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चुनावी डायरी

वैशाली में CM नीतीश के सामने विधायक के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगे

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वैशाली में सीएम के कार्यक्रम के दौरान गमला उठाकर ले जाते युवा।
वैशाली में सीएम के कार्यक्रम के दौरान गमला उठाकर ले जाते युवा।
  • सीएम के सामने ग्रामीणों ने कहा, विधायक न काम करते और न दुख-सुख सुनते हैं।

गोरौल (वैशाली) | मुन्ना खान

वैशाली दौरे पर आए सीएम नीतीश कुमार के सामने उनके ही विधायक की पोल खुल गई जब स्थानीय जनता ने ‘वापस जाओ’ के नारे लगाना शुरू किया। सिद्धार्थ पटेल का नाम लेकर स्थानीय युवाओं ने ‘सिद्धार्थ पटेल मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। मौके पर महिलाएं भी विरोध करती नज़र आईं।

मौके पर विधायक पटेल के समर्थकों ने स्थिति संभालने की कोशिश की, विधायक व सीएम जिंदाबाद नारे लगाए। विधायक ने यह भी कहा कि ये प्रदर्शन उन्होंने कराया है जो टिकट के फिराक में हैं।

बहराल, चुनावी घोषणा से पहले विकास की योजनाओं का शिलान्यास करने आए सीएम का कार्यक्रम किरकिरी में बदल गया।

“हमारी भी जानकारी में आया कि कुछ लोगों ने नारे लगाए, हम जानते हैं कि ये कौन करवा रहा है। कुछ लोग टिकट चाहते हैं, वे ही नारेबाजी किए थे। हम जनता से जुड़े हुए हैंं।” – सिद्धार्थ पटेल, स्थानीय विधायक

बरसों से इंटर कॉलेज की मांग थी, सीएम शिलान्यास करने आए थे 

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार रविवार को गोरौल प्रखंड के हरसेर गांव में डिग्री कालेज की आधारशिला रखने आए थे, यह वैशाली विधानसभा क्षेत्र की दशकों पुरानी मांग थी।

गोरौल के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में सीएम ने इस कॉलेज की नींव रखी। कॉलेज की आधार शिला रखने के दौरान सीएम के साथ डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी और स्थानीय विधायक सिद्धार्थ पटेल मौजूद थे।

कार्यक्रम के बाद लौटकर उनका काफिला हैलिपैड की ओर जाने लगा, तभी स्थानीय लोगों ने नारेबाजी शुरू कर दी।

 

गुस्से में कार्यक्रम के पोस्टर फाड़े, सीएम 10 मिनट में निकल गए

CM रविवार को एक कार्यक्रम में हरसेर गांव पहुंचे थे। मुख्यमंत्री ने वैशाली जिले के लिए 774.5 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया।

गुस्साए लोगों ने कार्यक्रम को लेकर लगाए गए पोस्टर भी फाड़ दिए। हंगामे के बीच सीएम वहां दस मिनट से कम समय रुके।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि JDU विधायक सिद्धार्थ पटेल ने वैशाली विधानसभा में एक भी ऐसा विकास के काम नहीं किया है। ना ही लोगों के दुख-सुख में शामिल होते हैं।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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