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ईरान पर 10 साल बाद फिर से UN के प्रतिबंध, क्या असर होगा?
- ईरान के न्यूक्लियर प्रतिबंधों का पालन न करने को लेकर UN ने 28 सितंबर से दोबारा प्रतिबंध लागू कर दिए।
- रूस-चीन के प्रतिबंध टालने के प्रयास काम नहीं आए, प्रतिबंधों से ईरानी अर्थव्यवस्था पर असर संभव।
नई दिल्ली |
“इस्लामी गणतंत्र ईरान राष्ट्रीय अधिकारों और हितों की पुरज़ोर रक्षा करेगा और ईरानी लोगों के अधिकारों या हितों को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कदम का उचित और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। ऐसे प्रस्तावों को मानने के लिए ईरान या अन्य संयुक्त राष्ट्र सदस्य देश बाध्य नहीं हैं।” – ईरान विदेश मंत्रालय
UN प्रतिबंधों का दायरा
- प्रतिबंध ईरान के न्यूक्लियर, सैन्य, बैंकिंग और शिपिंग क्षेत्रों पर लगेंगे।
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नये प्रतिबंधों में हथियारों की बंदी, यूरेनियम संवर्धन पर रोक, परमाणु–संबंधित लेनदेन और अन्य आर्थिक उपाय शामिल हैं।
- ये प्रतिबंध snapback प्रक्रिया के तहत लागू हुए हैं, जो 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रस्ताव संख्या 2231 के हिस्से के रूप में स्थापित थी।
- पहले कई प्रतिबंध 2006–2010 के बीच लगाए गए थे, जिन्हें बाद में इस समझौते के अंतर्गत हटाया गया था।
“अगर न्यूक्लियर कार्यक्रम की चिंता का समाधान होता, तो हम आसानी से कर लेते। हम कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएंगे।” – यूएन में ईरानी राष्ट्रपति
रूस-चीन ने प्रतिबंधों को अवैध बताया
रूस और चीन ने इस प्रतिबंध पुनर्स्थापना को अवैध या असंगत बताया है और कहा कि इससे अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति कमजोर होगी। रूस-चीन ने प्रतिबंधों को लागू करने में 6 महीने की देरी का प्रस्ताव लाया लेकिन 9 देशों ने विरोध किया और इसे दोबारा कर दिया गया।
ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी ने ईरान को चेतावनी दी
तीनों पश्चिमी देशों ने ईरान से कहा है कि वो संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध फिर से लागू किए जाने के बाद किसी भी आक्रामक कार्रवाई करने से बचे। तीनों देशों ने आरोप लगाया कि ईरान के “परमाणु कार्यक्रम विस्तार” और सहयोग की कमी इसका कारण बनी।
उनके पास “कोई विकल्प नहीं बचा” था और “आखिरी उपाय” के तौर पर इन कड़े कदमों को दोबारा लागू करना पड़ा।
तीनों देशों के संयुक्त बयान में ईरान से बातचीत जारी रखने को कहा गया है।
- भारत ईरान में $500 मिलियन निवेश से चाबहार पोर्ट बनाया, जो नए प्रतिबंधों के असर में आ सकता है।
- US ने 19 सितंबर 2025 को चाबहार पोर्ट से व्यापार करने की छूट को रद्द कर दिया, जो भारत-अफगानिस्तान व्यापार को बाधित करेगा।
- BRICS 2026 की अध्यक्षता भारत करेगा, इजरायल ने इस मंच पर ईरान को जगह न देने की बात कही है।



