दुनिया गोल
पाक ने US-ईरान को भेजा नया शांति प्रस्ताव: ’45 दिनों का संघर्ष विराम और फिर युद्ध का स्थायी अंत’
नई दिल्ली | अमेरिका और ईरान एक नए शांति समझौते के प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं जिसमें 45 दिनों के लिए संघर्ष विराम और फिर युद्ध के स्थायी अंत की शर्तें हैं। यह प्रस्ताव पाकिस्तान की ओर से भेजा गया है। अगर यह पास होता है कि संघर्ष विराम के साथ ही होर्मुज स्ट्रेट खोल दिया जाएगा।

होर्मुज स्ट्रेट
अमेरिकी समाचार वेबसाइट एक्सियोस (Axios) ने यह खबर इस मामले की जानकारी रखने वाले चार अधिकारियों के हवाले से दी है जो अमेरिका, इज़राय व मध्यस्थता करा रहे क्षेत्रीय देशों से जुड़े हैं। उधर रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि ईरान को पाक से प्रस्ताव मिला है लेकिन वह अस्थायी संघर्ष विराम के बदले होर्मुज़ नहीं खोंलेगे।
दो चरणों वाले समझौते पर चर्चा जारी
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पहला चरण: 45 दिनों का संभावित संघर्षविराम, जिसके दौरान युद्ध के स्थायी अंत पर बातचीत की जाएगी। जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है।
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दूसरा चरण: युद्ध समाप्त करने पर अंतिम समझौता।
ट्रंप ने होर्मुज़ खोलने की डेडलाइन तीसरी बार बढ़ाई

ट्रंप ने पोस्ट के जरिए ईरान को चेतावनी दी है, जिसकी भाषा की काफी आलोचना हो रही है।
उधर राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज़ खोलने की डेडलाइन को तीसरी बार बढ़ाकर मंगलवार की शाम आठ बजे तक कर दिया है। ट्रंप की चेतावनी है कि “अगर होर्मुज़ नहीं खोला गया तो वे ईरान में सब कुछ तहस-नहस कर देंगे।”
इस बारे में राष्ट्रपति ट्रंप ने रविवार को ‘एक्सियोस’ (Axios) से कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ ‘गहन बातचीत’ कर रहा है और मंगलवार को समय सीमा समाप्त होने से पहले समझौता हो सकता है।
‘पाक से मिला संघर्ष विराम का समझौता’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई मौकों पर पाक के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की तारीफ कर चुके हैं।
उधर, एक ईरानी शीर्ष अधिकारी के हवाले से रॉयटर्स ने पुष्टि की है कि ईरान को पाकिस्तान का संघर्ष विराम से जुड़ा एक प्रस्ताव मिला है, जिसकी वह समीक्षा कर रहा है।
साथ ही अधिकारी के हवासे से रॉयटर्स ने यह भी रिपोर्ट किया है कि ‘ईरान किसी अस्थायी संघर्ष विराम के बदले होर्मुज स्ट्रेट को नहीं खोलेगा।’
अमेरिकी समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने शीर्ष अधिकारी के हवाले से यह भी बताया है कि ईरान को नहीं लगता कि अमेरिका एक स्थायी समझौते के लिए तैयार है।
अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ईरान किसी डेडलाइन के खत्म होने के दवाब में आकर कोई फैसला नहीं लेगा।
टेक्स्ट मैसेज से हो ही युद्ध विराम पर चर्चा

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस
एक्सियोस ने अपनी खबर में राजनयिक प्रयासों की जानकारी रखने वाले चार स्रोतों के आधार पर दावा किया है कि यह बातचीत पाकिस्तानी, मिस्र और तुर्की के मध्यस्थों के जरिए हो रही है। साथ ही, ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच टेक्स्ट मैसेज से भी संवाद हो रहा है।
उधर, इसी मामले में रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पाक के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर रविवार की रात को उपराष्ट्रपति जेडी वांस, विशेष राजदूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ संपर्क में थे।
दुनिया गोल
ईरान ने गिराए अमेरिका के F-35 और A-10 विमान, ‘नए डिफेंस सिस्टम’ का किया इस्तेमाल
- ईरान ने अपने वायु क्षेत्र में उड़ रहे दो अमेरिकी विमानों को मार गिराया।
(नोट – इस खबर को वीडियो में देखने के लिए इस लिंक पर जाएं।)
नई दिल्ली | ईरान ने अमेरिका के दो लड़ाकू विमान मार गिराए, जिसमें उसने अपने नए एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया था। ईरान ने चार अप्रैल को यह दावा किया है।

ईरानी समाचार एजेंसी की ओर से विमान को टारगेट करने की ये तस्वीर पोस्ट की है।
बीती 3 अप्रैल को ईरान ने अमेरिका के दो सैन्य विमान और सर्च ऑपरेशन में लगे दो ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टरों को शिकार बनाकर दुनिया को चौंका दिया था।

