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चुनावी डायरी

पगड़ी की कसम से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक: नीतीश के सबसे बड़े विरोधी अब बनेंगे उनके उत्तराधिकारी

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सम्राट चौधरी ने कसम खाई थी कि नीतीश कुमार को हटाने तक वे पगड़ी नहीं उतारेंगे।
सम्राट चौधरी ने कसम खाई थी कि नीतीश कुमार को हटाने तक वे पगड़ी नहीं उतारेंगे।

नई दिल्ली | शिवांगी

बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी का उदय किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। एक समय वह शख्स जिसने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल करने के लिए अपनी ‘पगड़ी’ को प्रतीक बनाया था, आज उन्हीं का उत्तराधिकारी बनकर बिहार की कमान संभालने जा रहा है।

नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद सम्राट चौधरी को अगला मुख्यमंत्री बनाया जाएगा।

नीतीश कुमार की सरकार में डिप्टी सीएम थे सम्राट चौधरी।

नीतीश के खिलाफ ‘पगड़ी’ की कसम

साल 2023 में सम्राट चौधरी ने बिहार भाजपा अध्यक्ष के रूप में नीतीश को हटाने का संकल्प लिया था। उन्होंने सिर पर मुरैठा (पगड़ी) बांधकर कसम खाई थी कि

“जब तक नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से नहीं हटाऊंगा, तब तक सिर से पगड़ी नहीं खोलूंगा।”

उनकी मांग थी कि तब के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को महागठबंधन के सीएम नीतीश कुमार हटाएं क्योंकि सीबीआई ने उनके खिलाफ लैंड फॉर जॉब्स मामले में केस दर्ज किया था। तब सम्राट ने कहा था कि उनकी पगड़ी एक राजनीतिक विद्रोह के समान है। वह अक्सर नीतीश कुमार पर “जनादेश के अपमान” और बार-बार “पाला बदलने” का आरोप लगाते थे।

सम्राट चौधरी

सम्राट चौधरी

भाजपा के बिहार में प्रमुख चेहरा बने

सम्राट चौधरी के इन तेवरों के चलते भाजपा को उनमें अपना प्रमुख चेहरा नज़र आया। दूसरी अहम बात यह थी कि वे कुशवाहा समाज से आते हैं। इस तरह भाजपा को लगा कि वे सम्राट के जरिए जदयू के लव-कुश समीकरण (कुइरी-कुशवाहा) में सेंधमारी कर सकते हैं।

नीतीश के NDA में आने पर पगड़ी उतारी

हालांकि, राजनीति की बिसात पर समीकरण बदले और जनवरी 2024 में जब नीतीश कुमार दोबारा एनडीए में लौटे। तब सम्राट चौधरी को अपनी कसम के साथ समझौता करना पड़ा। वे अयोध्या गए और अपनी पगड़ी को रामलला के चरणों में समर्पित करके सिर मुंडवाया। उन्होंने कहा कि “नीतीश कुमार के इंडिया गठबंधन छोड़ देने से उनकी प्रतिज्ञा पूरी हो गई है।”

विधायकी लड़ी तो ‘बड़ा आदमी’ बनने का आश्वासन पाया

सम्राट चौधरी भाजपा दल का नेता बना दिए गए, वे एमएलसी चुनकर विपक्ष के नेता की भूमिका अदा कर रहे थे। इस बात पर प्रशांत किशोर ने कई बार चुटकी ली थी कि “उनके पास जनता का समर्थन नहीं है।”

जनता के समर्थन को साबित करने के लिए बीजेपी ने उन्हें पिछले साल विधानसभा का टिकट दिया। वे अपने पिता व पूर्व मंत्री शकुनी यादव की पारंपरिक सीट तारापुर विधानसभा से जीतकर पहली बार बिहार विधानसभा पहुंचे।

गौरतलब है कि सम्राट चौधरी के लिए चुनाव प्रचार करते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने मंच से कहा था-

“इन्हें जिताइए, मोदी जी इन्हें बड़ा आदमी बना देंगे।”

इस बयान से संकेत गया कि विधानसभा में अगर बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी तो सम्राट को मुख्यमंत्री बना सकती है।

नीतीश की खराब सेहत के बीच सरकार में अहम भूमिका

बिहार विधानसभा चुनाव-2025 में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी तो बनकर उभरी पर जदयू की उससे मात्र पांच सीटें कम आईं। लंबे समय से बिहार में जदयू बड़े और भाजपा छोटे भाई की भूमिका में काम कर रही थी।

इस बार मुख्यमंत्री तो नीतीश कुमार ही रहे लेकिन गृह विभाग भाजपा ने अपने पास रखा और सम्राट चौधरी को यह पद सौंपा। पांच माह की सरकार में नीतीश के स्वास्थ्य कारणों के बीच सरकार में कई बार सम्राट चौधरी पीछे से भूमिका अदा करते नज़र आए।

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