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दुनिया गोल

ईरान को झटका : हवाई हमले में राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख की मौत

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नई दिल्ली | इजरायल के भीषण हवाई हमले में ईरान के सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारिजानी की मौत हो गई है। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेेंसी रॉयटर्स ने ईरानी मीडिया के हवाले से ऐसा बताया है। एक दिन पहले 14 मार्च को  इजरायल ने ईरानी सुरक्षा प्रमुख की मौत का दावा किया था।

हालिया मौत ने ईरान के नेतृत्व को और कमजोर कर दिया है, फिर भी वह युद्ध में 18 दिनों से अमेरिका-इजरायल को टक्कर दे रहा है। 28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मार दिया गया था। ईरान पर हुए हमलों में अब तक ईरानी रक्षा मंत्री, सुप्रीम लीडर के सलाहकार, हिज़्बुल्लाह संसदीय गुट के प्रमुख, अर्धसैनिक बल के मेजर जनरल और खुफिया विभाग के डिप्टी की मौत हो चुकी है। 

ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि सुरक्षा परिषद प्रमुख अली लारिजानी के साथ उनके बेटे की भी मौत हो गई है। इसके अलावा ईरान के कुलीन अर्धसैनिक बल, बसीज (Basij) के कमांडर मेजर जनरल गुलाम रजा सुलेमानी की भी मौत की खबर है।

पिछले साल बने थे सुरक्षा परिषद के प्रमुख

अली लारिजानी ईरान के सबसे प्रभावशाली धार्मिक और राजनीतिक परिवार का हिस्सा थे। उन्होंने सैन्य और खुफिया तंत्र में मजबूत पकड़ बनाई हुई थी। पिछले साल अगस्त में ही ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद का सचिव नियुक्त किया गया था। इसके अलावा उन्हें राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का कड़ा विरोधी माना जाता है, जिससे ईरान की राजनीति में उनका अलग ही महत्व है।

राष्ट्रपति चुनाव भी लड़ा था

अली लारिजानी 2004 में पहली बार ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की टीम में शामिल हुए। उस वक्त वो उनके सलाहकार के रूप में काम कर रहे थे। उसके बाद साल 2005 में उन्होंने राष्ट्रपति का चुनाव लड़ा, लेकिन वो सफल नहीं हो पाए और साल 2008 से 2020 तक वो संसद के अध्यक्ष पद पर रहे थे।

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ईंधन संकट के बीच भारत ने बांग्लादेश को 5000 मीट्रिक टन डीजल भेजा

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नई दिल्ली | ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों के बीच ईंधन का संकट पैदा हो गया है। इससे परेशान पड़ोसी देश बांग्लादेश को भारत ने मदद पहुंचाई है।

भारत से बांग्लादेश को 5000 मीट्रिक टन डीज़ल की आपूर्ति की है।

गौरतलब है कि शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में काफी तल्खी आ गई है।  इसके बीच भारत ने बांग्लादेश को मदद का हाथ बढ़ाया है।

बांग्लादेश ने ऊर्जा संकट में मदद के लिए भारत से 50,000 मीट्रिक टन डीज़ल और देने की मांग की है। हालांकि अभी भारत की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं दिया गया है।

बांग्लादेश ने चीन से भी ईंधन संकट से निपटने के लिए मदद मांगी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-बांग्लादेश के तल्ख हुए रिश्तों को संभालने के इस अवसर को भारत हाथ से जाने नहीं देगा।

गौरतलब है कि बांग्लादेश में हाल में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार बनी है।

प्रधानमंत्री तारिक रहमान का पीएम मोदी सरकार ने उसका गर्मजोशी के साथ स्वागत किया था।

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होर्मुज़ स्ट्रेट : सुरक्षा के लिए जहाज भेजने की ट्रंप की अपील जापान-ऑस्ट्रेलिया ने ठुकराई

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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को ईरान ने बंद कर रखा है जिससे तेल के दाम बढ़ रहे हैं और ट्रंप के ऊपर दवाब पड़ रहा है।

