दुनिया गोल
ट्रंप की योजना से क्या सूडान में जारी गृहयुद्ध थमेगा?
- संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सूडान की स्थिति बेकाबू हो चुकी है, हालिया हिंसा ने हालात बिगाड़े
नई दिल्ली |
सूडान में चल रहा गृहयुद्ध 21वीं सदी की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी मेें बदलता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र कह चुका है कि यहां हालात बेकाबू हैं। इस बीच खबर आई है कि अमेरिका की शांति योजना को सूडान से अर्ध सैनिक बल (RSF) ने स्वीकार कर लिया है। इससे उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में यहां शांति बहाल हो सकती है पर अभी सूडानी शसस्त्र सेना (SAF) ने इस पर सहमति नहीं जतायी है।
गौरतलब है कि पिछले दो साल में इस लड़ाई में 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और करीब 1.4 करोड़ लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं जो देश की आबादी का 30% हिस्सा हैं। सूडान के दारफुर इलाके में हाल की हिंसा ने नरसंहार के डर को और बढ़ा दिया है, जहां हजारों लोग भूख, बीमारी और हिंसा से मर रहे हैं।
अमेरिका व अरब देशों का शांति प्रस्ताव RSF ने माना
अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयर्ट्स के मुताबिक, सूडान की अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) ने 6 नवंबर को एक बयान में कहा कि उसने अमेरिका और अरब शक्तियों के मानवीय युद्धविराम के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। साथ ही वह दुश्मनी खत्म करने पर बातचीत के लिए तैयार है। इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने कहा है कि वह सूडान में लड़ाई समाप्त करने की दिशा में काम कर रहा है।
गौरतलब है कि सूडान में आपस में लड़ रहे दो पक्ष RSF और सूडानी सेना ने बीते ढाई साल में युद्ध के दौरान कई युद्धविराम प्रस्तावों पर सहमति जताई पर कोई सफल नहीं हुआ इसलिए अमेरिकी प्रस्ताव पर प्रारंभिक सहमति उम्मीद के साथ चुनौती भी है।
नागरिक सरकार को हटाने वाली सेना के दलों में झगड़ा
सूडान में यह गृहयुद्ध अप्रैल 2023 में शुरू हुआ, जब सूडानी सशस्त्र बल SAF और अर्धसैनिक बल RSF के बीच सत्ता को लेकर लड़ाई छिड़ गई। SAF का नेतृत्व जनरल अब्देल फताह अल-बुरहान कर रहे हैं, जबकि RSF की अगुवाई जनरल मोहम्मद हमदान दागलो (हेमेदती) ने संभाली है।
साल 2019 में इन दोनों सेनाओं ने मिलकर सूडान की नागरिक सरकार को हटा दिया था।
RSF का पांच राज्यों पर कब्जा, नागरिकों का नरसंहार कर रहा
RSF की जड़ें दारफुर की जनजातीय मिलिशिया ‘जंजवीद’ से जुड़ी हैं, जो 2003 के दारफुर नरसंहार में शामिल रही थी। अब RSF ने दारफुर के सभी पांच राज्य मुख्यालयों पर कब्जा कर लिया है और हाल ही में एल फाशर शहर पर 18 महीने की नाकाबंदी के बाद हमला किया है। एल फाशर पर कब्जे के बाद RSF के सैनिकों ने शहर में लूट, बलात्कार और नरसंहार शुरू कर दिए। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, RSF के सैनिक नागरिकों की हत्या के वीडियो सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं। सूडान के राजदूत बाबिकिर एलामिन ने कहा, “RSF अब खुलेआम अपराधों की धमकी दे रहे हैं और निर्दोष की हत्याओं के वीडियो शेयर कर रहे हैं।”
दोनों सेना गुट एकसाथ आने को राजी नहीं
SAF और RSF के बीच सबसे बड़ा झगड़ा इस बात को लेकर था कि दोनों सेनाओं का एकीकरण कैसे हो? RSF ने SAF के अधीन आने से मना कर दिया जिसके बाद युद्ध शुरू हुआ।
अमेरिका ने शांति योजना बनाई पर SAF ने ठुकरा दी
