Connect with us

चुनावी डायरी

मोदी जी! आप झूठा एजेंडा सेट करके रोने लगते हैं..स्नेहा की मां क्या मां नहीं? : तेजस्वी

Published

on

  • अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद के शहादत दिवस के मौके पर आयोजित राजनीतिक एकजुटता रैली में पहुंचे थे पूर्व मुख्यमंत्री
  • कुशवाहा समुदाय की बड़ी आबादी वाले सासाराम विधानसभा क्षेत्र में तेजस्वी ने उठाया स्नेहा कुशवाहा की हत्या का मुद्दा

सासाराम (रोहतास) | अमित कुमार

पीएम मोदी की ओर से इंडिया गठबंधन पर आरोप लगाया गया था कि उनकी मां को मंच से गाली दी गई, इसके विरोध में एनडीए ने बिहार बंद बुलाया। इस पूरे घटनाक्रम के एक दिन बाद शुक्रवार को जिले में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पीएम के संसदीय क्षेत्र बनारस में सासाराम की छात्रा स्नेहा कुशवाहा की हत्या का मुद्दा उठाया। मंच पर स्नेहा की मां को भी लाया गया और तेजस्वी ने जनता से कहा कि ‘मोदी जी को इस मां की चिंता क्यों नहीं है? मोदी जी आप झूठा एजेंडा सेट करके रोने लगते हैं..।’

सासाराम में संबोधित करते तेजस्वी यादव (साभार - तेजस्वी एक्स हैंडल)

सासाराम में संबोधित करते तेजस्वी यादव (साभार – तेजस्वी एक्स हैंडल)

‘मोदी जी को स्नेहा की मां की चिंता नहीं’

तेजस्वी ने कहा कि ‘स्नेहा की हत्या वहां हुई, जहां मोदी जी सांसद हैं। स्नेहा के शव का पोस्टमार्टम भी नहीं होने दिया गया। यहाँ तक कि घरवालों को शव को छूने तक नहीं दिया और आनन-फानन में अंतिम संस्कार कर दिया गया। स्नेहा कुशवाहा आज हमलोगों के बीच नहीं है लेकिन उनकी माँ को हम सबको मिलकर न्याय दिलाना है। मोदी जी को इस माँ की चिंता नहीं! माँ तो सबकी माँ होती है।’

सासाराम में स्नेहा कुशवाहा की मां के साथ मंच पर तेजस्वी यादव।

सासाराम में स्नेहा कुशवाहा की मां के साथ मंच पर तेजस्वी यादव।

बता दें कि स्नेहा कुमारी(17) सासाराम के तकिया मोहल्ले की रहने वाली थी, वह नीट की तैयारी के लिए वाराणसी के एक गर्ल्स हॉस्टल में रहकर तैयारी कर रही थी। इस साल एक फरवरी को उसकी लाश हॉस्टल में मिली। वाराणसी पुलिस ने मामले को आत्महत्या बताया, लेकिन परिजनों का आरोप है कि स्नेहा की हत्या की गई।

मोदी को ‘मां’ पर पलटवार व कुशवाहो को संदेश  

दरअसल तेजस्वी यादव रोहतास में शुक्रवार को अमर शहीद बाबू जगदेव प्रसाद के 51वें शहादत दिवस के मौके पर आयोजित हुई राजनीतिक एकजुटता रैली में पहुंचे थे। यहीं उन्होंने जिले की छात्रा स्नेहा कुशवाहा की हत्या का मुद्दा उठाया। बता दें कि कुशवाहा समाज में जन्में प्रसिद्ध क्रांतिकारी नेता जगदेव प्रसाद को ‘बिहार का लेनिन’ भी कहा जाता है।

शहीद क्रांतिकारी नेता बाबू जगदेव प्रसाद को श्रद्धांजलि देते तेजस्वी

शहीद क्रांतिकारी नेता बाबू जगदेव प्रसाद को श्रद्धांजलि देते तेजस्वी (साभार – तेजस्वी एक्स हैंडल)

तेजस्वी ने अपने भाषण में कहा कि ‘शहीद जगदेव बाबू, कर्पूरी ठाकुर, लोहिया जी आदि ने सामाजिक न्याय के लिए कुर्बानियां दी हैं, उसको हम लोग भूल नहीं सकते। आज उन्हीं की शहादत के बदौलत पिछड़े लोगों को पूछा जा रहा है।’

‘साइलेंट गेम-चेंजर’ माना जाता है कुशवाहा वोट बैंक

दरअसल देखा जाए तो राजनीतिक गलियारों में एकजुटता रैली को कुशवाहा वोट बैंक साधने की एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सासाराम विधानसभा क्षेत्र में लगभग 80 से 90 हजार मतदाता कुशवाहा जाति से आते हैं। दूसरे नंबर पर बनिया और तीसरे नंबर पर मुसलमान मतदाता हैं। इसके अलावा शहीद जगदेव प्रसाद भी कुशवाहा जाति से आते थे, जिसके मद्देनजर उनकी शहादत दिवस पर ही सासाराम में राजनीतिक एकजुटता रैली का आयोजन कर आगामी विधानसभा चुनाव में कुशवाहा वोट बैंक साधने की मंशा परिलक्षित होती है।

शहीद क्रांतिकारी नेता जगदेव प्रसाद

शहीद क्रांतिकारी नेता जगदेव प्रसाद

बता दें कि कुशवाहा (कोयरी) समुदाय बिहार की कुल आबादी में लगभग 6–7% का हिस्सा है, लेकिन उनकी मौजूदगी 35–40 विधानसभा सीटों पर निर्णायक होती है। साथ ही कई अन्य सीटों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव भी होता है। इस समाज की ऐतिहासिक झुकाव बदलने की क्षमता बिहार की सत्ता के समीकरण पर भारी असर डाल सकती है और उसे ‘साइलेंट गेमचेंजर’ कहा जाता रहा है।

‘भाजपा वाले घड़ियाली आंसू बहा रहे, चुनाव मुद्दों पर होगा’ 

तेजस्वी ने अपने भाषण में कहा कि ‘मोदी जी व उनके नेता झूठा एजेंडा सेट करके रोने लगते हैं, उनके घड़ियाली आंसूओं से कुछ नहीं होगा। इस बार चुनाव मुद्दे पर होगा और उनका हिसाब देना होगा।’ बता दें कि दो सितंबर को मोदी ने अपनी मां को अपशब्द का मुद्दा उठाते हुए पीड़ा जाहिर की थी, इसे सुन रहे बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रोने लगे थे।

सुरक्षा व्यवस्था सख्त, बैनर पोस्टर से पटा शहर

रैली को लेकर शहर के फजलगंज स्थित न्यू स्टेडियम में सुरक्षा व्यवस्था के व्यापक इंतजाम रहे। इधर तेजस्वी यादव के आगमन को लेकर पूरा शहर बैनर व पोस्टर से सजा हुआ दिखा।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *