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उत्तराखंड : पेपर लीक को ‘नकल जिहाद’ कहा.. अब CBI जांच का ऐलान

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  • आठ दिनों से चल रहा था पेपर लीक की सीबीआई जांच को लेकर प्रदर्शन
नई दिल्ली |
उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के सिलसिले की अब राज्य सरकार जांच कराने को लेकर राजी हो गई है। हाल में सीएम ने इसे ‘नकल जेहाद’ कहा था
CBI को जांच सौंपने का फैसला सोमवार को तब आया जब सीएम धामी राजधानी में प्रदर्शन कर रहे युवाओं से बातचीत करने पहुंचे, वहां उन्होंने सीबीआई जांच की सिफारिश की बात कही है।

बीते 8 दिनों से देहरादून में पेपर लीक को लेकर युवा प्रदर्शन कर रहे हैं। बीते दिनों आयोजित UKSSSC की भर्ती परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद ही उसका पेपर लीक होने के दावे हुए। इसके बाद से ही देहरादून में युवाओं का प्रदर्शन जारी है।

सीएम ने धरनास्थल पर पहुंचकर सीबीआई जांच की बात मानी (photo grab - @pushkardhami)

सीएम ने धरनास्थल पर पहुंचकर सीबीआई जांच की बात मानी (photo grab – @pushkardhami)

 उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग, राज्य में सरकारी नौकरियों के लिए भर्ती परीक्षा आयोजित करता है।

सीएम के CBI जांच की संस्तुति करने के बाद प्रदर्शनकारियों ने अपना आंदोलन कुछ दिनों के लिए स्थगित कर दिया।

नकल जिहाद करने पर हुआ था विवाद

कोचिंग और नकल माफिया एक होकर राज्य में नकल जिहाद छेड़ने का प्रयास कर रहे है, जांच के पहले ही प्रदेश में अराजकता फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन मैं उन सभी नकल माफिया जिहादियों को बता देना चाहता हूं जब तक उन्हें मिट्टी में नहीं मिला दिया जाएगा, उनकी सरकार शांत नहीं बैठेगी। – पुष्कर सिंह धामी, सीएम, उत्तराखंड

हमें भरोसा नहीं.. CBI जांच हो
प्रदर्शनकारियों ने रविवार को कहा था कि “पेपर लीक की जांच CBI से करानी चाहिए क्योंकि हम परीक्षा में विश्वास खो चुके हैं, 21 सितंबर की परीक्षा रद्द होनी चाहिए।” दूसरी ओर, CM धामी ने इसे ‘नकल जिहाद’ करार दिया, हालांकि आखिर में सरकार को मांग माननी पड़ी है।
पहले SIT बनाई थी, दो दिन में CBI की मांग मानी
 मुख्यमंत्री धामी ने 27 सितंबर को एसआईटी गठन की घोषणा की थी, फिर भी आंदोलन नहीं रुका तो 29 सितंबर को CBI की मांग मान ली है।
27 सितंबर को उन्होंने आंदोलन के नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा, “जो लोग इसका राजनीतिकरण कर रहे हैं, उनका छात्रों और उनकी परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है, फिर भी 25,000 छात्रों को अवसर देना हमारी जिम्मेदारी है। हमने एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाया है, जांच में जो भी सामने आएगा, हम कार्रवाई करेंगे।”

बोलते पन्ने.. एक कोशिश है क्लिष्ट सूचनाओं से जनहित की जानकारियां निकालकर हिन्दी के दर्शकों की आवाज बनने का। सरकारी कागजों के गुलाबी मौसम से लेकर जमीन की काली हकीकत की बात भी होगी ग्राउंड रिपोर्टिंग के जरिए। साथ ही, बोलते पन्ने जरिए बनेगा .. आपकी उन भावनाओं को आवाज देने का, जो अक्सर डायरी के पन्नों में दबी रह जाती हैं।

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