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थोड़ी देर बाद रात 8:30 बजे देश को संबोधित करेंगे पीएम मोदी

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नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रात 8:30 बजे देश को संबोधित करने जा रहे हैं।

यह जानकारी समाचार एजेंसी ANI की ओर से सामने आयी है।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पीएम किस मुद्दे पर देशवासियों से बात करेंगे।

हालांकि संभावना जतायी जा रही है कि उनका संबोधन महिला आरक्षण मुद्दे पर हो सकता है।

बता दें कि इससे पहले 21 सितंबर, 2025 की रात आठ बजे पीएम मोदी ने आखिरी बार रात आठ बजे देश के नाम संबोधन किया था। तब ‘जीएसटी-बचत उत्सव’ को लेकर संबोधन हुआ था।

वे पीएम के तौर पर अब तक कुल आठ बार देश को संबोधित कर चुके हैं, जिसमें अधिकांश बार शाम आठ बजे (प्राइम टाइम) संबोधन हुआ है।

क्या है महिला आरक्षण विधेयक में बदलाव का विवाद

बता दें कि लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान (131वां संशोधन) बिल गिर गया था। ऐसा पहली बार हुआ कि मोदी सरकार की ओर से लाए गए संविधान संशोधन विधेयक को पास नहीं कराया जा सका।

दरअसल, मोदी सरकार 2023 में महिला आरक्षण बिल  (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) लायी जो सर्वसम्मति से पास हुआ। पर सरकार ने इस विधेयक की अधिसूचना अब जाकर तीन साल बाद जारी की।

साथ ही इसी विधेयक में संशोधन का बिल ले आई। नए बदलाव के तहत सरकार चाहती है कि मूल विधेयक से जुड़ी जनगणना कराने की शर्त हटा ली जाए।

सरकार का तर्क है कि इससे आरक्षण लागू होने में देर होगी। इसलिए सरकार नवीनतम उपलब्ध जनगणना (2011) के हिसाब से परिसीमन कराने का प्रस्ताव इस बिल मेें लायी। प्रस्ताव में कहा गया कि लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 816 कर दी जाएं और 2029 के आम चुनाव से इन सीटों पर 33% आरक्षण महिलाओं को दिया जाए।

इसी मुद्दे पर संशोधन विधेयक पर विपक्ष ने कड़ा विरोध किया।

विपक्ष ने विशेष संसद सत्र के दौरान सरकार पर आरोप लगाया कि “नए संशोधन के जरिए सरकार 2011 की जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों में वृद्धि करना चाहती है जो दक्षिणी राज्यों के साथ भेदभावपूर्ण होगा क्योंकि इससे उनकी सीटें घट सकती हैं।”

हालांकि पीएम मोदी ने विपक्षी दलों को आश्वासन देते हुए कहा कि राज्यों की सीटों के अनुपात में कोई बदलाव नहीं होगा, यह उनकी गारंटी है।

इस पर विपक्षी गठबंधन विशेषकर कांग्रेस के सांसद ने गृहमंत्री अमित शाह से सदन में कहा कि वे ‘लिखित आश्वासन’ दें। हालांकि ऐसा नहीं हुआ।

आखिर में इस संशोधन प्रस्ताव पर वोटिंग हुई तो समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जबकि इस संविधान संशोधन बिल को पास कराने के लिए एक-तिहाई यानी 352 वोटों की जरूरत थी।

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