत राज्य सरकार देगी।

बिहार सरकार के गृह विभाग (आरक्षी शाखा) ने गुरुवार (26 feb) को इसको लेकर अधिसूचना जारी की है। यह नियम पहले DSP/ACP और ऊपर के अधिकारियों के लिए लागू था, लेकिन अब राज्य सरकार ने यह सुरक्षा कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर स्तर तक बढ़ा दी है।  सरकार का तर्क है कि इस तरह बदले की भावना के चलते पुलिस पर कार्रवाई व उत्पीड़न को रोका जा सकेगा।

सरकार के इस महत्वपूर्ण सर्कुलर में कहा गया है कि पुलिस अधिकारियों और पुलिस कर्मियों पर आपराधिक मुकदमा चलाने से पहले राज्य सरकार की पूर्व अनुमति (sanction) अनिवार्य होगी। यह शर्त उन कार्यों पर लागू होगी जो आधिकारिक ड्यूटी (official duty) के दौरान या उसके संबंध में किए गए हों।

 यह आदेश भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 218(2) के तहत लागू किया गया है। जिसमें पहले “केंद्रीय सरकार” के स्थान पर अब स्पष्ट रूप से “राज्य सरकार” को यह अधिकार दिया गया है।

बिहार जैसे राज्य जहां पुलिस के ऊपर भ्रष्टाचार व गलत मुकदमें में फंसाने के मामले सामने आते रहे हैं, राज्य सरकार की ओर से दी जा रही इम्यूनिटी उनकी ताकत को और बढ़ा देगी या नहीं, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

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