RSF दावा करता है कि उसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से हथियार मिल रहे हैं जबकि UAE ने इसे नकारा है। दूसरी ओर, रूस और चीन SAF का समर्थन कर रहे हैं जिससे हालात और बिगड़ रहे हैं।
दूसरी ओर, अमेरिका ने मिस्र, UAE और सऊदी अरब के साथ मिलकर एक शांति योजना बनाई थी, जिसे SAF ने इसे ठुकरा दिया।
इस योजना में तीन महीने का युद्धविराम और नौ महीने में नागरिक सरकार की बहाली का प्रस्ताव था।
सूडान के राजदूत ने अमेरिका से RSF को आतंकवादी संगठन घोषित करने और UAE पर हथियारों की बिक्री रोकने की मांग की है।
मानवीय संकट: देश की 30% आबादी बेघर हो गई
अब तक 1.4 करोड़ से ज्यादा लोग अपने घरों से भाग चुके हैं, जो देश की आबादी का करीब 30% हैं। एल फाशर और उत्तरी दारफुर में लाखों लोग अब भी फंसे हुए हैं। सिर्फ एल फाशर से ही 36,000 से ज्यादा लोग भाग चुके हैं।
RSF पर एथिनिक क्लिंजिंग का आरोप
RSF पर जातीय सफाए के आरोप हैं। एल फाशर में अस्पतालों में सामूहिक हत्याएं, महिलाओं के साथ अपराध और लूट की घटनाएं हुई हैं। इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) इन अपराधों के सबूत जुटा रहा है। गुटेरेस ने कहा, “एल फाशर अब हिंसा, भूख और विस्थापित लोगों का केंद्र बन गया है। RSF के कब्जे के बाद स्थिति हर दिन बदहाल होती जा रही है।”
संयुक्त राष्ट्र ने फिर शांति अपील की
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव गुटेरेस ने फिर से अपील की है कि युद्ध कर रहे दोनों पक्षों को अब बातचीत के लिए आना चाहिए और इस युद्ध को समाप्त करना चाहिए। लेकिन अभी तक शांति की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक बाहरी देशों की दखलदांजी बंद नहीं होती, सूडान में नरसंहार और निर्दोषों की मौतें जारी रहेंगी।
दुनिया गोल
Middle East Tensions : पीएम मोदी ने इजरायल और यूएई के नेताओं से क्या बात की?
- पीएम मोदी ने दोनों राष्ट्राध्यक्षों से फोन वार्ता में तनाव कम करने पर जोर दिया है।
नई दिल्ली |
इजरायल व अमेरिकी की ओर से ईरान पर किए गए हमले के बाद मध्य पूर्व में बनी तनाव की स्थिति के बीच भारतीय पीएम ने रविवार रात (1 march) दो देशों के राष्ट्राध्यक्षों से वार्ता की है। इससे पहले भारत की ओर से इस तनाव को लेकर सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की गई है।
गौरतलब है कि इस हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर (रहवर) खामेनेई की हत्या को लेकर भारत की ओर से ईरानी प्रतिनिधि से कोई वार्ता नहीं की गई है। साथ ही, ये हमले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसराइल की दो दिन की यात्रा से लौटने के तुरंत बाद हुए हैं।
पीएम मोदी ने ट्वीट करके बताया कि उन्होंने इजरायली पीएम नेतन्याहू से बात करके क्षेत्रीय तनाव को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। साथ ही कहा कि नागरिकों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। पीएम मोदी ने भी दोहराया कि जल्द से जल्द संघर्ष रोकना ज़रूरी है।
यूएई पर हुए हमलोें की निंदा की
इजराय से फोन वार्ता से पहले पीएम मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से फोन पर बात की। उन्होंने ट्वीट करके लिखा कि मैंने यूएई पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की और इन हमलों में हुई जानों के नुकसान पर शोक व्यक्त किया।
गौरतलब है कि ईरान ने यूएई स्थित दुनिया के सबसे व्यस्त एयरपोर्ट में से एक दुबई एयरपोर्ट पर हमला किया है, जिसे लड़ाई शुरू होने के बाद ऑपरेशन के लिए बंद कर दिया गया है। इससे पहले दुबई के मशहूर लैंड आइलैंड पाम और एक लग्जरी होटल बुर्ज अल अरब पर हमला किया था।