विमान के मलबे की तस्वीर जारी की गई है।
इनमें एक F-35 फाइटर जेट और दूसरा A-10 अटैक एयरक्राफ्ट है। CBS न्यूज के मुताबिक, हमले में एक पायलट बचा लिया गया जबकि दूसरे लापता पायलट पर ईरान ने ईनाम घोषित कर दिया है।
न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, 23 साल में पहली बार दुश्मन की गोलीबारी में अमेरिकी लड़ाकू विमान गिराए गए हैं। इससे पहले 2003 में इराक युद्ध के दौरान ऐसा हुआ था।

विमान के मलबे की तस्वीर जारी की गई है।
उधर, ईरान ने चार अप्रैल को दावा किया कि अमेरिकी लड़ाकू विमान को गिराने के लिए उसने नई वायु रक्षा प्रणाली (Air Defence System) का इस्तेमाल किया।
ईरान के संयुक्त सैन्य कमांड ‘खातम अल-अंबिया’ के हवाले से रॉयटर्स ने यह रिपोर्ट किया है। इस डिफेंस सिस्टम के बारे में विस्तार में कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
उधर, ईरानी सरकारी मीडिया ने संयुक्त सैन्य कमान के एक प्रवक्ता के हवाले से कहा है कि ईरान निश्चित रूप से अपने हवाई क्षेत्र पर “पूर्ण नियंत्रण हासिल” कर लेगा।
युद्ध में अब तक अमेरिका के 7 विमान नष्ट
एक महीने से जारी युद्ध में अब तक 7 अमेरिकी विमान नष्ट हो चुके हैं। दो मार्च को कुवैत में फ्रेंडली फाइट में तीन F-15 विमान गिरे, क्रू मेंबर बच गए।
12 मार्च को इराक में KC-135 टैंकर क्रैश हुआ। 6 क्रू मेंबर मारे गए। सऊदी के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर E-3 सेंट्री व एक विमान नष्ट हुआ था।
ईरान के हालिया हमले पर ट्रंप से NBC न्यूज से कहा कि इसके दोनों देशों के बीच बातचीत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ट्रंप बोले- हम युद्ध में हैं।
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ईरान युद्ध से अब तक 5000 से ज्यादा मौतें, 8 भारतीयों की भी जान गई
नई दिल्ली | ईरान युद्ध का पांचवां सप्ताह समाप्ति की ओर है और युद्ध ने अब तक पांच हजार से ज्यादा लोगों की जान ले ली है।
मौतों की यह संख्या कई एजेंसियों ने एकत्र की है, जिसे अमेरिकी समाचार एंजेसी रॉयटर्स ने प्रकाशित किया है।
खाड़ी में रहने वाले भारतीय भी युद्ध की जद में हैं। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 8 भारतीयों की मौत हो चुकी है जबकि एक लापता है।
ईरान में अब तक सबसे ज्यादा कुल 3 हजार, पांच सौ, 19 मौते हुई हैं। और करीब 19 हजार लोग घायल हैं।
लेबनान में 1318 मौतें हुई हैं। इसमें ईरान समर्थित 400 हिजबुल्ला लड़ाकू शामिल हैं। साथ ही यहां तीन यूएन के शांति सैनिकों की भी मौत हुई हैं। जिसकी भारत समेत कई देशों ने निंदा की है।
अब तक इज़रायल के 19 लोगों की मौतें हुई हैं। इज़रायल ने दस सैनिकों की मौत की पुष्टि की है। उधर अमेरिका के अबतक 13 सैनिक मारे जा चुके हैं।
इसके अलावा खाड़ी के आठ देशों में आम लोग मारे गए हैं। यूएई में सबसे ज्यादा 11 लोग व कतर व कुवैत में 7-7 लोगों की मौत हो चुकी है। यह युद्ध बड़ी मानवीय तबाही में बदल गया है।
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राष्ट्रपति ट्रंप के देश के नाम संबोधन के बाद ईरानी राष्ट्रपति ने भी अमेरिकी जनता को लेकर खुला खत
नई दिल्ली | एक अप्रैल को राष्ट्रपति ट्रंप ने देश के नाम संबोधन देते हुए कहा कि अभी दो से तीन सप्ताह में अमेरिका ईरान से बाहर निकल सकता है। साथ ही कहा कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका आने वाले हफ़्तों में ईरान पर ‘बड़ा हमला’ करेगा और उसे ‘पाषाण युग में पहुंचा देगा’।
इस पर ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिकी जनता को खुला पत्र लिखकर संबोधित किया है। जिसमें कहा गया है कि ईरानी जनता अमेरिकी लोगों के प्रति कोई दुश्मनी नहीं रखती है। खत में उन्होंने अमेरिकी प्रशासन पर ईरान के खिलाफ “इजरायल के प्रॉक्सी के रूप में लड़ने का आरोप लगाया है।
उधर, चीन ने भी ट्रंप के बयान पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट से जहाज़ों के आवाजाही में रुकावट का मुख्य कारण ‘ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका और इसराइल के अवैध सैन्य अभियान’ हैं।
युद्ध को लेकर इसे चीन का अब तक का सबसे सख्त बयान माना जा रहा है। गौरतलब है कि चीन ने हाल में पाक के साथ मिलकर पीस प्लान पेश किया है।
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