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Nitish’s 1st Cabinet Meeting : नई सरकार ने एक करोड़ युवाओं को नौकरी देने के लिए कमेटी बनाई

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  • अगले 5 सालों में 1 करोड़ युवाओं को रोजगार देने का लक्ष्य, नीतीश कैबिनेट की पहली बैठक में लगी मुहर।
  • बिहार बनेगा ‘New Age Economy’ का केंद्र, AI मिशन और डिफेंस कॉरिडोर की होगी स्थापना।

  • बंद पड़ी चीनी मिलों को मिलेगा नया जीवन, 11 शहरों में बसेंगे नए ‘सैटेलाइट टाउनशिप’।

पटना | हमारे संवाददाता

बिहार (Bihar) में नई सरकार के गठन के तुरंत बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने एक्शन मोड में आते हुए अपनी पहली कैबिनेट (Cabinet) बैठक की। इस बैठक में उद्योगों का जाल बिछाने और रोजगार सृजन को लेकर कुल 10 अहम एजेंडों पर मुहर लगाई गई। सरकार ने एक बहुत बड़ा लक्ष्य निर्धारित करते हुए ऐलान किया है कि अगले 5 वर्षों (2025-30) में बिहार के 1 करोड़ युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार दिया जाएगा। इसको लेकर मुख्य सचिव के नेतृत्व में कमेटी बना दी गई है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बताया कि सरकार का उद्देश्य बिहार को पूर्वी भारत का सबसे बड़ा ‘टेक हब’ (Tech Hub) बनाना है।

सीएम नीतीश कुमार ने ट्वीट करके कैबिनेट बैठक को लेकर जानकारी दी।

सीएम नीतीश कुमार ने ट्वीट करके कैबिनेट बैठक को लेकर जानकारी दी।

बिहार बनेगा ‘ग्लोबल वर्क प्लेस’

कैबिनेट ने बिहार को ‘न्यू एज इकोनॉमी’ (New Age Economy) के तहत विकसित करने का फैसला लिया है।

  • क्या है प्लान: सरकार बिहार को एक वैश्विक ‘बैक-एंड हब’ और ‘ग्लोबल वर्क प्लेस’ (Global Work Place) के रूप में स्थापित करना चाहती है।

  • उच्चस्तरीय समिति: इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर दी गई है, जो छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

  • टेक्नोलॉजी हब: बिहार में डिफेंस कॉरिडोर (Defense Corridor), सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क (Semiconductor Manufacturing Park), ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और मेगा टेक सिटी की स्थापना की जाएगी।

‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ में भी आगे बढ़ेगा बिहार

युवाओं को टेक्नोलॉजी आधारित रोजगार से जोड़ने के लिए कैबिनेट ने ‘बिहार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिशन’ (Bihar Artificial Intelligence Mission) की स्थापना को स्वीकृति दे दी है। इसका मकसद राज्य को एआई (AI) के क्षेत्र में अग्रणी बनाना और नई तकनीकों का उपयोग कर विकास को गति देना है।

बंद चीनी मिलें होंगी चालू, किसानों को राहत

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने राज्य में बंद पड़ी 9 सरकारी चीनी मिलों को फिर से खोलने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही कुल 25 चीनी मिलों को चालू करने पर सहमति बनी है। इसके लिए नई नीति और कार्ययोजना तैयार की गई है।

11 शहरों की बदलेगी सूरत, बनेगा ‘सीतापुरम’

नगरीय विकास के तहत पटना (Patna), सोनपुर, सीतामढ़ी सहित कुल 11 शहरों में नए ‘सैटेलाइट टाउनशिप’ (Satellite Township) और ‘ग्रीनफील्ड टाउनशिप’ विकसित किए जाएंगे।

  • सीतापुरम: सीतामढ़ी (Sitamarhi) में ‘सीतापुरम’ नाम से एक विशेष टाउनशिप बनाई जाएगी।

  • मकसद: इसका उद्देश्य आधुनिक शहरी ढांचे का निर्माण करना और निवेश को आकर्षित करना है।

1 दिसंबर से विधानसभा सत्र

कैबिनेट ने यह भी निर्णय लिया है कि बिहार विधानसभा का शीतकालीन सत्र 1 दिसंबर से शुरू होकर 5 दिसंबर तक चलेगा। सत्र के पहले दिन नव-निर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार में 50 लाख युवाओं को रोजगार दिया गया था और अब दोगुनी ताकत से काम किया जाएगा।

