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काजीरंगा की सोनाली घोष ने रचा इतिहास: वैश्विक संरक्षण पुरस्कार पाने वाली पहली भारतीय

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दाये से चौथे नंबर पर खड़ीं सोनाली घोष
दाहिने से चौथे नंबर पर पुरस्कार लिए खड़ीं काजीरंगा नेशनल पार्क की निदेशक सोनाली घोष
  • दुनिया भर में प्रकृति को बचाने के लिए काम करने वाली वैश्विक संस्था ने प्रतिष्ठित पुरस्कार दिया।
नई दिल्ली |
असम के काजीरंगा नेशनल पार्क की पहली महिला निदेशक सोनाली घोष ने देश का नाम रोशन किया। वे पहली भारतीय बनीं, जिन्हें प्रकृति संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
यह पुरस्कार IUCN (इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर) ने दिया, जो दुनिया भर में प्रकृति बचाने का काम करता है।  पुरस्कार का नाम है ‘केंटन आर. मिलर अवॉर्ड’। इसे हर दो साल में नेशनल पार्क्स में नए और शानदार काम के लिए दिया जाता है।
10 अक्टूबर को UAE के अबू धाबी में हुए समारोह में सोनाली को इक्वाडोर के पर्यावरणविद् रोक सिमोन के साथ सम्मानित किया गया। IUCN ने कहा, सोनाली ने स्थानीय लोगों को जोड़ा, जागरूकता बढ़ाई और पुराने ज्ञान को विज्ञान से मिलाया। इससे काजीरंगा और मानस जैसे इलाकों में वन्यजीव संरक्षण मजबूत हुआ।
यह मॉडल भारत के अन्य टाइगर रिजर्व्स के लिए प्रेरणा बन सकता है। 2006 में शुरू यह अवॉर्ड शिकार, जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से लड़ने वालों को सम्मानित करता है। 1948 में बनी IUCN प्रकृति और संसाधनों को बचाने के लिए काम करती है। 

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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