प्रदेश रिपोर्ट
NEET छात्रा केस: पॉक्सो कोर्ट की CBI को फटकार; कहा- ‘IO की लापरवाही से आरोपी को मिल सकता फायदा’
पटना | राजधानी के बहुचर्चित NEET छात्रा मामले में पॉक्सो कोर्ट ने सीबीआई (CBI) के कार्यक्षेत्र पर बेहद तल्ख टिप्पणी की है।
अदालत ने जांच में निरंतरता की कमी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के अभाव पर गुस्सा जाहिर करते हुए कहा कि “जांच अधिकारियों (IO) की लापरवाही के कारण केस कमजोर हो रहा है।”
15 अप्रैल तक चार्जशीट दाखिल नहीं तो बेल संभव
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि मुख्य आरोपी मनीष कुमार रंजन 15 जनवरी से जेल में है। पॉक्सो एक्ट के तहत 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल करना अनिवार्य है। यदि 15 अप्रैल तक सीबीआई आरोप पत्र दाखिल नहीं करती है, तो तकनीकी आधार पर आरोपी को ‘डिफ़ॉल्ट बेल’ मिल सकती है।
‘4 जांच अधिकारी बदले, किसी ने जिम्मेदारी नहीं दिखाई’
विशेष अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि “अब तक चार जांच अधिकारी बदले जा चुके हैं, लेकिन किसी ने भी जिम्मेदारी से काम नहीं किया।”
कोर्ट ने इसे ‘जानबूझकर की गई लापरवाही’ करार देते हुए कहा कि हर नए अधिकारी ने पुराने तथ्यों के साथ तालमेल बिठाने के बजाय नए सिरे से शुरुआत की।
CBI के SP से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
कोर्ट ने अब स्पष्ट आदेश दिया है कि भविष्य में स्टेटस रिपोर्ट आईओ नहीं, बल्कि सीबीआई के एसपी (SP) खुद शपथपत्र के माध्यम से दाखिल करेंगे।
बता दें कि नीट की तैयारी कर रही एक छात्रा के मर्डर व रेप मामले में दो बिहार पुलिस के जांच अधिकारी और दो सीबीआई के जांच अधिकारी बदल चुके हैं।
सीसीटीवी फुटेज व गवाहों के बयानों में अंतर
महीनों की जांच के बाद भी एजेंसियां छात्रा की मौत की स्पष्ट वजह नहीं खोज पाई हैं। मेडिकल ओपिनियन, गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में गंभीर विसंगतियां पाई गई हैं।
पीड़ित पक्ष के वकील ने आरोप लगाया है कि साक्ष्यों की कस्टडी स्थापित न कर पाना आरोपी को बचाने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है।