जनहित में जारी

गंगा नदी में वोटिंग करते हुए इफ्तारी करने पर 14 मुस्लिम युवकों की गिरफ्तारी, विपक्ष ने UP पुलिस पर सवाल उठाए

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पुलिस ने वोटिंग के दौरान इफ्तारी करने वाले 14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया, गंगा नदी में वोटिंग करके बनाई थी रील (इनसेट)।

नई दिल्ली |  गंगा में नाव पर रोजा इफ्तार करने पर यूपी पुलिस ने 14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तारी किया है। ये सभी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं और अब यूपी पुलिस ने इस युवकों पर जबरन वसूली (Extortion) की धारा भी लगा दी है। वाराणसी में हुई इस घटना को लेकर पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्षी नेताओं ने कड़ी आलोचना की है।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पूछा है कि क्या गंगा पर रोजा इफ्तार नहीं कर सकते? उन्होंने दावा किया कि गंगा में एक फाइव स्टार जहाज चला था,  जिसमें शराब बटी थी। उन्होंने पूछा है कि उस जहाज के मालिक के ऊपर कार्रवाई क्यों नहीं की गई थी?

उधर, कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने तंज किया है कि यूपी पुलिस कानून के दुरुपयोग का कीर्तिमान बनाना चाहती है।

दूसरी ओर, भाजपा के राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि गंगा की पवित्रता से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

वाराणसी पुलिस ने इन मुस्लिम युवकों के ऊपर कड़ी धाराएं बढ़ा दी हैं, जिसके बाद ईद के दिन इस घटना ने चर्चा पकड़ ली। सोशल मीडिया पर लोग इसमें प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

वाराणसी के ACP विजय प्रताप ने कहा है कि BNS की धारा 308 इसलिए जोड़ी गई है क्योंकि वोट चालक ने अपने बयान में दावा किया है कि आरोपियों ने धमकी देकर मोटर वोट का कंट्रोल अपने पास कर लिया था।

इस मामले पर अंग्रेजी के प्रतिष्ठित अखबार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ ने 21 मार्च के संपादकीय में यूपी पुलिस की कड़ी आलोचना की है।

अखबार ने लिखा है कि गंगा नदी पर किसी एक धर्म का अधिकार नहीं है, किसी समुदाय के साथ नदी को लेकर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

बता दें कि यह घटना 15 मार्च की है। गंगा नदी में वोट पर बैठे एक ही परिवार के 14 युवकों ने इफ्तार किया और इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाला था। भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष ने इस मामले को लेकर थाने में शिकायत दी और 17 मार्च को इन युवकों को गिरफ्तार कर लिया गया था।

इंडियन एक्सप्रेस ने इन युवकों को बेल न देने के अदालत के आदेश की भी आलोचना की है।

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ईद पर शांति से त्योहार मनाने का इंतजाम करे पुलिस : दिल्ली हाईकोर्ट

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delhi high court

नई दिल्ली | दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि ईद के मौक़े पर आम लोगों की ज़िंदगी में कोई रुकावट न आए। दिल्ली हाईकोर्ट का यह आदेश गुरुवार (19 मार्च) को ईद से ठीक पहले आया है। भारत में चांद की तस्दीक के आधार पर ईद 20 या 21 मार्च को मनाई जा सकती है।

अदालती रिपोर्टिंग करने वाली समाचार वेबसाइट लाइव लॉ ने कोर्ट के आदेश के हवाले से कहा है कि “दिल्ली पुलिस को ऐसी व्यवस्था करने के लिए कहा गया है जिससे हर किसी को ‘सुरक्षित’ माहौल महसूस हो। समाज के किसी भी वर्ग से किसी को भी ऐसा करने की इजाज़त न दी जाए जिससे हालात बिगड़ें।”

दरअसल नागरिक अधिकारों की पैरोकारी करने वाले एक संगठन ‘एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स’ की याचिका की सुनवाई के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस को ऐसा आदेश दिया है।

आदेश में कहा गया है कि याचिकाकर्ता की चिंता बीते 4 मार्च को हुई घटना से जुड़ी प्रतीत होती है, ऐसे में दिल्ली पुलिस को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।

