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चुनावी डायरी

बिहार: पहले फेज़ के नॉमिनेशन की आज आखिरी डेट, महागठबंधन में अब भी असमंजस बरकरार

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तेजस्वी यादव व राहुल गांधी (तस्वीर - बोलते पन्ने)
  • बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के लिए 17 अक्तूबर को नॉमिनेशन की अंतिम तारीख

पटना | हमारे संवाददाता

बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नामांकन की डेडलाइन आज शाम (17 oct) को समाप्त हो जाएगी, लेकिन विपक्षी महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) में सीट बंटवारे पर सहमति अभी तक नहीं बन पाई है।

जहां सत्ताधारी एनडीए में सीटों का बंटवारा और उम्मीदवारों की घोषणा पूरी हो चुकी है, वहीं महागठबंधन के घटक दल अब तक किसी स्पष्ट फॉर्मूला पर नहीं पहुंच सके हैं।

नेता बिना सीट घोषणा के नॉमिनेशन कर रहे 

इस असमंजस का नतीजा यह है कि कई दलों के उम्मीदवार अपनी मर्जी से अलग-अलग सीटों पर नामांकन कर रहे हैं। इससे महागठबंधन की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं— क्या इस गठबंधन का नेतृत्व तेजस्वी यादव के हाथों में है या राहुल गांधी के?

वहीं, तेजस्वी यादव ने सीट बंटवारे पर अंतिम फैसला होने से पहले ही राघोपुर सीट से नामांकन दाखिल कर इस असमंजस को और गहरा कर दिया है।

बिहार में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण के तहत 121 सीटों पर 6 नवंबर को मतदान होगा। इसके लिए नामांकन की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर है।

दूसरे चरण के लिए नॉमिनेशन डेडलाइन 20 अक्तूबर

दूसरे चरण में 122 सीटों पर 11 नवंबर को वोटिंग होगी और नामांकन की आखिरी तारीख 20 अक्टूबर है। दोनों चरणों के नतीजे 14 नवंबर को आएंगे।

महागठबंधन में जारी देरी और अंदरूनी मतभेद विपक्षी एकता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वहीं, कांग्रेस ने NDA के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सीट बंटवारे की प्रक्रिया जारी है और गठबंधन मिलकर चुनाव लड़ेगा।

इसके विपरीत NDA के घटक दल में बीजेपी, लोक जनशक्ति रामविलास, हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने सभी सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है।

महागठबंधन की इस नेतृत्वहीन और भ्रम की स्थिति का असर न सिर्फ इसकी छवि पर पड़ रहा है, बल्कि इससे एनडीए को हमले तेज करने का मौका भी मिल रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि सीट बंटवारे का फार्मूला जल्द तय नहीं हुआ तो इसका सीधा प्रभाव चुनाव परिणामों पर भी दिख सकता है।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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