नई दिल्ली|  वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनिया के 20% तेल के यातायात का अहम  रास्ता होर्मुज स्ट्रेट, जंग के 17 दिन बाद भी नहीं खुला है।

इस संकरे समुद्री रास्ते में जहाजों को सुरक्षा देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, फ़्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से युद्धपोत भेजने की अपील की है।

पर अब तक किसी भी देश ने मदद का हाथ नहीं बढ़ाया है। बल्कि अमेरिका के दो करीबी सहयोगी जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सीधे शब्दों में मना कर दिया है।

वैश्विक तेल संकट के बीच ट्रंप प्रशासन का भारतीय कंपनी के साथ यह सौदा अहम है।

अलजजीरा के मुताबिक, जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने संसद में कहा कि नौसैनिक जहाजों को भेजने के संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है।”
वहीं, ऑस्ट्रेलिया के परिवहन मंत्री कैथरीन किंग ने कहा है कि वह स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए जहाज नहीं भेजेंगे।
दूसरी ओर, चीन ने अपने बयान में जारी संघर्ष पर चिंता जतायी है लेकिन स्ट्रेट में जहाज भेजने का कोई जिक्र नहीं किया। जबकि ट्रंप धमकी दे चुके हैं कि मदद न करने पर वे चीनी राष्ट्रपति के साथ प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को टाल सकते हैं। 
उधर, दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा है कि वे अमेरिका की इस अपील की समीक्षा कर रहे हैं।
और ब्रिटेन के ऊर्जा मंत्री एड मिलिबैंड ने बिना डिटेल दिए कहा है कि हम होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए कई तरह से योगदान दे सकते हैं और इन विकल्पों पर विचार विमर्श चल रहा है। 

इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इन देशों के मदद करने या न करने, दोनों ही स्थितियों में वह इसे ‘याद रखेंगे’।

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म्यांमार में तख्तापलट के 5 साल बाद सेना ने बुलाया संसद सत्र

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म्यांमार में सैन्य शासक ने तख्तापलट के बाद पहली बार संसद का सत्र बुलाया है।
नई दिल्ली | पड़ोसी देश म्यांमार में तख्तापलट के पांच साल बाद सेना ने आज (15 मार्च) संसद की बैठक बुलाई है। इसके साथ ही म्यांमार में सैन्य शासन का नया राजनीतिक दौर शुरू होने जा रहा है। 
इससे पहले दिसंबर और जनवरी में चरणबद्ध आम चुनाव कराए गए थे, लेकिन इन चुनावों में प्रमुख विपक्षी दल शामिल नहीं हुए। नई संसद में सेना व उसके सहयोगी दलों का 90% सीटों पर कब्जा है।

म्यांमार की संसद

यह संसद सत्र म्यांमार की सैन्य सरकार के वास्तविक शासक जनरल मिन आंग ह्लाइंग की अध्यक्षता में होगा, जिसमें नई सरकार गठन की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होगी।
संभावना है कि इसमें सैन्य शासक मिन आंग ह्लाइंग को देश का राष्ट्रपति या सर्वोच्च शासक बनाया जा सकता है।
बता दें कि म्यांमार में 2020 में हुए आम चुनाव को सेना ने रद्द करके फरवरी-2021 में तख्तापलट कर दिया था, जिसके बाद से यहां सैन्य शासन है और बड़े स्तर पर गृह युद्ध भी जारी है। 

2021 में हुए तख्तापलट के बाद म्यांमार में बड़े स्तर पर लोकतंत्र को बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए।

तब के बाद से पहली बार इतने बड़े स्तर संसद सत्र आयोजित हो रहा है।

इस संसद सत्र के दौरान नए संविधान संशोधन और चुनाव आयोग की नियुक्ति पर चर्चा होनी है।

म्यांमार में जारी सिविल डिसओबिडियंस मूवमेंट (CDM) और पीपुल्स डिफेंस फोर्स (PDF) ने इस संसद को फर्जी और सेना का नाटक करार दिया है।

 

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