होली पर दो घरों में झगड़े में हुई थी तरुण की मौत

बता दें कि पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दिन दो परिवारों के बीच हुए झगड़े में तरुण नामक एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ यह हिंसा तब शुरू हुई जब होली खेलते समय तरुण के परिवार की एक लड़की ने पानी से भरा गुब्बारा फेंका, जो पड़ोसी परिवार की एक महिला पर जा गिरा। जिसके बाद दो परिवारों मेें झगड़ा हुआ।

सांप्रदायिक हिंसा की संभावना पर ऐक्शन की मांग

इस घटना ने बाद में सांप्रदायिक रंग ले लिया था। जिसके बाद ‘एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ सिविल राइट्स’ ने चिंता जाहिर की कि ईद पर उत्तम नगर में सांप्रदायिक हिंसा हो सकती है क्योंकि इस इलाके में ईद को लेकर उकसावे वाले बयान दिये जा रहे हैं और लोगों को इकट्ठा किया जा रहा है। इस चिंता के साथ इस संगठन ने 15 मार्च को दिल्ली पुलिस कमिश्नर को पत्र लिखकर ऐक्शन लेने को कहा। फिर इसी मामले में दिल्ली पुलिस को निर्देश देने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

ईद खुशी का त्योहार, किसी की जिंदगी पर न हो असर

चीफ़ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने अपने आदेश में कहा, “ईद खुशी का त्योहार है, यह सबकी ज़िम्मेदारी है कि इस मौके पर किसी भी तरह की घटना से आम लोगों की ज़िंदगी प्रभावित न हो। राज्य और ख़ासकर पुलिस की ज़िम्मेदारी बनती है कि हर नागरिक अपने धार्मिक अधिकार और त्योहार की ख़ुशियां शांति से मना सके।”

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Ops सिंदूर पर विवादित पोस्ट : प्रो. महमूदाबाद के खिलाफ केस वापस, जानिए हरियाणा सरकार क्या बोली?

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प्रो. अली खान महमूदाबाद राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर हैं।
नई दिल्ली |  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अशोका यूनिवर्सिटी के प्रो. अली खान महमूदाबाद की ओर से किए गए सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर उनके ऊपर मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। 
यह कदम हरियाणा सरकार ने उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि यह फैसला “एक बार की उदारता” (one-time magnanimity) दर्शाते हुए किया गया है।
गौरतलब है कि प्रो. महमूदाबाद को पिछले साल एक सोशल मीडिया पोस्ट के लिए गिरफ्तार कर लिया था, जिसकी शिकायत हरियाणा की महिला आयोग की ओर से की गई थी।
फिर सुप्रीम कोर्ट ने उनके पोस्ट पर मौखिक टिप्पणी करते हुए उन्हें अंतरिम जमानत दी थी। लेकिन साथ में एक कमेटी बनाकर उनके पोस्ट की समीक्षा का निर्देश भी दिया था।
दरअसल प्रो. महमूदाबाद ने भारत में अल्पसंख्यकों के साथ हो रहे व्यवहार और कर्नल सोफिया कुरैशी को ऑपरेशन सिंदूर की प्रेस वार्ता का जिम्मा देते हुए एक पोस्ट लिखा था।

क्या था प्रो. का विवादित पोस्ट

अपने फेसबुक पोस्ट में महमूदाबाद ने आतंकवाद को लेकर पाक की आलोचना की थी, युद्ध की निंदा की थी और कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर पर भारत की प्रेस ब्रीफिंग का नेतृत्व करने वाली भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को मिली प्रशंसाएं जमीन पर भी दिखनी चाहिए।
इस पोस्ट को लेकर उन पर BNS की कई धाराओं के तहत सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने और राष्ट्रीय संप्रभुता को खतरे में डालने जैसे आरोप लगाए गए थे।

सुप्रीम कोर्ट ने पुर्नविचार के लिए कहा

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पुर्नविचार करने और अभियोजन की अनुमति न देकर केस खत्म करने का आरोप लगाया था। इसके बाद राज्य सरकार की ओर से केस वापस लेने का फैसला सामने आया है।
राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच से कहा कि प्रोफेसर महमूदाबाद पर मुकदमा चलाने की मंजूरी नहीं दी गई है।
यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पोस्ट्स पर पुलिस कार्रवाई के बीच संतुलन को लेकर चल रही बहस में महत्वपूर्ण है।  
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