पीएम मोदी ने यूएई राष्ट्रपति से कहा है कि भारत इस मुश्किल समय में यूएई के साथ एकजुट खड़ा है। उन्होंने यूएई में रहने वाले भारतीय समुदाय की देखभाल करने के लिए उनका धन्यवाद किया। साथ ही कहा कि भारत तनाव कम करने (De-escalation) , क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा और स्थिरता का समर्थन करता है।
भारत ने हमलों पर संयम बरतने की अपील की
“भारत ईरान और खाड़ी क्षेत्र में हाल के घटनाक्रमों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करता है। हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह करते हैं।”
दुनिया गोल
Breaking News : अमेरिका-इजरायल हमले में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत, सरकारी मीडिया ने पुष्टि की
नई दिल्ली |
अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। ईरान की मीडिया तसनीम और फार्स समाचार एजेंसियों ने रविवार सुबह (1 march) इसकी पुष्टि की है।
इस हमले में खामेनेई की बेटी, दामाद, पोती और बहू के मारे जाने की भी खबर है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में ईरानी सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत का दावा किया था।
बता दें कि इजरायल-अमेरिका की ओर से शनिवार को शुरू किए गए हवाई हमलों में ईरान के 31 में से 24 प्रांतों को निशाना बनाया गया, जिसमें राजधानी तेहरान भी शामिल है।
ईरानी सेना ने खामेनेई की शहादत के बाद “खतरनाक अभियान” की शुरुआत की घोषणा की है। सेना ने कहा कि यह हमला कुछ ही देर में शुरू होगा और क्षेत्र में कब्जे वाले क्षेत्रों और अमेरिकी आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाएगा।
ईरान में 40 दिन का राष्ट्रीय शोक
उधर, इस्लामिक रिवॉल्यूशन गार्ड्स कोर (IRGC) ने इस्लामिक क्रांति के नेता खामनेई की शहादत पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा – इससे ईरानी राष्ट्र उनकी राह पर चलने के लिए और अधिक दृढ़ होगा।
ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिनों की सार्वजनिक छुट्टियों की घोषणा की गई है।
ईरान में अब तक 200 से ज्यादा मौतें
ईरान के एक गैर-सरकारी मानवतावादी संगठन ‘ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी’ का कहना है कि इन हमलों में अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से ज्यादा लोग घायल हैं। ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 85 छात्राओं की मौत हो गई और 45 छात्राएं घायल हैं।
ईरान का पलटवार- 9 देशों पर हमले
अमेरिका और इजराइल के हमले के जवाब में ईरान ने इजराइल समेत मिडिल-ईस्ट के 9 देशों को निशाना बनाया। ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं। कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब व UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। इतना ही नहीं, ईरान ने UAE के सबसे ज्यादा आबादी वाले शहर दुबई पर भी हमला किया। ईरान ने दुबई के पाम होटल एंड रिसोर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमला किया। इसके अलावा बहरीन में कई रिहायशी इमारतों को निशाना बनाया।
दुनिया गोल
Critical Minerals Deal: भारत-ब्राजील के बीच हुआ समझौता, कितनी घटाएगा चीन पर निर्भरता?
- ब्राजील के राष्ट्रपति ने भारत दौरे पर महत्वपूर्ण समझौता किया।
- महत्वपूर्ण खनिज और दुर्लभ मृदा को लेकर हुआ एमओयू।
- अभी इस क्षेत्र में भारत 95% खनिजों का आयात करता है।
नई दिल्ली |
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