दुनिया गोल
होर्मुज़ स्ट्रेट : सुरक्षा के लिए जहाज भेजने की ट्रंप की अपील जापान-ऑस्ट्रेलिया ने ठुकराई
नई दिल्ली| वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और दुनिया के 20% तेल के यातायात का अहम रास्ता होर्मुज स्ट्रेट, जंग के 17 दिन बाद भी नहीं खुला है।
इस संकरे समुद्री रास्ते में जहाजों को सुरक्षा देने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, फ़्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से युद्धपोत भेजने की अपील की है।
पर अब तक किसी भी देश ने मदद का हाथ नहीं बढ़ाया है। बल्कि अमेरिका के दो करीबी सहयोगी जापान और ऑस्ट्रेलिया ने सीधे शब्दों में मना कर दिया है।

वैश्विक तेल संकट के बीच ट्रंप प्रशासन का भारतीय कंपनी के साथ यह सौदा अहम है।
इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इन देशों के मदद करने या न करने, दोनों ही स्थितियों में वह इसे ‘याद रखेंगे’।
दुनिया गोल
म्यांमार में तख्तापलट के 5 साल बाद सेना ने बुलाया संसद सत्र

म्यांमार की संसद

2021 में हुए तख्तापलट के बाद म्यांमार में बड़े स्तर पर लोकतंत्र को बहाल करने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए।
इस संसद सत्र के दौरान नए संविधान संशोधन और चुनाव आयोग की नियुक्ति पर चर्चा होनी है।
दुनिया गोल
ईरान पर हमले के बाद पहली बार पीएम मोदी और ईरान राष्ट्रपति की फोन कॉल – जानिए क्या हुई बात
नई दिल्ली | ईरान पर अमेरिका व इजरायल के हमले शुरू होने के बाद पहली बार भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति से फोन पर बात की है। इसकी जानकारी खुद पीएम मोदी ने 12 मार्च की रात को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर दी।
पीएम मोदी ने कहा है कि उन्होंने पश्चिम एशिया की ‘गंभीर स्थिति’ को लेकर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से बात की है। भारतीयों की सुरक्षा, सामान और ऊर्जा की बिना रुकावट आवाजाही को भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन
गौरतलब है कि यह फोन वार्ता ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक तेल की आवाजाही बाधित होने के चलते भारत को आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू करके गैस की काला-बाजारी रोकने के कदम उठाने पड़े हैं, ताकि आम जनता के लिए ज़रूरी सामानों की निर्बाध आपूर्ति बनी रहे।
पीएम मोदी ने 13 मार्च को ट्वीट किया-
“क्षेत्र (पश्चिम एशिया) की गंभीर स्थिति पर मैंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेज़ेशकियान से बातचीत की है। तनाव बढ़ने, आम नागरिकों के मारे जाने और सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की है। भारतीय लोगों की सुरक्षा, सामान और ऊर्जा की बिना रुकावट आवाजाही भारत की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को हमने फिर दोहराया है। साथ ही बातचीत और कूटनीति के जरिए समस्या का हल निकालने की अपील है।”
पीएम मोदी ने ट्वीट करके फोन वार्ता की जानकारी दी।
भारत ने ईरानी बच्चियों की हमले पर पहली बार बयान दिया
ईरान के मीनाब शहर के प्राथमिक कन्या स्कूल में हुए हमले में 165 बच्चियों की मौत पर भारत ने 12 मार्च को प्रतिक्रिया दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) ने गुरुवार को अपनी साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में इस घटना को लेकर पूछे गए एक सवाल पर एक संक्षिप्त बयान देकर दुख जताया।

प्रेस ब्रिफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (screen grab – Youtube/Ministry of External Affairs, India)
यह प्रतिक्रिया हमले के लगभग दो सप्ताह बाद आई है, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार माना जा रहा है और उसकी खासी आलोचना हो रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सवाल के जवाब में कहा-
“स्कूली बच्चियों के बारे में आपके सवाल के संबंध में बता दें कि हमने इस चल रहे संघर्ष पर कई बयान जारी किए हैं। हमने सभी नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया है और कीमती जानों के नुकसान पर अफसोस जताया है व उस संबंध में दुख व्यक्त किया है।”
यह बयान भी दर्शाता है कि भारतीय विदेश मंत्रालय ने अमेरिका या इजरायल का नाम लिए बिना सधी प्रतिक्रिया दी है।
जयशंकर ने तीन बार लगाया ईरानी विदेश मंत्री को फोन

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (फोटो – flickr)
भारत में पैदा हुए ऊर्जा संकट के बीच भारतीय विदेश मंत्री ने अपने समकक्ष से हाल में तीन बार बात की है। साप्ताहिक प्रेस वार्ता में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने यह जानकारी मीडिया को दी। उन्होंने बताया-
“विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच हाल के दिनों में तीन बार बातचीत हुई है। पिछली बातचीत में शिपिंग की सेफ्टी और इंडिया की एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों पर बात हुई थी।”
रणधीर जायसवाल ने आगे कहा, “जहां तक युद्ध के असर की बात है, तो यह सबके सामने है कि आस-पास क्या हो रहा है। हम में से कई लोगों की ज़िंदगी पर इसका असर पड़ा है, सिर्फ हमारी ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के लोगों और देशों पर इसका असर पड़ा है ।”
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अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट: युद्ध के दो सप्ताह बाद भी ईरानी शासन अडिग, खामेनेई की मौत से कोई असर नहीं
नई दिल्ली | अमेरिका व इजरायल के लगातार दो सप्ताह से ईरान के ऊपर जारी हमलों के बावजूद ईरानी सरकार पर कोई बड़ा खतरा नहीं है और नेतृत्व पूरी तरह से अडिग बना हुआ है। यह विश्लेषण अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताजा रिपोर्ट के जरिए सामने आया है।
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