Connect with us

चुनावी डायरी

नेता आए, शहर ठप: अमित शाह के प्रचार में 6 घंटे का ‘कर्फ्यू’, जनता पैदल!

Published

on

लखीसराय में रैली को संबोधित करते अमित शाह
लखीसराय में रैली को संबोधित करते अमित शाह
  • लखीसराय में अमित शाह के दौरे के लिए छह घंटे आवागमन बंद।
  • सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक दोपहिया वाहनों तक की एंट्री बंद।
  • मुख्य मार्ग बंद होने से आम लोगों को पैदल सफर करना पड़ा।
लखीसराय | गोपाल प्रसाद आर्य
बिहार चुनाव प्रचार के बीच नेताओं के दौरे शहर को कर्फ्यू जैसा बना देते हैं। लखीसराय जिले में ऐसा ही नजारा दिखा, जब गृह मंत्री अमित शाह के आगमन ने मुख्य सड़क को घंटों ब्लॉक कर दिया। शहर का वातावरण और लोगों का आना-जाना रुक गया। बिहार में यह दृश्य इन दिनों लगभग हर जिले में आम है क्योंकि बड़े नेताओं के चुनाव प्रचार के दौरे हो रहे हैं। 
अमित शाह को सुबह 10 बजे पहुंचना था पर वे दो घंटे की देरी से दोपहर 12 बजे जनसभा स्थल आरके उच्च विद्यालय के प्रांगण में पहुंचे, जहां उन्होंने 45 मिनट तक भाषण दिया। इस दौरान पूरे शहर में आवागमन पूरी तरह बंद रहा और लोगों को भारी समस्या का सामना करना पड़ा। जमुई मार्ग से लखीसराय शहीद द्वार तक 3 किमी का मुख्य बाजार का रास्ता लोगों को पैदल पार करना पड़ा। ये रास्ता रेलवे स्टेशन, जमुई, सिकंदरा और मुंगेर-पटना जाने वाला इकलौता रूट है। यह रूट तीन घंटे से ज्यादा ब्लॉक रहा।
बाजार में दुकानें बंद रहीं, लोग पैदल 3 किमी तक चलकर मंजिल तक पहुंचे। दोपहर दो बजे के बाद पूरी तरह ट्रैफिक सामान्य हो सका।
मीडिया के दोपहिया वाहन और ई-रिक्शा तक रोके गए। जमुई मोड़, पचना रोड चौक, कबैया मोड़, शहीद द्वार और मच्छलहटा तक जिला पुलिस व CISF के जवान बैरिकेडिंग पर तैनात रहे।
गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने 29 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की थी कि अमित शाह के दौरे को लेकर 30 अक्तूबर को सुबह आठ बजे से दोपहर 2 बजे तक दुपहिया वाहनों की एंट्री पूरी तरह बंद रहेगी। 
30 अक्तूबर की सुबह मुख्य रूट चेंज किया, जिसमें वायपास, पुराना अस्पताल, शहीद द्वार से बालिका विधायी संस्थान रूट तक बदलाव किया गया। 
शाह के जाने के बाद ही रास्ता खुला।
इस मामले में प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री की सुरक्षा के प्रोटोकॉल के चलते ऐसा किया गया और जिला वासियों ने सहयोग किया।
गृहमंत्री अमित शाह ने रैली में ‘जंगल राज’ पर तंज कसा, जिले में पैदल जाने को मजबूर लोगों ने शिकायत की कि इस वीवीआईपी कल्चर के चलते आम जनता परेशान रहती है पर नेता उस पर चुप रहते हैं।
गौरतलब है कि आगामी विधानसभा चुनाव के चलते प्रचार चरम पर है, ऐसे में बिहार में ऐसे ‘कर्फ्यू’ अब आम हैं, प्रचार की चमक में जनजीवन की फिक्र भूल जाती है।

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *