Connect with us

चुनावी डायरी

जीतनराम मांझी की पार्टी में बगावत : ‘परिवारवाद’ बताकर राष्ट्रीय सचिव का इस्तीफा

Published

on

राष्ट्रीय सचिव
हम (से) के राष्ट्रीय सचिव रंजीत चंद्रवंशी
  • हिन्दुस्तानी आवामी मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय सचिव रंजीत चंद्रवंशी ने दिया पार्टी से इस्तीफा

पटना |

हम (से) के राष्ट्रीय सचिव रंजीत चंद्रवंशी ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता सहित कई पदों से इस्तीफा देकर बगावत कर दी।  उन्होंने HAM के संरक्षक जीतनराम मांझी और बिहार सरकार में मंत्री व ‘हम’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष मांझी पर परिवारवाद का आरोप लगाया है। कहा- चुनाव के समय घोर उपेक्षा होने से इस्तीफा दे रहा हूं।

बता दें कि मुशहर जनजाति से आते महादलित नेता जीतनराम मांझी ने बहुत संघर्ष से राजनीति में बड़ी जगह बनाई। पर अपनी पार्टी बनाने के बाद उसमें अपने बेटे, बहू, समधन को बड़े पद दिए जिससे उनके ऊपर परिवारवाद के आरोप लगते रहे हैं। उनका बेटा बिहार सरकार में मंत्री, बहू और समधन विधायक हैं।

NDA को चुनौती दे रहे, अब पार्टी में विवाद चुनौती बनी

हाल में लगातार जीतनराम मांझी अपनी पार्टी को विधानसभा चुनावों में कम के कम 15 सीटें दिलाने के लिए भाजपा से जोरदार मोलभाव कर रहे हैं। पर इस बीच अपनी पार्टी के राष्ट्रीय सचिव का इस्तीफा देना पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच असंतोष भर सकता है।

 चुनाव के समय उपेक्षा का आरोप लगाया

हिन्दुस्तानी आवामी मोर्चा (सेक्युलर) के राष्ट्रीय सचिव के पद से इस्तीफा देते हुए रंजीत चंद्रवंशी ने कहा कि पार्टी को खून से सींचा है पर चुनाव के समय उनकी उपेक्षा हो रही है। उन्होंने कहा कि –

“HAM पार्टी सिर्फ अपने परिवार के हित की सोचती है। यहां समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए कोई जगह नहीं है। पार्टी के भीतर न तो लोकतंत्र है और न ही कार्यकर्ताओं के हित की स्वतंत्रता है। यहां केवल पिता और पुत्र अपने हिसाब से पार्टी की रूप रेखा तय करते हैं और तानाशाही सर्वोपरि है।”

हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा(सेक्युलर) के राष्ट्रीय सचिव रंजीत चंद्रवंशी

हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा(सेक्युलर) के पूर्व राष्ट्रीय सचिव रंजीत चंद्रवंशी (तस्वीर – फेसबुक)

रंजीत चंद्रवंशी ने कहा कि “लोकतंत्र में सबसे पहले कार्यकर्ताओं का सम्मान होना चाहिए। मगर यह पार्टी सिर्फ और सिर्फ परिवारवाद से ग्रसित है जहां समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए कोई जगह नहीं है। यही वजह है कि हमने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता सहित तमाम पदों से इस्तीफा दे दिया है। ”

‘अब अतिपिछड़ा के लिए पार्टी में जगह नहीं’

उन्होंने कहा, “मेरा यह निर्णय एक बहुत ही भावुक निर्णय है । मगर यह निर्णय लेना अब जरूरी हो गया था। मैने तन, मन और धन से इस पार्टी को सींचा है। पार्टी की सेवा की मगर चुनाव के समय मेरी घोर उपेक्षा हुई। यहां तक कि मुझे मुझे उचित जवाब नहीं मिला। पार्टी में पिछड़ा, अति पिछड़ा शोषित और वंचित समाज के बेटों के लिए कोई जगह नहीं है।”

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।